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मृत व्यक्ति के Aadhaar से जारी हुआ Learning Licence? इलाहाबाद HC ने केंद्र और UP सरकार से मांगा जवाब
लखनऊ में इलाहाबाद हाईकोर्ट की पीठ ने उस दावे पर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है, जिसमें एक मृत व्यक्ति के Aadhaar विवरण का इस्तेमाल कर उसके नाम पर Learning Licence जारी होने की बात कही गई है। मामला Aadhaar आधारित ऑनलाइन Learning और Driving Licence व्यवस्था को चुनौती देने वाली PIL से जुड़ा है।
Kalpana Gautam08 सित. 2026, 07:43 PM IST

Aadhaar आधारित ऑनलाइन ड्राइविंग और लर्निंग लाइसेंस व्यवस्था को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है, क्योंकि याचिकाकर्ता ने दस्तावेज पेश कर दावा किया कि एक मृत व्यक्ति के Aadhaar नंबर का इस्तेमाल कर उसके नाम पर Learning Licence जारी किया गया।
यह मामला संतोष मिश्रा की ओर से दाखिल जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिका में Central Motor Vehicles Rules, 1989 के Rule 11 और Aadhaar Authentication से संबंधित अधिसूचनाओं को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता ने Aadhaar आधारित ऑनलाइन लाइसेंस प्रक्रिया की विश्वसनीयता और सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं।
याचिकाकर्ता का कहना है कि मौजूदा ऑनलाइन व्यवस्था में आवेदक Aadhaar नंबर उपलब्ध कराता है, जिसके बाद Aadhaar डेटाबेस से संबंधित जानकारी लेकर लाइसेंस प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है। उनका तर्क है कि Aadhaar उम्र का वैध प्रमाण नहीं है और केवल इसके विवरण पर निर्भर रहने से कम उम्र के लोगों को भी लाइसेंस जारी होने की संभावना पैदा हो सकती है।
याचिका में एक अन्य मामले का भी उल्लेख किया गया, जिसमें Aadhaar विवरण के साथ कथित तौर पर अश्लील तस्वीर ऑनलाइन अपलोड किए जाने के बावजूद Learning Licence जारी होने का दावा किया गया। याचिकाकर्ता ने ऐसी घटनाओं को गंभीर सुरक्षा चिंता बताते हुए इनके व्यापक प्रभाव की ओर अदालत का ध्यान आकर्षित किया।
हालांकि, केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से इन आरोपों का विरोध किया गया। सरकारी पक्ष ने अदालत को बताया कि सिर्फ Aadhaar नंबर उपलब्ध कराने से Learning Licence स्वतः जारी नहीं होता, बल्कि निर्धारित अन्य औपचारिकताएं भी पूरी करनी होती हैं। इस पर अदालत ने सवाल किया कि अगर मृत व्यक्ति के नाम पर वास्तव में लाइसेंस जारी हुआ है, तो ऐसा कैसे संभव हुआ। सरकारी पक्ष इस सवाल का तत्काल स्पष्ट जवाब नहीं दे सका।
मामले में अदालत ने भारत के अटॉर्नी जनरल को भी नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है और अगली सुनवाई करीब छह सप्ताह बाद रखी गई है।
