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अब Crypto से भरवा सकेंगे पेट्रोल-डीजल? जानिए कैसे काम करता है नया सिस्टम
भारत में क्रिप्टोकरेंसी को सीधे भुगतान के लिए इस्तेमाल करने की बजाय कुछ उपयोगकर्ता विदेशी फिनटेक प्लेटफॉर्म के जरिए USDT जैसे stablecoins और दूसरे Virtual Digital Assets को भारतीय gift cards और vouchers में बदल रहे हैं। इन vouchers से किराना, पेट्रोल, मोबाइल रिचार्ज, फूड डिलीवरी और सोने जैसी चीजों की खरीदारी की जा सकती है। इस व्यवस्था ने टैक्स, मनी लॉन्ड्रिंग और cross-border payment regulations को लेकर नियामकीय चिंताएं बढ़ा दी हैं।
Kalpana Gautam08 सित. 2026, 07:43 PM IST

मुंबई: भारत में Crypto Currency के इस्तेमाल को लेकर एक नया और बेहद दिलचस्प पेमेंट मॉडल सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ विदेशी फिनटेक और क्रिप्टो प्लेटफॉर्म भारतीय यूजर्स को अपने crypto assets को ऐसे gift cards और vouchers में बदलने की सुविधा दे रहे हैं, जिनका इस्तेमाल भारत में रोजमर्रा की खरीदारी के लिए किया जा सकता है।
इस व्यवस्था में भारतीय यूजर अपने निजी crypto wallet से USDT जैसे stablecoins या दूसरे VDAs विदेशी प्लेटफॉर्म को भेजता है। इसके बदले उसे किसी भारतीय ब्रांड या सेवा के लिए digital gift card या voucher मिल सकता है। इन vouchers का इस्तेमाल संबंधित दुकानों और सेवाओं पर किया जा सकता है। रिपोर्ट में किराना सामान, पेट्रोल, मोबाइल रिचार्ज, फूड डिलीवरी और सोना खरीदने तक के उदाहरण दिए गए हैं।
इस पूरे सिस्टम में विदेशी प्लेटफॉर्म और भारतीय voucher issuing या aggregation कंपनियों के बीच साझेदारी की भूमिका महत्वपूर्ण बताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशी प्लेटफॉर्म भारतीय partners से bulk में vouchers खरीद सकते हैं या technology tie-ups के जरिए voucher codes उपलब्ध करा सकते हैं। इसके बाद भारतीय ग्राहक उन vouchers को घरेलू merchants के यहां इस्तेमाल कर सकता है।
यानी इस मॉडल में क्रिप्टो सीधे भारतीय दुकानदार को भुगतान नहीं किया जाता। इसके बजाय crypto को पहले विदेशी प्लेटफॉर्म के स्तर पर value में बदला जाता है और फिर उसके जरिए भारतीय बाजार में इस्तेमाल होने वाला voucher उपलब्ध कराया जाता है। यही वजह है कि विशेषज्ञ इसे पारंपरिक बैंकिंग और payment channels से अलग एक cross-border route के तौर पर देख रहे हैं।
रेगुलेटर्स की चिंता क्यों बढ़ी?
इस व्यवस्था को लेकर सबसे बड़ी चिंता यह है कि crypto transaction और भारत में होने वाली अंतिम खरीदारी के बीच पारंपरिक banking trail अलग तरीके से बनता है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि cross-border payment rules, taxation और Anti-Money Laundering (AML) requirements इस तरह के transactions पर किस स्तर तक लागू होते हैं। ET की रिपोर्ट के मुताबिक, blockchain research organisation की ओर से इस तरह के payment pathways की जानकारी वित्त और गृह मंत्रालय के सामने भी रखी गई है।
भारत में crypto और VDA service providers के लिए AML compliance पहले से लागू है। वित्त मंत्रालय के Financial Intelligence Unit ने स्पष्ट किया है कि भारत में उपयोगकर्ताओं को सेवाएं देने वाले offshore VDA service providers भी, संबंधित गतिविधियां करने पर, PMLA के तहत reporting entity के रूप में registration और compliance के दायरे में आ सकते हैं।
FIU-IND ने अक्टूबर 2025 में 25 offshore VDA service providers को PMLA compliance को लेकर notices भी जारी किए थे। इससे यह स्पष्ट है कि केवल कंपनी का भारत के बाहर registered होना उसे भारतीय AML oversight से स्वतः बाहर नहीं करता।
टैक्स का क्या होगा?
Crypto को voucher में बदल देने से उससे जुड़ी tax obligations अपने आप खत्म नहीं हो जातीं। आयकर विभाग के अनुसार Virtual Digital Assets से होने वाले gains पर 30 प्रतिशत टैक्स लागू है। VDA transactions के लिए income-tax returns में अलग reporting व्यवस्था भी मौजूद है।
यही वजह है कि crypto से voucher खरीदने और फिर उस voucher से सामान खरीदने वाले मॉडल में यह महत्वपूर्ण सवाल उठता है कि crypto asset के transfer/conversion का tax treatment कैसे होगा और transaction की reporting किस तरह की जाएगी। इस मामले में किसी भी व्यक्ति को यह मान लेना उचित नहीं होगा कि voucher का इस्तेमाल करने से crypto से संबंधित tax liability समाप्त हो जाती है।
क्या भारत में Crypto से सामान खरीदना अब कानूनी हो गया है?
नहीं। इस खबर का यह अर्थ निकालना गलत होगा कि भारत ने cryptocurrency को रुपये की तरह वैध भुगतान माध्यम घोषित कर दिया है। सामने आया मॉडल मुख्य रूप से crypto-to-voucher conversion पर आधारित है। इसकी regulatory treatment और cross-border implications को लेकर ही सवाल उठ रहे हैं।
RBI की मौजूदा foreign-exchange guidance के मुताबिक residents द्वारा forex transactions निर्धारित authorised persons और permitted purposes के तहत किए जाने चाहिए। इसलिए crypto के जरिए विदेशी प्लेटफॉर्म तक value transfer और फिर भारत में purchasing power के रूप में उसका इस्तेमाल regulatory scrutiny का विषय बन सकता है।
