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सत्य निकेतन हादसे के बाद सुप्रीम कोर्ट का बड़ा रुख, दिल्ली के PG-हॉस्टलों की होगी सुरक्षा जांच?

दिल्ली के सत्य निकेतन में PG बिल्डिंग गिरने से 7 लोगों की मौत के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर नजरें गड़ा दी हैं। सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई होगी, वहीं अमिकस क्यूरी ने दिल्ली के PG, निजी हॉस्टलों और छात्र आवासों के समयबद्ध सेफ्टी ऑडिट की मांग की है। कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित मामले को अपने पास ट्रांसफर करने के संकेत भी दिए हैं।

Sonali08 सित. 2026, 07:43 PM IST
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सत्य निकेतन हादसे के बाद सुप्रीम कोर्ट का बड़ा रुख, दिल्ली के PG-हॉस्टलों की होगी सुरक्षा जांच?

दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला PG बिल्डिंग गिरने से हुई सात लोगों की मौत का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए शुक्रवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया है कि दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित मामले को अपने पास ट्रांसफर करने पर विचार किया जा सकता है। मामला सुप्रीम कोर्ट में पहले से लंबित उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें देशभर में बिल्डिंग बायलॉज के उल्लंघन और रिहायशी परिसरों को अवैध रूप से व्यावसायिक इस्तेमाल में बदलने से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं। इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार सिन्हा अमिकस क्यूरी की भूमिका में हैं।

6 सितंबर को हुआ था दर्दनाक हादसा

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में 6 सितंबर को पांच मंजिला इमारत अचानक ढह गई थी। यह इमारत छात्रों के लिए बॉयज PG के तौर पर इस्तेमाल की जा रही थी। हादसे में सात लोगों की मौत हुई, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए। राहत और बचाव दलों ने मलबे से लोगों को बाहर निकाला। प्रारंभिक जांच में बेसमेंट में चल रहे काम, पानी जमा होने और इमारत की संरचनात्मक मजबूती को लेकर सवाल उठे हैं। हादसे के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों से जवाब मांगा और हाई-लेवल जांच के निर्देश दिए थे।

अमिकस क्यूरी ने सुप्रीम कोर्ट में क्या मांग की?

वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार सिन्हा ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर सत्य निकेतन हादसे को भी मौजूदा मामले के रिकॉर्ड पर रखा है।

रिपोर्ट में सुप्रीम कोर्ट से दिल्ली में कॉलेज और विश्वविद्यालयों के आसपास चल रहे:

  • PG accommodations
  • निजी हॉस्टल
  • छात्र आवास
  • अन्य समान संस्थानों

का समयबद्ध निरीक्षण और सेफ्टी ऑडिट कराने के लिए निर्देश देने की मांग की गई है।

मूल चिंता यह है कि बड़ी संख्या में छात्र ऐसे निजी आवासों में रह रहे हैं, जिनकी संरचनात्मक सुरक्षा, स्वीकृत नक्शे और इस्तेमाल की अनुमति को लेकर पर्याप्त निगरानी नहीं हो सकती है।

दिल्ली हाईकोर्ट में भी चल रहा है मामला

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सत्य निकेतन हादसे को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट पहले ही PIL पर सुनवाई कर रहा है और कई निर्देश जारी किए जा चुके हैं। इसी के बाद सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि वह हाईकोर्ट में लंबित मामले को अपने पास ट्रांसफर करने के विकल्प पर विचार कर सकता है। दिल्ली हाईकोर्ट ने 7 सितंबर को मामले की सुनवाई करते हुए MCD और अन्य अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए थे। कोर्ट ने कहा था कि अधिकारियों को बचाव प्रयास दोगुने करने चाहिए और अपनी जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता।

PG और हॉस्टल की सुरक्षा पर बड़ा सवाल

सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में निजी PG और हॉस्टल में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा का मुद्दा गंभीरता से सामने आया है। दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल एक अन्य PIL में भी निजी PG और हॉस्टलों का व्यापक स्ट्रक्चरल एवं सेफ्टी ऑडिट कराने की मांग की गई है। याचिका में मृतकों के परिजनों के लिए 1 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग भी की गई है। वहीं, एक अन्य PIL में दिल्ली विश्वविद्यालय के सभी कॉलेजों में हॉस्टल सुविधाएं उपलब्ध कराने और दिल्ली के लिए हॉस्टल डेवलपमेंट पॉलिसी बनाने की मांग की गई है। इस याचिका को मंगलवार को तत्काल सूचीबद्ध करने से हाईकोर्ट ने इनकार कर दिया।

अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर नजर

सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार की सुनवाई इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि मामला केवल सत्य निकेतन की एक इमारत तक सीमित नहीं है। अमिकस क्यूरी की मांग स्वीकार होने पर दिल्ली के PG, निजी हॉस्टल और छात्र आवासों की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक जांच का रास्ता खुल सकता है। सुप्रीम कोर्ट यह भी तय कर सकता है कि दिल्ली हाईकोर्ट में चल रही कार्यवाही को वहीं जारी रखा जाए या व्यापक मुद्दे को देखते हुए मामले को सुप्रीम कोर्ट अपने पास लेकर आगे की निगरानी करे।