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दिल्ली से बाहर निकला National Film Awards, गुजरात में आयोजन को लेकर उठे सवाल
72वें National Film Awards का आयोजन इस बार नई दिल्ली की जगह गुजरात के एकता नगर (Kevadia) में किया जाएगा। 22 सितंबर 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू विजेताओं को सम्मानित करेंगी। सरकार के मुताबिक National Film Awards को अब केवल National Capital तक सीमित रखने के बजाय देश के अलग-अलग हिस्सों में आयोजित करने की नई नीति अपनाई गई है। हालांकि, गुजरात को ही इस साल के आयोजन के लिए चुनने को लेकर फिल्म जगत और सोशल मीडिया में सवाल भी उठ रहे हैं। फिल्म निर्देशक राहुल ढोलकिया ने भी venue change पर सवाल उठाया है।

नई दिल्ली: भारत के प्रतिष्ठित National Film Awards के इतिहास में इस साल बड़ा बदलाव होने जा रहा है। 72वें National Film Awards का समारोह पहली बार लंबे अंतराल के बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से बाहर आयोजित किया जाएगा। 22 सितंबर 2026 को गुजरात के एकता नगर (केवड़िया) में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू विजेताओं को पुरस्कार प्रदान करेंगी। यह फैसला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि लंबे समय से National Film Awards का समारोह दिल्ली में आयोजित होता रहा है।
आखिर गुजरात में ही क्यों हो रहा है समारोह?
इस सवाल का सबसे महत्वपूर्ण जवाब खुद सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की आधिकारिक घोषणा में मिलता है। सरकार ने कहा है कि अब National Film Awards को सिर्फ राष्ट्रीय राजधानी तक सीमित रखने के बजाय देश के अलग-अलग हिस्सों में आयोजित करने की नीति अपनाई गई है। मंत्रालय के मुताबिक इसका उद्देश्य देश के अलग-अलग क्षेत्रों की फिल्मी प्रतिभा, भाषाई विविधता और सांस्कृतिक विरासत को सामने लाना है। इस साल गुजरात के एकता नगर में समारोह आयोजित किया जा रहा है और इसे ‘Ek Bharat, Shreshtha Bharat’ की भावना से जोड़ा गया है। यानी Official Reason यह है कि National Film Awards को Delhi-centric आयोजन से बाहर निकालकर देश के अलग-अलग हिस्सों तक ले जाया जाए। सरकार ने अभी यह नहीं कहा है कि गुजरात को किसी राजनीतिक कारण से चुना गया है।
एकता नगर ही क्यों?
इस बार आयोजन की जगह भी अपने आप में खास है। एकता नगर, जिसे पहले केवड़िया के नाम से जाना जाता था, Statue of Unity के लिए प्रसिद्ध है। यहीं 597 फीट ऊंची Statue of Unity स्थित है, जो सरदार वल्लभभाई पटेल को समर्पित है। National Film Awards जैसे राष्ट्रीय स्तर के समारोह को इस तरह के प्रमुख पर्यटन और राष्ट्रीय प्रतीक वाले स्थल पर आयोजित करने से कार्यक्रम को एक अलग पहचान मिलती है। एक और दिलचस्प संयोग यह है कि इस साल ‘Statue of Unity – Ekta ka Prateek’ नाम की फिल्म को भी National Film Awards में सम्मान मिला है। ऐसे में समारोह का उसी स्थान पर होना आयोजन को और प्रतीकात्मक बना रहा है।
क्या National Film Awards हमेशा दिल्ली में ही हुए हैं?
पूरी तरह ऐसा कहना सही नहीं होगा कि यह समारोह इतिहास में कभी दिल्ली से बाहर नहीं गया। लेकिन पिछले कई दशकों में दिल्ली इसका प्रमुख और लगभग स्थायी आयोजन स्थल रहा है और Vigyan Bhawan इसके लिए जाना जाता रहा है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक समारोह का दिल्ली से बाहर जाना बेहद दुर्लभ रहा है। अब 72वें संस्करण को गुजरात में आयोजित करने का फैसला इस लंबे पैटर्न में बड़ा बदलाव है।
फिर सवाल उठ क्यों रहे हैं?
सरकार के फैसले के बाद फिल्म निर्देशक राहुल ढोलकिया ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया कि अगर National Film Awards को दिल्ली से बाहर ले जाने का फैसला किया गया है, तो गुजरात को ही क्यों चुना गया? उन्होंने तर्क दिया कि यदि किसी दूसरे राज्य को यह सम्मान देना था, तो महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु या हैदराबाद जैसे भारतीय सिनेमा के बड़े केंद्रों पर भी विचार किया जा सकता था। यह सवाल इसलिए भी चर्चा में आया क्योंकि मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद और केरल का भारतीय सिनेमा के विकास में लंबा इतिहास रहा है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि राहुल ढोलकिया की आपत्ति उनका व्यक्तिगत/सार्वजनिक सवाल है, सरकार का आधिकारिक आरोप या जवाब नहीं।
'हर बड़ा आयोजन गुजरात में ही क्यों?' वाली बहस क्यों शुरू हुई?
National Film Awards के गुजरात जाने के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक चर्चाओं में एक broader सवाल भी उठ रहा है—क्या केंद्र सरकार के बड़े national-level events के लिए गुजरात को लगातार प्रमुखता मिल रही है? इस बहस को तथ्य और राय के बीच अलग-अलग देखना जरूरी है। किसी आयोजन का गुजरात में होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि उसे राजनीतिक कारण से वहां ले जाया गया है। National Film Awards के मामले में उपलब्ध official explanation फिलहाल यही है कि सरकार अब इस आयोजन को अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों तक ले जाना चाहती है। इसलिए यह कहना कि “सभी बड़े कार्यक्रम गुजरात में इसलिए हो रहे हैं क्योंकि सरकार की कोई राजनीतिक मंशा है” उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के आधार पर तथ्य के रूप में लिखना सही नहीं होगा।
क्या आगे भी National Film Awards अलग-अलग राज्यों में होंगे?
मंत्रालय की घोषणा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यही है कि National Film Awards को अब विभिन्न हिस्सों में आयोजित करने की नीति अपनाई गई है। इसका मतलब यह है कि गुजरात में 2026 का आयोजन केवल एक isolated venue change न होकर भविष्य में awards को देश के अलग-अलग हिस्सों तक ले जाने की व्यापक योजना का हिस्सा हो सकता है। हालांकि, आगे किस राज्य या शहर में समारोह होगा, इसकी आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है।
92 विजेताओं को मिलेगा सम्मान
72वें National Film Awards में कुल 92 विजेताओं को सम्मानित किया जाना है। इस बार ‘Article 370’ को Best Feature Film चुना गया है। Yami Gautam को इसी फिल्म के लिए Best Actress का पुरस्कार मिलेगा। Best Actor का पुरस्कार Mammootty को ‘Bramayugam’ और Kartik Aaryan को ‘Chandu Champion’ के लिए दिया जाएगा। वहीं Randeep Hooda को ‘Swatantrya Veer Savarkar’ के लिए Best Debut Director का सम्मान मिलेगा।
समारोह के गुजरात पहुंचने का बड़ा संदेश क्या है?
इस पूरे बदलाव को दो अलग-अलग नजरिए से देखा जा सकता है।
सरकार का नजरिया: National Film Awards को Delhi-centric व्यवस्था से बाहर निकालकर देश के अलग-अलग हिस्सों में ले जाना और भारत की भाषाई एवं सांस्कृतिक विविधता को सामने लाना।
आलोचकों का सवाल: अगर मकसद भारतीय सिनेमा के अलग-अलग केंद्रों को सम्मान देना है, तो गुजरात के एकता नगर को चुनने का विशेष आधार क्या है?
अभी तक सरकार ने गुजरात को चुनने के लिए कोई अलग, विस्तृत कारण सार्वजनिक नहीं किया है। इसलिए इस मुद्दे पर आगे की आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना होगा।
National Film Awards का दिल्ली से गुजरात जाना निश्चित तौर पर ऐतिहासिक बदलाव है। सरकार इसे देश के अलग-अलग हिस्सों में राष्ट्रीय आयोजनों को ले जाने की नई नीति और ‘Ek Bharat, Shreshtha Bharat’ की भावना से जोड़ रही है। वहीं, फिल्म जगत में यह सवाल उठ रहा है कि अगर आयोजन को दिल्ली से बाहर ले जाना ही था, तो सिनेमा के ऐतिहासिक केंद्रों की जगह एकता नगर, गुजरात को क्यों चुना गया। फिलहाल उपलब्ध तथ्यों के आधार पर इतना स्पष्ट है कि गुजरात में आयोजन की आधिकारिक वजह “National Film Awards को National Capital से बाहर विभिन्न हिस्सों में ले जाना” है। गुजरात को चुनने की कोई अलग राजनीतिक वजह सरकार ने घोषित नहीं की है।
