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₹5 करोड़ जमा करने की शर्त पर राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट से राहत, चेक बाउंस मामलों में सरेंडर से मिली अंतरिम छूट

राजपाल यादव को चेक बाउंस मामलों में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने उन्हें फिलहाल सरेंडर करने से छूट दे दी है, लेकिन यह राहत ₹5 करोड़ जमा करने की शर्त पर मिली है। सात चेक बाउंस मामलों में अभिनेता को मिली सजा के खिलाफ दाखिल याचिका पर अब 15 सितंबर को सुनवाई होगी।

Sonali08 सित. 2026, 07:43 PM IST
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₹5 करोड़ जमा करने की शर्त पर राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट से राहत, चेक बाउंस मामलों में सरेंडर से मिली अंतरिम छूट

बॉलीवुड अभिनेता राजपाल नौरंग यादव को चेक बाउंस से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उन्हें फिलहाल सरेंडर करने से अंतरिम छूट दे दी, लेकिन इसके लिए ₹5 करोड़ कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा करने की शर्त रखी है। रकम बुधवार तक जमा करनी होगी। यह आदेश भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने पारित किया। राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा राजपाल यादव की ओर से दायर याचिकाओं का मौखिक उल्लेख एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड सौरभ त्रिवेदी ने किया था। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई 15 सितंबर 2026 के लिए तय की है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया?

बेंच ने स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता बुधवार तक सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में ₹5 करोड़ जमा करते हैं, तो उन्हें सरेंडर करने से छूट दी जाएगी। यानी यह राहत बिना शर्त नहीं है और ₹5 करोड़ जमा करना इसका आधार है। मामला अभिनेता और उनकी पत्नी की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट के 10 जुलाई 2026 के आदेश को चुनौती देने से जुड़ा है। हाईकोर्ट ने राजपाल यादव की सात चेक बाउंस मामलों में दोषसिद्धि बरकरार रखते हुए प्रत्येक मामले में तीन महीने की साधारण कैद की सजा को कायम रखा था। हालांकि सभी सजाएं एक साथ चलाने का निर्देश दिया गया था।

हर मामले में ₹1.05 करोड़ देने का आदेश

दिल्ली हाईकोर्ट ने राजपाल यादव को सातों मामलों में प्रत्येक शिकायतकर्ता को ₹1.05 करोड़ देने का भी निर्देश दिया था। इसमें प्रत्येक मामले में ₹1,04,75,000 शिकायतकर्ता को मुआवजे के रूप में और ₹25,000 राज्य को देने थे। वहीं उनकी पत्नी राधा यादव को प्रत्येक सात मामलों में ₹5,51,380 का भुगतान करने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने यह भी ध्यान में रखा कि कार्यवाही के दौरान ₹2.25 करोड़ पहले ही शिकायतकर्ता को दिए जा चुके थे और इस राशि को बाकी जुर्माने एवं मुआवजे की गणना में समायोजित किया जाना था।

कैसे शुरू हुआ था पूरा मामला?

मामला M/s Murli Projects Pvt. Ltd. और राजपाल यादव से जुड़ा है। विवाद अभिनेता की प्रोडक्शन कंपनी से संबंधित भुगतान और चेकों के कथित अनादरण से पैदा हुआ। रिकॉर्ड के अनुसार, लेनदेन फिल्म 'आता पता लापता' के निर्माण से जुड़े वित्तीय समझौते से भी संबंधित था। दिल्ली हाईकोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक, शिकायतकर्ता कंपनी ने पहले अभिनेता पक्ष को ₹5 करोड़ का इंटर-कॉरपोरेट लोन दिया था। बाद में रकम लौटाने के लिए कई समझौते और पोस्ट-डेटेड चेक जारी किए गए। भुगतान नहीं होने के बाद Negotiable Instruments Act की धारा 138 के तहत चेक बाउंस की शिकायतें दर्ज हुईं।

अब आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल राजपाल यादव को सरेंडर से राहत दी है, लेकिन अंतिम राहत अभी तय नहीं हुई है। ₹5 करोड़ जमा करने के बाद मामला 15 सितंबर को फिर सुप्रीम कोर्ट के सामने आएगा। अभिनेता की याचिका में दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें सातों मामलों में उनकी दोषसिद्धि और सजा को बरकरार रखा गया था।