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विधवा की फैमिली पेंशन पति की मौत की तारीख से मिलेगी, CAT जाने की तारीख से नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने विधवाओं की फैमिली पेंशन को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा कि पति की सेवा के दौरान मौत होने पर पत्नी का फैमिली पेंशन का अधिकार उसी दिन से बनता है, न कि उस तारीख से जब वह CAT या अदालत पहुंची। अगर पेंशन का दावा करने में देरी महिला की गलती नहीं है, तो उसे पति की मृत्यु की तारीख से ही बकाया पेंशन का लाभ देना होगा।

Sonali09 सित. 2026, 06:38 PM IST
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विधवा की फैमिली पेंशन पति की मौत की तारीख से मिलेगी, CAT जाने की तारीख से नहीं: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली: 

सुप्रीम कोर्ट ने विधवा की फैमिली पेंशन को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु होने पर उसकी पत्नी का फैमिली पेंशन का अधिकार पति की मृत्यु की तारीख से ही पैदा होता है। केवल इस आधार पर पेंशन का लाभ उस तारीख से नहीं दिया जा सकता, जिस दिन विधवा ने पहली बार केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) का दरवाजा खटखटाया था। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की पीठ ने यह फैसला रेलवे कर्मचारी की विधवा की अपील पर सुनाया। कर्मचारी की वर्ष 2000 में सेवा के दौरान मृत्यु हो गई थी। इसके बाद उनकी पत्नी ने फैमिली पेंशन के लिए दावा किया, लेकिन बॉम्बे हाईकोर्ट ने पेंशन का लाभ वर्ष 2014 से देने का निर्देश दिया था, क्योंकि इसी वर्ष उन्होंने CAT का रुख किया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस दृष्टिकोण को स्वीकार नहीं किया और कहा कि यदि लाभ पाने में हुई देरी विधवा की किसी गलती या लापरवाही के कारण नहीं हुई है, तो उसे उसके वैधानिक हक से वंचित नहीं किया जा सकता।

2000 से बनता था पेंशन का अधिकार

मामले में रेलवे कर्मचारी की मृत्यु वर्ष 2000 में सेवा के दौरान हुई थी। उनकी विधवा का दावा था कि फैमिली पेंशन का अधिकार उसी समय उत्पन्न हो गया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने उन्हें वर्ष 2014 से पेंशन देने का आदेश दिया था, यानी उस समय से जब उन्होंने CAT में आवेदन किया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि CAT में आवेदन करने की तारीख को पेंशन के अधिकार की शुरुआत नहीं माना जा सकता। पेंशन का अधिकार कर्मचारी की मृत्यु के साथ उत्पन्न हुआ था।

देरी का दोष महिला पर नहीं तो लाभ रोका नहीं जा सकता

पीठ ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि किसी व्यक्ति को केवल इसलिए उसके वैधानिक लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता क्योंकि उसने अदालत या न्यायाधिकरण का दरवाजा देर से खटखटाया, खासकर तब जब देरी उसकी अपनी गलती से नहीं हुई हो। अदालत ने माना कि फैमिली पेंशन कोई ऐसा लाभ नहीं है जो केवल मुकदमा दायर करने की तारीख से पैदा होता है। यह कर्मचारी की मृत्यु के बाद पात्र परिवार के सदस्य को मिलने वाला वैधानिक लाभ है।

सुप्रीम कोर्ट ने 2014 के 'Tarsem Singh' फैसले पर भी टिप्पणी की

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपने वर्ष 2014 के 'Tarsem Singh' फैसले पर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। पीठ ने कहा कि उस फैसले में एक पुराने और पहले दिए गए न्यायिक दृष्टांत को ध्यान में नहीं रखा गया था। अदालत ने इस कारण वर्तमान मामले में पेंशन संबंधी अधिकार को केवल उस तारीख से सीमित करने के दृष्टिकोण को स्वीकार नहीं किया, जिस दिन विधवा ने CAT का रुख किया था।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का क्या असर होगा?

इस फैसले का महत्व उन मामलों में खास तौर पर है जहां सरकारी कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु के बाद उसकी विधवा या पात्र परिवार के सदस्य को फैमिली पेंशन मिलने में प्रशासनिक कारणों से देरी हुई हो। फैसले का मूल सिद्धांत यह है कि पात्रता पैदा होने की तारीख और न्यायिक उपचार लेने की तारीख को एक नहीं माना जा सकता। यदि पेंशन का दावा पहले से वैधानिक रूप से बन चुका है और लाभ पाने में देरी लाभार्थी की गलती के कारण नहीं हुई, तो केवल मुकदमे या CAT आवेदन की तारीख के आधार पर पेंशन को पीछे की अवधि से काटना उचित नहीं होगा। यह फैसला जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की पीठ ने 8 सितंबर 2026 को सुनाया।