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‘चोरों के सरदार’ टिप्पणी पर राहुल गांधी को झटका, बॉम्बे HC ने मानहानि केस रद्द करने से किया इनकार

‘चोरों के सरदार’ और ‘Commander-in-Thief’ टिप्पणी को लेकर राहुल गांधी को बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने उनके खिलाफ चल रहे आपराधिक मानहानि केस को रद्द करने से इनकार कर दिया। जस्टिस नितिन बोरकर ने कहा कि BJP एक पंजीकृत राष्ट्रीय राजनीतिक दल होने के कारण पहचान योग्य संस्था है और कथित टिप्पणी का पार्टी के सदस्यों पर क्या असर पड़ा, यह ट्रायल के दौरान तय किया जाएगा।

Sonali09 सित. 2026, 06:38 PM IST
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‘चोरों के सरदार’ टिप्पणी पर राहुल गांधी को झटका, बॉम्बे HC ने मानहानि केस रद्द करने से किया इनकार

मुंबई:

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर ‘चोरों के सरदार’ और ‘Commander-in-Thief’ जैसी टिप्पणी से जुड़े आपराधिक मानहानि मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को बॉम्बे हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। जस्टिस नितिन बोरकर की एकल पीठ ने राहुल गांधी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा जारी समन और उनके खिलाफ चल रही आपराधिक मानहानि की कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी।

अदालत ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) एक पंजीकृत राष्ट्रीय राजनीतिक दल है और इसलिए उसे एक निश्चित एवं पहचान योग्य संस्था माना जा सकता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस स्तर पर यह नहीं माना जा सकता कि राहुल गांधी की कथित टिप्पणी केवल BJP के वरिष्ठ नेतृत्व तक सीमित थी। टिप्पणी का वास्तविक अर्थ और उसका पार्टी के सदस्यों की प्रतिष्ठा पर क्या प्रभाव पड़ा, इसका फैसला ट्रायल के दौरान किया जाएगा।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला BJP कार्यकर्ता महेश श्रीश्रीमल की शिकायत से जुड़ा है। उन्होंने मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के समक्ष राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि की शिकायत दाखिल की थी। शिकायतकर्ता का आरोप था कि राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘चोरों के सरदार’ और ‘Commander-in-Thief’ कहकर संबोधित किया। शिकायतकर्ता के अनुसार, नरेंद्र मोदी BJP के सदस्य हैं और प्रधानमंत्री के खिलाफ की गई कथित टिप्पणी का असर BJP तथा उसके सदस्यों की प्रतिष्ठा पर भी पड़ा। उनका दावा था कि टिप्पणी के जरिए पार्टी के सदस्यों को भी ‘चोर’ के रूप में पेश किया गया, इसलिए एक BJP कार्यकर्ता के तौर पर उन्हें मानहानि की शिकायत दाखिल करने का अधिकार है।

राहुल गांधी ने क्या दलील दी?

मजिस्ट्रेट द्वारा समन जारी किए जाने के बाद राहुल गांधी ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुदीप पसबोला ने दलील दी कि कथित बयान में BJP या किसी राजनीतिक दल का नाम नहीं लिया गया था। इसलिए किसी निश्चित या पहचान योग्य वर्ग को निशाना बनाए जाने का सवाल नहीं उठता। उन्होंने कहा कि केवल किसी बयान की ऐसी व्याख्या कर लेना कि वह पार्टी कार्यकर्ताओं पर भी लागू होता है, आपराधिक मानहानि की कार्यवाही शुरू करने के लिए पर्याप्त नहीं है। उनके मुताबिक शिकायतकर्ता के पास इस मामले में आवश्यक locus standi भी नहीं था।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

महाराष्ट्र के एडवोकेट जनरल डॉ. मिलिंद साठे ने राहुल गांधी की याचिका का विरोध किया। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने राहुल गांधी की दलील स्वीकार नहीं की। जस्टिस नितिन बोरकर ने कहा कि BJP एक पंजीकृत राष्ट्रीय राजनीतिक दल होने के कारण निश्चित और पहचान योग्य संस्था है। अदालत ने माना कि कथित टिप्पणी को प्रथम दृष्टया केवल पार्टी के वरिष्ठ नेताओं तक सीमित नहीं माना जा सकता। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि टिप्पणी का वास्तविक आशय क्या था और उसका BJP के सदस्यों पर क्या प्रभाव पड़ा, इन सवालों का अंतिम फैसला ट्रायल के दौरान होगा।

शशि थरूर मामले का भी हवाला

हाईकोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के शशि थरूर से जुड़े एक मामले में दिए गए फैसले का भी हवाला दिया। उस मामले में माना गया था कि पंजीकरण के आधार पर राजनीतिक पार्टी एक पहचान योग्य और निश्चित संस्था हो सकती है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने इसी सिद्धांत को वर्तमान मामले में लागू किया और कहा कि मजिस्ट्रेट के आदेश में ऐसी कोई अवैधता नहीं है, जिसके आधार पर उसे रद्द किया जाए। इस मामले पर सुनवाई के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने फरवरी 2026 में फैसला सुरक्षित रखा था। अब 8 सितंबर 2026 को अदालत ने राहुल गांधी को राहत देने से इनकार कर दिया है। इसका मतलब है कि उनके खिलाफ आपराधिक मानहानि की कार्यवाही आगे जारी रह सकती है।