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कमियां दूर होने के बाद फूड लाइसेंस का निलंबन खत्म करना होगा, कारोबारियों को मुकदमेबाजी के लिए मजबूर नहीं कर सकते: बॉम्बे HC

फूड लाइसेंस सस्पेंड करने के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र FDA को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने साफ कहा कि जब कोई खाद्य प्रतिष्ठान बताई गई कमियों को दूर कर देता है और अनुपालन की ऑटो-जेनरेटेड रिपोर्ट भी सामने आ जाती है, तो लाइसेंस का निलंबन जारी नहीं रखा जा सकता। कारोबारियों को लाइसेंस बहाली के लिए बेवजह मुकदमेबाजी में धकेलना उचित नहीं है।

Sonali09 सित. 2026, 06:38 PM IST
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कमियां दूर होने के बाद फूड लाइसेंस का निलंबन खत्म करना होगा, कारोबारियों को मुकदमेबाजी के लिए मजबूर नहीं कर सकते: बॉम्बे HC

मुंबई:

 फूड बिजनेस लाइसेंस के निलंबन को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) को महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि यदि किसी खाद्य प्रतिष्ठान का लाइसेंस कमियों के कारण निलंबित किया गया है और प्रतिष्ठान उन कमियों को दूर कर देता है, तो केवल उसे मुकदमेबाजी में उलझाए रखना उचित नहीं है। अनुपालन की पुष्टि होने के बाद लाइसेंस का निलंबन समाप्त किया जाना चाहिए। एक्टिंग चीफ जस्टिस रविंद्र घुगे और जस्टिस गौतम अंखड़ की पीठ ने महाराष्ट्र FDA के काम करने के तरीके पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में प्राधिकरण को अपनी कार्रवाई को सुधारों और अनुपालन के उद्देश्य तक सीमित रखना चाहिए, न कि प्रतिष्ठानों को अनावश्यक रूप से अदालतों का चक्कर लगाने के लिए मजबूर करना चाहिए।

क्या है पूरा मामला?

मामला एक खाद्य प्रतिष्ठान के फूड बिजनेस लाइसेंस के निलंबन से जुड़ा था। FDA की ओर से निरीक्षण के दौरान कुछ कमियां पाए जाने के बाद प्रतिष्ठान का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया था। प्रतिष्ठान ने बाद में FDA की ओर से बताई गई कमियों को दूर करने के लिए जरूरी कदम उठाए। इसके बाद सिस्टम से तैयार हुई ऑटो-जेनरेटेड रिपोर्ट में यह सामने आया कि प्रतिष्ठान ने आवश्यक अनुपालन कर लिया है। इसके बावजूद लाइसेंस का निलंबन समाप्त नहीं किया गया, जिसके बाद संबंधित प्रतिष्ठान को राहत के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

हाईकोर्ट ने FDA के रवैये पर जताई नाराजगी

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र FDA के मामलों को संभालने के तरीके में एक पैटर्न पर गौर किया। कोर्ट ने कहा कि यदि किसी प्रतिष्ठान को लाइसेंस निलंबन के बाद कमियां दूर करने का अवसर दिया गया है और वह निर्धारित मानकों का पालन कर लेता है, तो प्राधिकरण को उसके लाइसेंस निलंबन को जारी रखने का कोई औचित्य नहीं होना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक कार्रवाई का उद्देश्य खाद्य सुरक्षा मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करना है। यदि प्रतिष्ठान आवश्यक कमियां दूर कर चुका है, तो उसे आगे भी निलंबन झेलने या अपनी राहत के लिए मुकदमा करने को मजबूर करना उचित नहीं है।

ऑटो-जेनरेटेड रिपोर्ट में अनुपालन तो सस्पेंशन क्यों?

हाईकोर्ट ने विशेष रूप से उस स्थिति पर ध्यान दिया जिसमें सिस्टम द्वारा तैयार रिपोर्ट में प्रतिष्ठान के अनुपालन की पुष्टि हो चुकी थी। अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति में FDA को अपने रिकॉर्ड और प्रक्रिया के अनुसार निलंबन हटाने की कार्रवाई करनी चाहिए। कोर्ट ने यह संदेश दिया कि तकनीकी या प्रशासनिक कारणों से किसी ऐसे कारोबारी प्रतिष्ठान का लाइसेंस अनिश्चित अवधि तक निलंबित नहीं रखा जा सकता जिसने पहले बताई गई कमियों को सुधार लिया है।

कारोबारियों को कोर्ट जाने के लिए मजबूर नहीं कर सकते

हाईकोर्ट ने कहा कि प्रशासनिक प्राधिकरणों की जिम्मेदारी है कि वे कानून के अनुसार उचित समय में निर्णय लें। किसी कारोबारी को केवल लाइसेंस बहाली के लिए बार-बार अदालत का दरवाजा खटखटाने की स्थिति में डालना उचित प्रशासनिक व्यवस्था नहीं है। फूड लाइसेंस का निलंबन खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियामक उपाय है। लेकिन जब उल्लंघन या कमियां दूर हो जाती हैं और अनुपालन की पुष्टि हो जाती है, तो निलंबन को जारी रखना कार्रवाई के उद्देश्य से परे जा सकता है।

हाईकोर्ट का स्पष्ट संदेश

बॉम्बे हाईकोर्ट के इस आदेश से महाराष्ट्र FDA के लिए यह स्पष्ट संदेश गया है कि लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई को दंडात्मक या अनिश्चितकालीन प्रक्रिया में नहीं बदला जा सकता। प्रतिष्ठान द्वारा कमियां दूर किए जाने और अनुपालन की पुष्टि होने के बाद प्राधिकरण को लाइसेंस निलंबन समाप्त करने पर कार्रवाई करनी होगी। पीठ में एक्टिंग चीफ जस्टिस रविंद्र घुगे और जस्टिस गौतम अंखड़ शामिल थे। मामला 7 सितंबर 2026 को सामने आया।