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दो शादी करना CRPF जवान को पड़ा भारी, इलाहाबाद HC ने बर्खास्तगी को ठहराया सही

CRPF में तैनात एक कांस्टेबल को दूसरी शादी करना भारी पड़ गया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उसकी बर्खास्तगी को बरकरार रखते हुए साफ किया कि CRPF Act की धारा 11 के शीर्षक में ‘Minor Punishments’ लिखा होने का मतलब यह नहीं है कि गंभीर कदाचार के मामले में बर्खास्तगी नहीं की जा सकती। कोर्ट ने कहा कि सेवा में अनुशासन और निर्धारित नियमों का पालन सर्वोपरि है।

Sonali09 सित. 2026, 06:38 PM IST
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दो शादी करना CRPF जवान को पड़ा भारी, इलाहाबाद HC ने बर्खास्तगी को ठहराया सही

प्रयागराज:

 इलाहाबाद हाईकोर्ट ने CRPF के एक कांस्टेबल की सेवा से बर्खास्तगी को बरकरार रखते हुए कहा है कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में रहते हुए दूसरी शादी करना गंभीर कदाचार है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि Central Reserve Police Force Act, 1949 की धारा 11 के तहत बर्खास्तगी की सजा दी जा सकती है, भले ही इस धारा का शीर्षक ‘Minor Punishments’ हो। हाईकोर्ट ने कहा कि धारा 11(1) के क्लॉज (a) से (e) में दिए गए दंड ही एकमात्र उपलब्ध दंड नहीं हैं। इन दंडों को निलंबन या बर्खास्तगी के अतिरिक्त या उसके स्थान पर लगाया जा सकता है। इसलिए केवल धारा 11 के शीर्षक के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि CRPF कर्मी को बर्खास्त नहीं किया जा सकता।

क्या है मामला?

मामला CRPF में कांस्टेबल के पद पर कार्यरत एक कर्मचारी के खिलाफ की गई विभागीय कार्रवाई से जुड़ा था। कर्मचारी पर दूसरी शादी यानी बिगैमी का आरोप था। विभागीय जांच के बाद उसके खिलाफ कार्रवाई की गई और अंततः उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। कर्मचारी ने अपनी बर्खास्तगी को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उसकी ओर से मुख्य तौर पर यह तर्क दिया गया कि CRPF Act की धारा 11 ‘Minor Punishments’ से संबंधित है और इसके तहत बर्खास्तगी जैसी कठोर सजा नहीं दी जा सकती।

हाईकोर्ट ने दलील क्यों खारिज की?

अदालत ने धारा 11 की व्याख्या करते हुए कहा कि इस प्रावधान को केवल उसके शीर्षक के आधार पर नहीं पढ़ा जा सकता। धारा 11(1) में विभिन्न दंडों का उल्लेख है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि CRPF कर्मी को केवल उन्हीं दंडों तक सीमित रखा जा सकता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धारा 11(1) के क्लॉज (a) से (e) में दिए गए दंड निलंबन या बर्खास्तगी के अतिरिक्त अथवा उसके स्थान पर दिए जा सकते हैं। इसलिए सक्षम प्राधिकारी द्वारा उचित विभागीय प्रक्रिया के बाद बर्खास्तगी की कार्रवाई को केवल इस आधार पर अवैध नहीं माना जा सकता कि धारा 11 के ऊपर ‘Minor Punishments’ लिखा है।

दूसरी शादी को लेकर कोर्ट का सख्त रुख

मामले में बिगैमी का आरोप महत्वपूर्ण था। कोर्ट ने CRPF जैसे अनुशासित बल में सेवा करने वाले कर्मचारियों के आचरण के महत्व को ध्यान में रखा। ऐसे बलों में कर्मचारियों से उच्च स्तर की अनुशासनात्मक मर्यादा और सेवा नियमों का पालन अपेक्षित होता है। अदालत ने कर्मचारी की उस चुनौती को स्वीकार नहीं किया जिसमें बर्खास्तगी की सजा को CRPF Act की धारा 11 के तहत अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया गया था।

कोर्ट ने क्या फैसला दिया?

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कर्मचारी की याचिका में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए सेवा से बर्खास्तगी की कार्रवाई को बरकरार रखा। कोर्ट ने माना कि धारा 11 की सही व्याख्या करने पर यह स्पष्ट है कि उसमें उल्लिखित ‘Minor Punishments’ का मतलब यह नहीं है कि गंभीर कदाचार के मामले में बर्खास्तगी की सजा देने की शक्ति समाप्त हो जाती है। इस फैसले में हाईकोर्ट ने CRPF में अनुशासन और सेवा नियमों के पालन को महत्वपूर्ण माना है। साथ ही अदालत ने यह स्पष्ट किया कि किसी कानूनी प्रावधान की व्याख्या केवल उसके शीर्षक के आधार पर नहीं की जा सकती। यह फैसला 8 सितंबर 2026 को इलाहाबाद हाईकोर्ट में जस्टिस के समक्ष आया।