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आसाराम को गुजरात हाईकोर्ट से बड़ा झटका, 20 दिन की अस्थायी जमानत की याचिका खारिज

आसाराम को गुजरात हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। 20 दिन की अस्थायी जमानत की मांग कोर्ट ने खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि स्वास्थ्य बिगड़ने पर सुप्रीम कोर्ट पहले ही दोबारा राहत मांगने की छूट दे चुका है।

Sonali09 सित. 2026, 06:38 PM IST
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आसाराम को गुजरात हाईकोर्ट से बड़ा झटका, 20 दिन की अस्थायी जमानत की याचिका खारिज

अहमदाबाद: 

रेप मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम को गुजरात हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। कोर्ट ने 8 सितंबर 2026 को 20 दिन की अस्थायी जमानत मांगने वाली उसकी याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही यह स्वतंत्रता दे चुका है कि स्वास्थ्य की स्थिति बिगड़ने पर आसाराम दोबारा उसके सामने राहत के लिए आवेदन कर सकता है।

जस्टिस गीता गोपी और एलएस पीरजादा की बेंच ने सुनाया फैसला

यह मामला Ashumal @ Asharam v. State of Gujarat से जुड़ा है। जस्टिस गीता गोपी और जस्टिस एलएस पीरजादा की डिवीजन बेंच आसाराम की अस्थायी जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। आसाराम गुजरात के 2013 के रेप केस में दोषी ठहराए जाने के बाद उम्रकैद की सजा काट रहा है और उसकी आपराधिक अपील गुजरात हाईकोर्ट में लंबित है।

क्यों मांगी थी 20 दिन की जमानत?

आसाराम की ओर से दलील दी गई कि राजस्थान हाईकोर्ट ने 3 अगस्त 2026 को एक अलग रेप केस में उसे 20 दिन की पैरोल दी थी। इसी आधार पर गुजरात मामले में भी 20 दिन की अस्थायी जमानत मांगी गई। उसके वकील का कहना था कि अगर गुजरात से रिहाई नहीं मिली तो राजस्थान हाईकोर्ट की पैरोल का आदेश व्यावहारिक रूप से बेअसर हो जाएगा। हालांकि गुजरात सरकार ने याचिका का विरोध किया। सरकार की ओर से कहा गया कि पैरोल कोई ऐसा अधिकार नहीं है जिसे हर मामले में स्वतः हासिल किया जा सके। साथ ही आसाराम से जुड़े अन्य मामलों और सुरक्षा संबंधी चिंताओं का भी हवाला दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेश को HC ने बनाया आधार

गुजरात हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के 6 अगस्त 2026 के आदेश पर विशेष रूप से गौर किया। सुप्रीम कोर्ट ने AIIMS जोधपुर की मेडिकल रिपोर्ट पर विचार करते हुए आसाराम को मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत देने से इनकार किया था, लेकिन जेल में उसकी 24 घंटे देखभाल के लिए प्रशिक्षित केयरगिवर रखने की अनुमति दी थी। साथ ही स्वास्थ्य बिगड़ने पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की स्वतंत्रता दी थी। इसी वजह से गुजरात हाईकोर्ट ने कहा कि इस समय अस्थायी जमानत की अर्जी पर विचार करने का कोई आधार नहीं है। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य की स्थिति बिगड़ने पर आसाराम सुप्रीम कोर्ट की ओर से दी गई स्वतंत्रता का इस्तेमाल कर सकता है।

2013 के रेप केस में मिली है उम्रकैद

गांधीनगर की सेशन कोर्ट ने जनवरी 2023 में आसाराम को 2013 में दर्ज रेप मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। मामला एक महिला शिष्या से जुड़ा था, जिसने आरोप लगाया था कि 2001 से 2006 के बीच गांधीनगर के मोटेरा स्थित आश्रम में उसके साथ बलात्कार किया गया। आसाराम राजस्थान के एक अलग रेप मामले में भी उम्रकैद की सजा काट रहा है।