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CJP प्रदर्शन में शामिल छात्र को नोटिस पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी से मांगेगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद CJP प्रदर्शन में शामिल छात्र को नोटिस जारी करने पर कोर्ट सख्त हो गया है। CJI सूर्यकांत ने कहा- आदेश की भाषा बिल्कुल साफ थी, छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। अब ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी से जवाब मांगा जाएगा।

नई दिल्ली:
CJP यानी Cockroach Janata Party के प्रदर्शन में शामिल होने वाले एक लॉ छात्र को नोटिस जारी किए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा कि वह ग्रेटर नोएडा के संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगेगा कि सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेश के बावजूद छात्र को नोटिस क्यों जारी किया गया। CJI सूर्यकांत ने कहा कि कोर्ट के आदेश में छात्रों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई न करने की बात बिल्कुल स्पष्ट थी।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के सेकेंड ईयर के एक लॉ छात्र से जुड़ा है, जिसने दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में हिस्सा लिया था। छात्र को कथित तौर पर प्रदर्शन में शामिल होने के संबंध में नोटिस जारी किया गया था। एक रिपोर्ट के मुताबिक, उससे 5 लाख रुपये का व्यक्तिगत बॉन्ड भरने को भी कहा गया था। हालांकि बाद में पुलिस ने बताया कि यह नोटिस 4 सितंबर को वापस ले लिया गया था। 9 सितंबर 2026 को मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने आया। CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने नोटिस जारी करने की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि कोर्ट अपने पुराने आदेश की अनदेखी को लेकर संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले क्या आदेश दिया था?
CJP की ओर से किए गए प्रदर्शनों के दौरान अलग-अलग राज्यों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थीं। 1 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और असम में दर्ज कई FIR को अपने विशेष अधिकार क्षेत्र यानी संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत रद्द कर दिया था। इसके बाद CJP ने 5 सितंबर को प्रस्तावित अपना मार्च भी रद्द कर दिया था। इसी आदेश के संदर्भ में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब अदालत ने आपराधिक कार्रवाई को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए थे, तो प्रदर्शन में शामिल छात्र को नोटिस किस आधार पर जारी किया गया।
CJI सूर्यकांत ने जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि कोर्ट के आदेश की भाषा बिल्कुल स्पष्ट थी और छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। अदालत अब ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी से यह स्पष्टीकरण मांगेगी कि उसके आदेश के बावजूद छात्र को नोटिस क्यों जारी किया गया। हालांकि, यह भी महत्वपूर्ण है कि संबंधित छात्र को जारी किया गया नोटिस बाद में वापस लिया जा चुका था। इसलिए फिलहाल सुप्रीम कोर्ट का रुख अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगने तक है; इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि कोर्ट ने किसी अधिकारी को दोषी ठहरा दिया है।
छात्रों के प्रदर्शन को लेकर पहले भी आया था सुप्रीम कोर्ट का फैसला
CJP से जुड़े छात्र विवाद में सुप्रीम कोर्ट पहले भी महत्वपूर्ण फैसला दे चुका है। 3 सितंबर 2026 को तीन जजों की पीठ ने स्पष्ट किया था कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया और स्टेट बार काउंसिल कानून के छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं कर सकते, क्योंकि वे अभी अधिवक्ता के रूप में नामांकित नहीं हुए हैं। अदालत ने कहा था कि छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का अधिकार उनके शैक्षणिक संस्थान या संबंधित नियमों के तहत सक्षम प्राधिकारी के पास है।
5 सितंबर के प्रदर्शन को लेकर भी हुई थी सुनवाई
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 31 अगस्त को CJP के 5 सितंबर के प्रस्तावित मार्च पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा था कि अदालत पहले से यह मानकर नहीं चल सकती कि प्रदर्शन से कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा होगी।
