लंदन में पढ़ाई, ड्रोन टेक्नोलॉजी में रुचि और फिर ‘PMO ID’ विवाद: आखिर कौन हैं रोहन पारेख?
मुंबई के BKC स्थित जियो वर्ल्ड प्लाजा में कथित तौर पर संदिग्ध/फर्जी PMO पहचान पत्र का इस्तेमाल कर प्रवेश करने के मामले में 24 वर्षीय रोहन प्रेमल पारेख पुलिस जांच के केंद्र में हैं। लंदन में पढ़ाई कर चुके और शेयर ब्रोकिंग से जुड़े रोहन का दावा उनके वकीलों के जरिए सामने आया है कि संभवतः उन्हें खुद किसी ने धोखा देकर PMO से जुड़े होने का विश्वास दिलाया। हालांकि, इस दावे की पुलिस जांच कर रही है और मामला अभी जांच के अधीन है।
मुंबई BKC के हाई-प्रोफाइल इलाके में मामला कैसे सामने आया?
मुंबई पुलिस के अनुसार, रोहन प्रेमल पारेख और उनके साथ मौजूद लोगों ने BKC के जियो वर्ल्ड प्लाजा में प्रवेश करने की कोशिश की। यह घटना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुंबई दौरे और ग्लोबल फिनटेक फेस्ट के आसपास हुई, जिसके कारण इलाके में सुरक्षा बेहद कड़ी थी। जांच एजेंसियों के मुताबिक, एक संदिग्ध PMO पहचान पत्र सामने आने के बाद सुरक्षा कर्मियों ने पुलिस को सतर्क किया।
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कौन हैं रोहन पारेख?
रिपोर्ट के मुताबिक, रोहन प्रेमल पारेख 24 वर्षीय युवक हैं, जिन्होंने लंदन में पढ़ाई की है और गणित एवं विज्ञान में स्नातक डिग्री हासिल की है। रिपोर्टों में उन्हें शेयर ब्रोकर बताया गया है और उनकी रुचि ड्रोन टेक्नोलॉजी में भी बताई गई है। अब यही पृष्ठभूमि पुलिस जांच का एक अहम पहलू बन गई है।
‘PMO अधिकारी’ होने का आरोप और संदिग्ध पहचान पत्र
पुलिस जांच का मुख्य सवाल यह है कि रोहन के पास प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़ा बताया जा रहा पहचान पत्र कैसे पहुंचा और उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया। रिपोर्टों के अनुसार, पहचान पत्र में उन्हें PMO का Grade-C अधिकारी बताया गया था और उसमें ड्रोन टेक्नोलॉजी से जुड़ाव का भी उल्लेख था। पुलिस अब दस्तावेज की उत्पत्ति और उससे जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही है।
साथ था बॉडीगार्ड, जिसके पास मिली लाइसेंसी रिवॉल्वर
पुलिस के मुताबिक, रोहन के साथ उनके निजी सुरक्षा गार्ड दिलीप राजाराम कुंडे भी मौजूद थे, जो सेना के पूर्व कर्मी बताए गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, उनके पास एक लाइसेंसी रिवॉल्वर और छह जिंदा कारतूस थे। इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए, जिसके बाद दोनों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
तीसरा व्यक्ति भी था साथ, पुलिस कर रही तलाश
जांच में एक तीसरे व्यक्ति, प्रथमेश गणेश बागुल, का नाम भी सामने आया है। पुलिस के अनुसार, वह रोहन के साथ मौके पर मौजूद था और बाद में फरार हो गया। जांच एजेंसियां CCTV फुटेज, वाहन और अन्य डिजिटल सबूतों के जरिए पूरे घटनाक्रम को जोड़ने की कोशिश कर रही हैं।
वकीलों का बड़ा दावा—‘रोहन खुद धोखाधड़ी का शिकार हो सकते हैं’
मामले में सबसे बड़ा मोड़ रोहन पारेख के बचाव पक्ष की दलील से आया है। उनके वकीलों ने अदालत में दावा किया कि रोहन को 2024 में एक व्यक्ति ने संपर्क किया था, जिसने खुद को सरकारी व्यवस्था से जुड़ा बताया और उन्हें PMO से संबंधित भूमिका की पेशकश की। बचाव पक्ष के अनुसार, रोहन को कथित ऑफर लेटर, पहचान पत्र और प्रधानमंत्री के नाम से जुड़ा एक पत्र भेजा गया था, जिससे उन्हें लगा कि उनका PMO से वास्तविक संबंध है।
पुलिस के सामने अब सबसे बड़ा सवाल—धोखा खाया या साजिश में शामिल था?
यही इस पूरे मामले की सबसे महत्वपूर्ण जांच है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या रोहन वास्तव में किसी संगठित धोखाधड़ी का शिकार हुए या फिर कथित PMO पहचान पत्र का इस्तेमाल जानबूझकर किया गया। पुलिस मोबाइल फोन, ईमेल, डिजिटल कम्युनिकेशन और CCTV फुटेज की जांच कर रही है। इसलिए बचाव पक्ष का दावा फिलहाल सिर्फ एक कानूनी दलील है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
क्या इस मामले का प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम से सीधा संबंध था?
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जो आरोपियों या इस घटना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम से सीधे जोड़ता हो। घटना PM के कार्यक्रम से ठीक पहले और उसी BKC क्षेत्र में हुई थी, इसलिए सुरक्षा एजेंसियों ने इसे गंभीरता से लिया, लेकिन इसे प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में किसी साजिश से जोड़ना अभी तथ्यों से परे होगा।
अदालत ने पुलिस हिरासत में भेजा
रिपोर्टों के मुताबिक, रोहन पारेख और उनके बॉडीगार्ड को पुलिस हिरासत में भेजा गया है और जांच आगे जारी है। मुंबई क्राइम ब्रांच अब कथित PMO ID के स्रोत, डिजिटल संदेशों और पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही है।
रोहन पारेख का मामला सिर्फ एक संदिग्ध पहचान पत्र का मामला नहीं रह गया है। लंदन में पढ़ाई करने वाला एक युवा शेयर ब्रोकर, ड्रोन टेक्नोलॉजी में रुचि, कथित PMO ID, हथियारबंद बॉडीगार्ड और फिर यह दावा कि वह खुद धोखाधड़ी का शिकार हुआ—इन सभी पहलुओं ने BKC मामले को बेहद पेचीदा बना दिया है। अब जांच से ही साफ होगा कि रोहन पारेख आरोपी हैं, किसी बड़े फर्जीवाड़े के शिकार हैं, या इस पूरे मामले के पीछे कोई और नेटवर्क काम कर रहा था।