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घरेलू हिंसा मामले में महिला को राहत, पति को पत्नी-बेटी को हर महीने ₹10 हजार देने का आदेश; घर से नहीं निकाल सकेंगे सास-ससुर

घरेलू हिंसा के आरोपों पर कल्याण कोर्ट ने पत्नी और उसकी 7 साल की बेटी के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने पति को दोनों को हर महीने कुल ₹10 हजार भरण-पोषण देने का आदेश दिया है। साथ ही, जिस घर में महिला अपनी बेटी के साथ रह रही है, वहां से उसे बेदखल नहीं करने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट ने पति को मुकदमे के खर्च के लिए ₹3 हजार भी देने को कहा है।

Sonali09 सित. 2026, 06:38 PM IST
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घरेलू हिंसा मामले में महिला को राहत, पति को पत्नी-बेटी को हर महीने ₹10 हजार देने का आदेश; घर से नहीं निकाल सकेंगे सास-ससुर

यह मामला P.W.D.V.A. No. 130/2023 से जुड़ा है, जिसमें 33 वर्षीय महिला और उसकी 7 साल की बेटी ने घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। महिला की शादी 4 मार्च 2004 को ठाणे में अमोल सिताराम कदम से हुई थी। उनकी बेटी का जन्म 2 अक्टूबर 2016 को हुआ। महिला ने पति, सास, देवर और अन्य रिश्तेदारों पर घरेलू हिंसा, मारपीट, गाली-गलौज और दहेज की मांग जैसे आरोप लगाए। महिला के मुताबिक शादी के बाद से ही पति छोटी-छोटी बातों पर उसके साथ मारपीट और दुर्व्यवहार करता था। उसने आरोप लगाया कि गर्भावस्था के दौरान भी उसे प्रताड़ित किया गया। महिला ने यह भी बताया कि उसके पहले बच्चे की 8 फरवरी 2015 को मौत हो गई थी और डिलीवरी का खर्च उसके पिता ने उठाया था। महिला ने दहेज की मांग को लेकर 19 अगस्त 2015 को पुलिस में एन.सी. दर्ज कराने की बात भी कोर्ट के सामने रखी।

बेटी को लेकर भी विवाद

महिला के अनुसार, 2016 में दोबारा गर्भवती होने के बाद भी उसके साथ कथित तौर पर प्रताड़ना जारी रही। बाद में उसकी बेटी का जन्म 2 अक्टूबर 2016 को हुआ। महिला ने आरोप लगाया कि 29 जून 2023 को उसकी सास ने उसकी बेटी को अपने पास रोक लिया था। इसके बाद उसने 30 जून 2023 को मनपाड़ा पुलिस स्टेशन में एन.सी. दर्ज कराई। महिला ने कोर्ट को बताया कि वह 24 जनवरी 2023 से अपनी बेटी के साथ डोंबिवली ईस्ट स्थित फ्लैट में अलग रह रही है। उसका आरोप था कि पति उस घर पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा था।

पति की आय ₹45 हजार, पत्नी खुद कमाती है ₹19 हजार

महिला ने कोर्ट में बताया कि उसका पति भिवंडी स्थित सुधर्शन मोटर्स में सर्विस एडवाइजर के तौर पर काम करता है और करीब ₹45 हजार प्रति माह कमाता है। वहीं, वह खुद भिवंडी की एक कंपनी में काम करके करीब ₹19 हजार प्रति माह कमाती है और अपनी बेटी का खर्च भी उठा रही है। इसी आधार पर महिला ने घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत संरक्षण आदेश, आवास संबंधी राहत, किराया भत्ता और ₹15 हजार प्रतिमाह भरण-पोषण की मांग की थी।

कोर्ट में पति समेत अन्य आरोपियों ने जवाब नहीं दिया

मामले में सभी प्रतिवादियों को कोर्ट में पेश होने का मौका मिला, लेकिन उन्होंने अपना जवाब दाखिल नहीं किया। इसके बाद मामले की सुनवाई बिना जवाब के आगे बढ़ी। महिला ने खुद कोर्ट में गवाही दी और अपने दावों के समर्थन में शादी का कार्ड, बेटी का जन्म प्रमाणपत्र, पुलिस में दर्ज एन.सी., FIR की कॉपी और पुलिस को दिए गए विभिन्न आवेदनों समेत कई दस्तावेज पेश किए। महिला की ओर से 2015 और 2023 में पुलिस में की गई शिकायतों के दस्तावेज भी रिकॉर्ड पर रखे गए।

गवाही को चुनौती नहीं दी गई, कोर्ट ने घरेलू हिंसा मानी

कल्याण कोर्ट ने पाया कि महिला ने समय-समय पर पुलिस के सामने शिकायतें दर्ज कराई थीं। कोर्ट के मुताबिक, प्रतिवादियों ने महिला के आरोपों को प्रभावी तरीके से चुनौती नहीं दी और उसकी गवाही का खंडन करने के लिए कोई साक्ष्य भी पेश नहीं किया। इसी आधार पर कोर्ट ने माना कि महिला ने अपने खिलाफ हुई घरेलू हिंसा को साबित किया है। कोर्ट ने पति को महिला के खिलाफ आगे किसी भी तरह की घरेलू हिंसा नहीं करने का निर्देश दिया।

पति को हर महीने ₹10 हजार देने होंगे

भरण-पोषण के मुद्दे पर कोर्ट ने पति की बताई गई ₹45 हजार मासिक आय और महिला की ₹19 हजार की आय के साथ-साथ रोजमर्रा के खर्च और महंगाई को ध्यान में रखा। कोर्ट ने पत्नी और बेटी दोनों के लिए ₹5-₹5 हजार प्रतिमाह यानी कुल ₹10 हजार प्रतिमाह भरण-पोषण तय किया। यह राशि 7 सितंबर 2026 यानी फैसले की तारीख से देनी होगी। हालांकि, महिला द्वारा मांगा गया अलग से किराया भत्ता कोर्ट ने नहीं दिया। कोर्ट ने कहा कि वह जिस मकान में रह रही है, उसे किराए का मकान साबित करने के लिए पर्याप्त ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सकी।

घर से निकालने पर भी रोक

कोर्ट ने महिला को आवास के मामले में भी राहत दी। सास या उसकी ओर से कोई अन्य व्यक्ति महिला को डोंबिवली ईस्ट के दीपेन सोसायटी स्थित फ्लैट से बाहर नहीं निकाल सकेगा। यह सुरक्षा तब तक रहेगी, जब तक सक्षम सिविल कोर्ट या किसी अन्य सक्षम ट्रिब्यूनल की ओर से मामले के गुण-दोष पर कोई उचित आदेश पारित नहीं हो जाता। इसके अलावा पति को महिला को मुकदमे के खर्च के रूप में ₹3 हजार देने का आदेश दिया गया।

7 सितंबर को जज निलेश वासाडे ने सुनाया फैसला

यह फैसला 7 सितंबर 2026 को कल्याण के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम वर्ग, कोर्ट नंबर 3 में पीठासीन अधिकारी निलेश प्रभाकर वासाडे ने सुनाया। कोर्ट ने P.W.D.V.A. No. 130/2023 को आंशिक रूप से मंजूर करते हुए पत्नी और बेटी को आर्थिक और आवास संबंधी राहत दी। कोर्ट ने फैसले की प्रति डोंबिवली पुलिस स्टेशन और प्रोटेक्शन ऑफिसर को भी भेजने का निर्देश दिया, ताकि आदेश को प्रभावी तरीके से लागू कराया जा सके।