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चोरी का गुनाह कबूल किया तो कोर्ट ने सुनाई 8-8 महीने की सजा, दोनों आरोपियों पर 1-1 हजार रुपये जुर्माना
कल्याण कोर्ट में सुनवाई के दौरान दो आरोपियों ने खुद ही अपना अपराध स्वीकार कर लिया। इसके बाद कोर्ट ने दोनों को दोषी ठहराते हुए 8-8 महीने की सश्रम कैद और 1-1 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास, तीसरी अदालत के न्यायिक अधिकारी निलेश पी. वसाडे ने 7 सितंबर 2026 को यह फैसला सुनाया। दोनों आरोपियों की अलग-अलग अवधि से हिरासत में रहने की अवधि को भी सजा में समायोजित करने का आदेश दिया गया।

कल्याण:
चोरी के मामले में दो आरोपियों ने कोर्ट के सामने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। इसके बाद कल्याण की तीसरी अदालत ने दोनों को दोषी ठहराते हुए 8-8 महीने की सश्रम कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने दोनों आरोपियों पर 1-1 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने सभी सजाओं को एक साथ चलाने का आदेश दिया है। साथ ही, पहले से जेल में बिताई गई अवधि का लाभ भी आरोपियों को दिया गया है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला कल्याण के मानपाड़ा पुलिस स्टेशन से जुड़ा है। केस का फैसला 7 सितंबर 2026 को Judicial Magistrate First Class, Third Court, Kalyan के पीठासीन अधिकारी श्री निलेश पी. वासडे ने सुनाया। मामले में आरोपी अनिल संजू रुपवते, उम्र 20 वर्ष और संजू किसान वाघारी उर्फ झंझवडिया, उम्र 24 वर्ष के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 305 और 331(4) के तहत आरोप लगाए गए थे। मामला 28 मई 2026 को कोर्ट में दाखिल और उसी दिन रजिस्टर्ड हुआ था। सुनवाई पूरी होने के बाद 7 सितंबर 2026 को फैसला सुनाया गया।
आरोपियों ने कोर्ट में कबूल किया गुनाह
मामले की सुनवाई के दौरान दोनों आरोपियों ने खुद अपराध स्वीकार करने की इच्छा जताई। उन्होंने कोर्ट में मौखिक रूप से अपना दोष कबूल करने की बात कही और इस संबंध में लिखित पर्सिस भी दाखिल की। कोर्ट ने आरोपियों से जुड़े हालात और उनके बयान को देखते हुए यह जांचा कि उनका अपराध स्वीकार करना स्वैच्छिक था या किसी दबाव या जबरदस्ती के कारण। अदालत ने पाया कि दोनों आरोपियों ने बिना किसी दबाव या जबरदस्ती के स्वेच्छा से अपराध स्वीकार किया है। इसके बाद कोर्ट ने उनका दोष स्वीकार करने का बयान मंजूर कर लिया और उन्हें संबंधित धाराओं में दोषी करार दिया।
दोनों को 8-8 महीने की सश्रम कारावास
अदालत ने आरोपी नंबर-1 अनिल संजू रुपवते और आरोपी नंबर-2 संजू किसान वाघारी उर्फ झंझवडिया को BNS की धारा 305 के तहत 8-8 महीने की सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा दोनों आरोपियों को धारा 331(4) के तहत भी 8-8 महीने की सश्रम कारावास की सजा दी गई। दोनों मामलों में अदालत ने प्रत्येक आरोपी पर 1,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना नहीं भरने पर उन्हें एक-एक महीने की अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतनी होगी।
सभी सजाएं एक साथ चलेंगी
कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि दोनों धाराओं के तहत दी गई सजाएं एक साथ चलेंगी। इतना ही नहीं, यह सजा डोंबिवली पुलिस स्टेशन से जुड़े RCC No. 588/2026 में दी गई सजा के साथ भी concurrently चलेगी। इसका मतलब है कि आरोपियों को अलग-अलग मामलों की सजाओं को जोड़कर अलग-अलग अवधि तक जेल में नहीं रहना होगा, बल्कि अदालत के आदेश के अनुसार संबंधित सजाएं एक ही समय में चलेंगी।
जेल में बिताया समय भी सजा में होगा शामिल
अदालत ने आरोपियों को पहले से हिरासत में बिताई गई अवधि का सेट-ऑफ भी दिया है। रिकॉर्ड के मुताबिक आरोपी नंबर-1 अनिल संजू रुपवते 29 मार्च 2026 से हिरासत में था, जबकि आरोपी नंबर-2 संजू किसान वाघारी 16 मई 2026 से जेल में था। अदालत ने BNS/BNSS के तहत उपलब्ध सेट-ऑफ का लाभ देते हुए इन दोनों अवधियों को सजा की अवधि में समायोजित करने का आदेश दिया।
जब्त मुद्देमाल मूल मालिक को लौटाया जाएगा
अदालत ने मामले में जब्त किए गए मुद्देमाल को लेकर भी आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि अपील की अवधि समाप्त होने के बाद जब्त मुद्देमाल उसके मूल मालिक को वापस किया जाए। अदालत ने दोनों आरोपियों को फैसले की प्रति भी नियमानुसार मुफ्त उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
7 सितंबर को खुली अदालत में सुनाया गया फैसला
कल्याण के Judicial Magistrate First Class, Third Court में यह फैसला 7 सितंबर 2026 को खुली अदालत में सुनाया गया। दोनों आरोपियों ने अपराध स्वीकार किया था, इसलिए कोर्ट को मुख्य रूप से उनके दोष स्वीकार करने की स्वैच्छिकता और सजा की मात्रा पर विचार करना था। अदालत ने परिस्थितियों और अपराध की प्रकृति को देखते हुए दोनों आरोपियों को 8-8 महीने की सश्रम कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई।
