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दहेज प्रताड़ना, मारपीट और धमकी के आरोपों में पति समेत 4 आरोपी बरी, पत्नी ने कोर्ट में कहा- गुस्से में दर्ज कराई थी शिकायत
कल्याण में 498-A समेत मारपीट और धमकी के मामले में पति समेत चार आरोपियों को कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। ट्रायल के दौरान पत्नी ने खुद आरोपों का समर्थन नहीं किया और माना कि आपसी विवाद के चलते गुस्से में शिकायत दर्ज कराई थी। समझौते और आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिलने पर कोर्ट ने सभी चारों आरोपियों को बरी कर दिया।

कल्याण में शादी के बाद कथित मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना, मारपीट, गाली-गलौज और धमकी के मामले में पति समेत चार आरोपियों को अदालत ने बरी कर दिया है। मामले की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता पत्नी ने ही अभियोजन की कहानी का समर्थन नहीं किया। उसने अदालत में कहा कि पति-पत्नी के बीच हुए छोटे-मोटे विवादों के कारण उसने गुस्से में शिकायत दर्ज कराई थी। साथ ही उसने आरोपियों के साथ समझौता होने की बात भी स्वीकार की। इसके बाद प्रथमवर्ग न्यायदंडाधिकारी एस. ए. पठाण ने 8 सितंबर 2026 को सभी चार आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।
क्या था मामला?
यह मामला कोळसेवाडी पुलिस स्टेशन में दर्ज Crime No. 177/2022 से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार शिकायतकर्ता मिनल सुमित ओव्हाळ का विवाह 20 दिसंबर 2009 को आरोपी नंबर-1 सुमित शंकर ओव्हाळ के साथ हुआ था। शादी के बाद वह अपने पति के साथ कल्याण में रहने लगी। शिकायत के मुताबिक, ससुराल में रहने के दौरान पति और उसके रिश्तेदार छोटी-छोटी बातों को लेकर उससे विवाद करते थे। आरोप था कि मायके से पैसे नहीं लाने पर पति ने उसके साथ मारपीट की और उसे तलाक देने की बात कहते हुए धमकाया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया था कि आरोपी नंबर 2 से 4 ने शादी के समय मायके और रिश्तेदारों की ओर से दिए गए सोने के आभूषण अपने कब्जे में रख लिए और शिकायतकर्ता के साथ मानसिक तथा शारीरिक रूप से दुर्व्यवहार किया। इन आरोपों के आधार पर पुलिस ने IPC की धारा 498-A, 323, 504, 506 और 34 के तहत मामला दर्ज किया था।
2021 में शिकायत, 2022 में चार्जशीट
मामले की शिकायत 8 अप्रैल 2021 को दर्ज की गई थी। पुलिस ने जांच के बाद 16 जून 2022 को चार्जशीट अदालत में दाखिल की। आरोप 17 जनवरी 2025 को तय किए गए। इसके बाद 7 जुलाई 2026 से मामले में अभियोजन के साक्ष्य की शुरुआत हुई। अभियोजन ने इस पूरे मामले में केवल शिकायतकर्ता पत्नी को ही गवाह के रूप में पेश किया।
कोर्ट में पत्नी ने क्या कहा?
ट्रायल के दौरान शिकायतकर्ता ने बताया कि आरोपी नंबर-1 उसका पति है और बाकी आरोपी उसके पति के रिश्तेदार हैं। उसने अपने विवाह की बात भी स्वीकार की। हालांकि उसने अदालत में कहा कि पति-पत्नी के बीच कुछ छोटे-मोटे विवाद हुए थे और इसी वजह से उसने गुस्से में आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज करा दी थी। अभियोजन पक्ष ने जब उसे शिकायत में दर्ज आरोपों के संबंध में सवाल किए, तो उसने आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को नकार दिया। उसने शिकायत पर अपने हस्ताक्षर होने की बात तो स्वीकार की, लेकिन कहा कि शिकायत में लिखा गया पूरा विवरण उसकी जानकारी या उसके बताए अनुसार नहीं था।
पति-पत्नी में हुआ समझौता
सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता ने अदालत के सामने यह भी स्वीकार किया कि उसके और आरोपियों के बीच समझौता हो चुका है। इस संबंध में समझौते का आवेदन भी रिकॉर्ड पर पेश किया गया था। अदालत ने पाया कि शिकायतकर्ता स्वयं मामले को आगे चलाने में इच्छुक नहीं है। अभियोजन की ओर से पूछे गए सूचक प्रश्नों में भी उसने समझौते की बात स्वीकार की।
अभियोजन आरोप साबित नहीं कर सका
प्रथमवर्ग न्यायदंडाधिकारी एस. ए. पठाण ने फैसले में कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई पर्याप्त साक्ष्य नहीं आया, जिससे आरोपियों के खिलाफ लगाए गए अपराध साबित हो सकें।
अदालत के मुताबिक, शिकायतकर्ता की गवाही से आरोपियों द्वारा कथित कृत्य किए जाने की पुष्टि नहीं हुई। परिणामस्वरूप अभियोजन आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। कोर्ट ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता और आरोपियों के बीच हुए समझौते तथा मामले के स्वरूप को देखते हुए आरोपियों के खिलाफ दोष सिद्ध नहीं होता।
पति समेत चारों आरोपी बरी
8 सितंबर 2026 को कल्याण की प्रथमवर्ग न्यायदंडाधिकारी एस. ए. पठाण की अदालत ने आरोपी सुमित शंकर ओव्हाळ, छाया शंकर ओव्हाळ, मयर शंकर ओव्हाळ और राजू दामाजी ओव्हाळ को IPC की धारा 498-A, 323, 504 और 506 सहपठित धारा 34 के आरोपों से निर्दोष मुक्त कर दिया। अदालत ने आरोपियों के बंधपत्र और जमानत-कबूलनामे रद्द कर दिए। साथ ही CrPC की धारा 437-A के तहत प्रत्येक आरोपी को 15,000 रुपये का व्यक्तिगत बंधपत्र/जमानत देने का निर्देश दिया। इस तरह करीब पांच साल से चले आ रहे इस आपराधिक मामले में अभियोजन की एकमात्र मुख्य गवाह के आरोपों से पीछे हटने और पक्षों के बीच समझौते के बाद पति समेत चारों आरोपियों को अदालत से राहत मिल गई।
