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वेदांता को बड़ा झटका! Buyback का Escrow रिलीज होने से Fraud की जांच नहीं रुकेगी, सुप्रीम कोर्ट ने SAT को भेजा मामला
वेदांता के Buyback Escrow मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि Escrow राशि रिलीज होने से PFUTP Regulations के तहत Fraud की अलग जांच नहीं रुकती। हालांकि, कोर्ट ने वेदांता को Fraud का दोषी नहीं ठहराया और मामला SAT को वापस भेज दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने सिक्योरिटीज मार्केट से जुड़े एक अहम मामले में साफ किया है कि किसी कंपनी का Buyback Escrow जारी कर दिया जाना अपने आप में धोखाधड़ी या बाजार में गलत गतिविधियों की जांच पर रोक नहीं लगाता। 9 सितंबर 2026 को जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि SEBI Buyback Regulations के तहत Escrow जारी करने की प्रक्रिया और PFUTP Regulations के तहत Fraud की जांच दो अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला Securities and Exchange Board of India बनाम Vedanta Limited & Ors. से जुड़ा है। Vedanta, जो उस समय Cairn India के नाम से जानी जाती थी, ने 2014 में खुले बाजार के जरिए 17.09 करोड़ शेयरों के Buyback की घोषणा की थी। इसके लिए अधिकतम ₹335 प्रति शेयर की कीमत और करीब ₹5,725 करोड़ की राशि निर्धारित की गई थी। Buyback अवधि 23 जनवरी 2014 से 22 जुलाई 2014 तक छह महीने के लिए तय थी। कंपनी ने नियमों के तहत ₹143.124 करोड़ की राशि यानी अधिकतम Buyback Size का 2.5 प्रतिशत Cash Escrow Account में जमा किया था। हालांकि, Buyback अवधि समाप्त होने तक कंपनी केवल करीब 3.6 करोड़ शेयर ही खरीद सकी, जो लक्षित संख्या का लगभग 21.48 प्रतिशत था। इसके लिए करीब ₹1,225 करोड़ खर्च किए गए, यानी निर्धारित अधिकतम राशि का लगभग 28.59 प्रतिशत। इसके बाद कंपनी ने SEBI से Buyback अवधि बढ़ाने की मांग की, लेकिन यह अनुरोध स्वीकार नहीं किया गया। बाद में कंपनी ने Regulation 15B(8) के तहत Escrow राशि जारी करने का अनुरोध किया। SEBI की जांच में Escrow जब्त न करने की शर्तें पूरी पाई गईं और 2016 में राशि जारी कर दी गई। हालांकि, इसके समानांतर संभावित Fraud और PFUTP Regulations के उल्लंघन की अलग जांच जारी रही।
Escrow रिलीज का मतलब Fraud से क्लीन चिट नहीं
सुप्रीम कोर्ट के सामने मुख्य सवाल यही था कि क्या Buyback Regulations के तहत Escrow जारी हो जाने के बाद उसी घटना के आधार पर PFUTP Regulations के तहत Fraud की अलग जांच की जा सकती है। कोर्ट ने इसका जवाब हां में दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि Regulation 15B(8) का दायरा केवल यह निर्धारित करने तक सीमित है कि Escrow राशि जब्त की जानी है या नहीं। इस प्रावधान के तहत Escrow रिलीज होने का मतलब यह नहीं है कि कंपनी को PFUTP Regulations के तहत संभावित Fraud से स्वतः क्लीन चिट मिल गई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि Escrow की रिलीज और Fraud की जांच दो अलग-अलग सवाल हैं। केवल इसलिए कि Escrow जब्त नहीं किया गया, यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि कंपनी की गतिविधियों में कोई Fraud या Manipulation नहीं हुआ।
SEBI की अंदरूनी टिप्पणी भी निर्णायक नहीं
Vedanta की ओर से SEBI के Legal Affairs Department की एक आंतरिक टिप्पणी पर भी भरोसा किया गया था, जिसमें PFUTP के तहत कार्रवाई को लेकर कानूनी कठिनाई का उल्लेख किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विभागीय फाइल में की गई ऐसी Internal Noting अपने आप में अंतिम कानूनी आदेश या बाध्यकारी निर्णय नहीं होती। इसलिए उस टिप्पणी को कंपनी के पक्ष में अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
Fraud के सवाल पर SAT फिर करेगा सुनवाई
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला नहीं दिया कि Vedanta ने PFUTP Regulations के तहत Fraud किया था। कोर्ट ने पाया कि कथित Fraud का आधार बने NSE और BSE के पुराने Trading Data में कुछ विसंगतियों पर न तो Adjudicating Officer ने पर्याप्त विचार किया और न ही Securities Appellate Tribunal ने। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि SEBI की अलग-अलग जांच रिपोर्टों में Trading Data और Fraud के संबंध में अंतर दिखाई देता है। इसलिए इन तथ्यात्मक विवादों का फैसला करने के लिए मामला SAT को वापस भेजना उचित माना गया।
SAT को छह महीने में फैसला करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने SAT को निर्देश दिया कि वह Fraud के सवाल पर नए सिरे से सुनवाई करे और Trading Data में बताई गई विसंगतियों की जांच करे। जरूरत पड़ने पर SAT को SEBI Act की धारा 15U के तहत संबंधित अधिकारियों, कंपनी के अधिकारियों और अन्य व्यक्तियों को बुलाने तथा दस्तावेज मंगाने की शक्ति का इस्तेमाल करने को भी कहा गया है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसके फैसले में की गई टिप्पणियों से SAT के अंतिम निष्कर्ष प्रभावित नहीं होने चाहिए। SAT को इस मामले का नए सिरे से निपटारा छह महीने के भीतर करने का निर्देश दिया गया है।
