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पति की उम्र 55 पार तो सरोगेसी की अनुमति नहीं! केरल HC ने Frozen Embryos इस्तेमाल करने की याचिका खारिज की
सरोगेसी को लेकर केरल हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए 55 साल की उम्र सीमा को बरकरार रखा है। कोर्ट ने 55 वर्ष की उम्र पार कर चुके पति वाले दंपती को Frozen Embryos के इस्तेमाल की अनुमति देने से इनकार कर दिया और उनकी अपील खारिज कर दी।

केरल हाईकोर्ट ने सरोगेसी को लेकर बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि Surrogacy (Regulation) Act, 2021 के तहत intending couple के लिए तय उम्र सीमा का पालन अनिवार्य है। कोर्ट ने उस दंपती की अपील खारिज कर दी, जिसमें पति की उम्र 55 वर्ष पार होने के बाद भी पहले से Frozen Embryos का इस्तेमाल कर सरोगेसी प्रक्रिया जारी रखने की अनुमति मांगी गई थी। केरल हाईकोर्ट की जस्टिस के. नटराजन और जस्टिस जॉनसन जॉन की डिवीजन बेंच ने 1 सितंबर 2026 के अपने आदेश में कहा कि Surrogacy Act में तय उम्र सीमा मनमानी या असंवैधानिक नहीं है। कानून के अनुसार intending couple के लिए महिला की उम्र 23 से 50 वर्ष और पुरुष की उम्र 26 से 55 वर्ष के बीच होना जरूरी है। यह उम्र eligibility certificate जारी होने के समय देखी जाती है।
क्या है पूरा मामला?
दंपती ने सरोगेसी प्रक्रिया के लिए Embryos को cryopreserve यानी फ्रीज कराया था। उनका दावा था कि जब Embryos तैयार और फ्रीज किए गए थे, तब पति निर्धारित 55 वर्ष की उम्र सीमा के भीतर था। बाद में पति की उम्र 55 वर्ष पार हो गई और इसी आधार पर सरोगेसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में दिक्कत आई। दंपती ने Surrogacy (Regulation) Act, 2021 की उम्र संबंधी शर्तों को चुनौती देते हुए केरल हाईकोर्ट का रुख किया। Single Bench ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने Division Bench के सामने अपील की।
हाईकोर्ट ने उम्र सीमा को माना वैध
Division Bench ने कहा कि कानून में तय उम्र सीमा का उद्देश्य सरोगेसी प्रक्रिया को सुरक्षित, नियंत्रित और गैर-शोषणकारी तरीके से संचालित करना है। कोर्ट ने माना कि उम्र के आधार पर किया गया वर्गीकरण कानून के उद्देश्य से तार्किक रूप से जुड़ा हुआ है और इसलिए इसे Article 14 का उल्लंघन नहीं कहा जा सकता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सरोगेसी का लाभ उठाने का कोई स्वतंत्र मौलिक अधिकार नहीं है। यह अधिकार कानून द्वारा निर्धारित शर्तों के अधीन उपलब्ध एक statutory right है। इसलिए intending couple को Surrogacy Act में निर्धारित पात्रता शर्तों का पालन करना होगा।
Frozen Embryos से नहीं मिली छूट
दंपती की प्रमुख दलील थी कि उनके Embryos पहले ही तैयार होकर फ्रीज किए जा चुके हैं, इसलिए बाद में उम्र सीमा पार हो जाने के आधार पर उन्हें उनका इस्तेमाल करने से नहीं रोका जाना चाहिए। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में Embryos उस समय फ्रीज किए गए थे जब Surrogacy Act, 2021 लागू हो चुका था। इसलिए इसे उस श्रेणी में नहीं रखा जा सकता, जिसमें कानून लागू होने से पहले सरोगेसी प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी और बाद में नए कानून की उम्र सीमा को पिछली तारीख से लागू करने का सवाल उठता है।
सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले से क्यों अलग है मामला?
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के Vijaya Kumari S. बनाम Union of India फैसले का भी संदर्भ लिया। उस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उन intending couples को राहत दी थी, जिन्होंने Surrogacy Act लागू होने से पहले Embryos तैयार और cryopreserve कर लिए थे। ऐसे मामलों में बाद में लागू हुई उम्र सीमा को retrospective तरीके से लागू करने से रोक दिया गया था। लेकिन मौजूदा मामले में हाईकोर्ट ने पाया कि दंपती के Embryos 2022 में, यानी Surrogacy Act के लागू होने के बाद cryopreserve किए गए थे। इसलिए सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का लाभ उन्हें नहीं दिया जा सकता।
