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पार्थ पवार को आरोपी क्यों नहीं बनाया? मुंढवा जमीन मामले में बॉम्बे HC ने DGP से मांगा जवाब, 28 सितंबर को अगली सुनवाई

मुंढवा जमीन मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र पुलिस की जांच पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि पार्थ पवार को आरोपी क्यों नहीं बनाया गया। जस्टिस माधव जामदार ने महाराष्ट्र DGP और जांच अधिकारी से इस पर जवाब मांगा है। हालांकि, कोर्ट ने पार्थ पवार को आरोपी या दोषी घोषित नहीं किया है।

Sonali10 सित. 2026, 06:51 PM IST
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पार्थ पवार को आरोपी क्यों नहीं बनाया? मुंढवा जमीन मामले में बॉम्बे HC ने DGP से मांगा जवाब, 28 सितंबर को अगली सुनवाई

महाराष्ट्र के मुंढवा जमीन मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल उठाया है। जस्टिस माधव जामदार की एकलपीठ ने महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक (DGP) से पूछा है कि सरकारी जमीन के कथित विवादित सौदे की जांच में पार्थ पवार को आरोपी क्यों नहीं बनाया गया, जबकि पुलिस के अनुसार जमीन खरीदने वाली कंपनी से उनका संबंध सामने आया है। कोर्ट ने DGP और जांच अधिकारी को इस संबंध में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।


क्या है मुंढवा जमीन मामला?

यह मामला पुणे के मुंढवा इलाके की करीब 40 एकड़ सरकारी जमीन से जुड़े कथित विवादित सौदे का है। रिपोर्टों के अनुसार, Ameida Enterprises LLP नाम की कंपनी ने यह जमीन करीब 300 करोड़ रुपये में खरीदी थी, जबकि जमीन का वास्तविक मूल्य इससे काफी अधिक बताया गया है। इस जमीन के सरकारी स्वामित्व और उसके हस्तांतरण को लेकर भी गंभीर सवाल उठे हैं। हाईकोर्ट में मामला पुणे के तहसीलदार सूर्यकांत गुलाबराव येवले की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। येवले पर कथित तौर पर अपने पद का दुरुपयोग कर इस लेनदेन को सुगम बनाने का आरोप है। उन्होंने अदालत में दावा किया कि इस पूरे मामले में उनकी कोई भूमिका नहीं है और उन्हें गलत तरीके से आरोपी बनाया गया है।


पार्थ पवार का नाम क्यों आया?

हाईकोर्ट के सामने यह बताया गया कि जमीन खरीदने वाली कंपनी में पार्थ पवार और दिग्विजय पाटील निदेशक थे। इसके बावजूद पुलिस ने दिग्विजय पाटील को आरोपी बनाया, लेकिन पार्थ पवार का नाम आरोपी के तौर पर शामिल नहीं किया। अदालत के 7 सितंबर के आदेश में दर्ज दलील के अनुसार, यह भी कहा गया कि पार्थ पवार प्रभावशाली व्यक्ति हैं और राज्य के उपमुख्यमंत्री के बेटे हैं। इसी बिंदु पर जस्टिस माधव जामदार ने पुलिस से सवाल किया कि यदि जांच में दोनों की भूमिका कंपनी से जुड़ी पाई गई थी तो एक व्यक्ति को आरोपी बनाया गया और दूसरे को क्यों नहीं। हाईकोर्ट ने इस सवाल का जवाब सीधे महाराष्ट्र DGP और जांच अधिकारी से मांगा है।


DGP को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र के DGP को इस मामले में व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। जांच अधिकारी को भी अपना जवाब दाखिल करना होगा। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर 2026 तक टाल दी है।


चार लोग पहले से आरोपी

उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, मामले में अब तक दिग्विजय पाटील, निलंबित सब-रजिस्ट्रार रविंद्र तारू, तहसीलदार सूर्यकांत येवले और पावर ऑफ अटॉर्नी होल्डर शीतल तेजवानी को आरोपी बनाया गया है। हाईकोर्ट की चिंता इसी बात को लेकर सामने आई कि कंपनी से जुड़े पार्थ पवार का नाम आरोपी सूची में क्यों नहीं है।