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गुजरात में बदला 70 साल पुराना जमीन कानून, 10 गुंठा की न्यूनतम सीमा तय

गुजरात: राज्य सरकार ने कृषि भूमि के छोटे-छोटे हिस्सों में बंटवारे से जुड़े पुराने नियम में बड़ा बदलाव किया है। अब पूरे राज्य में कृषि भूमि की न्यूनतम मानक इकाई 10 गुंठा यानी करीब 1,012 वर्ग मीटर तय की गई है। पहले अलग-अलग क्षेत्रों में यह सीमा 20 गुंठा से लेकर 3 एकड़ तक थी। नए नियम का असर भूमि विभाजन, सर्वे नंबर, भूमि रिकॉर्ड और पुराने जमीन मामलों पर पड़ सकता है।

Neha Sharma10 सित. 2026, 06:52 PM IST
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गुजरात में बदला 70 साल पुराना जमीन कानून, 10 गुंठा की न्यूनतम सीमा तय

गुजरात: राज्य सरकार ने कृषि भूमि के छोटे-छोटे टुकड़ों में बंटवारे से जुड़े करीब 70 साल पुराने नियम में बड़ा बदलाव किया है। अब पूरे गुजरात में कृषि भूमि की न्यूनतम मानक इकाई 10 गुंठा, यानी करीब 1,012 वर्ग मीटर या 0.25 एकड़ तय की गई है। पहले अलग-अलग क्षेत्रों में यह सीमा 20 गुंठा से लेकर 3 एकड़ तक थी। नए बदलाव का असर जमीन के विभाजन, सर्वे नंबर, भूमि रिकॉर्ड और पुराने जमीन मामलों पर पड़ सकता है। गुजरात में कृषि भूमि के बंटवारे को नियंत्रित करने के लिए Gujarat Prevention of Fragmentation and Consolidation of Holdings Act, 1947 लागू है। 


इस कानून का मूल उद्देश्य खेती की जमीन को बहुत छोटे-छोटे हिस्सों में बंटने से रोकना था, ताकि कृषि भूमि की उपयोगिता बनी रहे। हालांकि पिछले कई दशकों में राज्य में आबादी, परिवारों की संरचना, शहरीकरण और जमीन के इस्तेमाल में काफी बदलाव आया है। इसी को देखते हुए सरकार ने पुराने नियमों में संशोधन किया है। नए प्रावधान के तहत अब पूरे गुजरात में कृषि भूमि के लिए 10 गुंठा की समान न्यूनतम इकाई निर्धारित की गई है। इसका मतलब है कि पात्र कृषि भूमि के विभाजन और रिकॉर्ड में अलग इकाई बनाने के लिए 10 गुंठा का मानक महत्वपूर्ण होगा।


किसानों और जमीन मालिकों पर असर

इस बदलाव का सबसे बड़ा असर उन परिवारों पर पड़ सकता है जिनकी कृषि भूमि पीढ़ी-दर-पीढ़ी बंटते हुए छोटे हिस्सों में पहुंच गई है। पहले कई क्षेत्रों में न्यूनतम सीमा अधिक होने के कारण छोटे हिस्सों को अलग भूमि इकाई के रूप में दर्ज कराने में परेशानी आती थी। अब 10 गुंठा के मानक से ऐसे मामलों में भूमि रिकॉर्ड को वास्तविक हिस्सेदारी के अनुरूप अपडेट करने का रास्ता आसान हो सकता है। उदाहरण के लिए, अगर किसी परिवार के पास 30 गुंठा कृषि भूमि है और वह तीन उत्तराधिकारियों के बीच बराबर बांटी जाती है, तो प्रत्येक के हिस्से में 10 गुंठा जमीन आएगी।


Survey Number और Land Record में बदलाव

जमीन के राजस्व रिकॉर्ड में Survey Number किसी भूखंड की पहचान के लिए महत्वपूर्ण होता है। नए नियम से पात्र छोटे कृषि भूखंडों को अलग इकाई के रूप में दर्ज करने की प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है। इससे जमीन के मालिकाना हक और हिस्सेदारी को रिकॉर्ड में स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है। हालांकि केवल 10 गुंठा जमीन होने से जमीन के इस्तेमाल से जुड़े सभी अधिकार अपने आप नहीं मिल जाते। जमीन की बिक्री, गैर-कृषि उपयोग या दूसरे हस्तांतरण के लिए संबंधित भूमि और राजस्व कानूनों का पालन करना होगा।


पुराने जमीन मामलों के लिए भी राहत

नए संशोधन में पुराने भूमि विभाजन और हस्तांतरण से जुड़े मामलों को नियमित करने का भी प्रावधान किया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक 29 जनवरी 1948 से 31 मार्च 2026 के बीच हुए पात्र भूमि हस्तांतरण या विभाजन को नए प्रावधानों के तहत नियमित करने का रास्ता बनाया गया है। ऐसे मामलों में निर्धारित शर्तें पूरी होने पर पुराने विवादों और लंबित कार्रवाई को खत्म करने की व्यवस्था की गई है। हालांकि हर पुराने मामले को स्वतः वैध नहीं माना जाएगा। संबंधित जमीन को नए नियमों और दूसरी लागू कानूनी शर्तों को पूरा करना होगा।


शहरी क्षेत्रों को अलग रखा गया

नया 10 गुंठा वाला मानक मुख्य रूप से ग्रामीण कृषि भूमि से संबंधित है। शहरी क्षेत्रों को इस व्यवस्था से अलग रखा गया है। गुजरात में तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण कई ग्रामीण इलाके अब आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक गतिविधियों के करीब आ चुके हैं। सरकार का मानना है कि ऐसी बदलती परिस्थितियों में दशकों पुराने भूमि-विभाजन नियमों को मौजूदा जरूरतों के अनुसार बदलना जरूरी था।


70 साल पुराने कानून में बदलाव क्यों?

1947 में बनाए गए कानून का उद्देश्य कृषि भूमि को अत्यधिक छोटे हिस्सों में विभाजित होने से रोकना था। उस समय खेती के लिए बड़े और आर्थिक रूप से व्यवहार्य भूखंडों को जरूरी माना जाता था। लेकिन अब उत्तराधिकार के कारण जमीन का लगातार बंटवारा, छोटे किसानों की संख्या, शहरीकरण और जमीन के बढ़ते मूल्य जैसी परिस्थितियां बदल चुकी हैं। ऐसे में सरकार ने न्यूनतम इकाई को घटाकर 10 गुंठा करने का फैसला किया है।


सरकार का अगला कदम

यह बदलाव जुलाई 2026 में अध्यादेश के जरिए लागू किया गया था। इसके बाद राजस्व विभाग ने इससे संबंधित अधिसूचनाएं जारी कीं। अब सरकार इस बदलाव को स्थायी कानूनी व्यवस्था में बदलने के लिए विधानसभा की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है।


कुल मिलाकर गुजरात का यह बदलाव राज्य के Land Records, Survey Number, Agricultural Land Fragmentation और पुराने जमीन विवादों पर महत्वपूर्ण असर डाल सकता है। छोटे भूखंडों के मालिकों के लिए रिकॉर्ड और हिस्सेदारी स्पष्ट करने का रास्ता आसान होने की उम्मीद है, लेकिन साथ ही कृषि भूमि के अत्यधिक छोटे टुकड़ों में बंटने से खेती की व्यवहार्यता प्रभावित न हो, यह भी सरकार के सामने बड़ी चुनौती रहेगी।