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HPV वैक्सीन पर सवाल उठाने वाली PIL पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, याचिका सुनने से इनकार; CJI बोले- “लाखों बेटियों के स्वास्थ्य का सवाल”

HPV वैक्सीन कार्यक्रम को लेकर दायर PIL पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। CJI सूर्यकांत की पीठ ने याचिका पर सुनवाई से इनकार किया, जिसके बाद याचिकाकर्ता ने इसे वापस ले लिया। कोर्ट ने सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रम को प्रभावित करने वाले दावों पर सावधानी बरतने की बात कही।

Sonali10 सित. 2026, 06:53 PM IST
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HPV वैक्सीन पर सवाल उठाने वाली PIL पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, याचिका सुनने से इनकार; CJI बोले- “लाखों बेटियों के स्वास्थ्य का सवाल”

किशोरियों के लिए चलाए जा रहे HPV वैक्सीनेशन कार्यक्रम को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने वैक्सीन के प्रतिकूल प्रभाव, फर्टिलिटी पर संभावित असर और प्रभावित लोगों के लिए मुआवजा तंत्र नहीं होने से जुड़े सवालों वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि यह देश की लाखों बेटियों के स्वास्थ्य से जुड़ा विषय है और बिना पर्याप्त वैज्ञानिक आधार के किए गए दावे सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रम को प्रभावित कर सकते हैं। इसके बाद याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका वापस ले ली।

डॉक्टरों के संगठन ने दायर की थी PIL

यह याचिका Universal Health Organisation की ओर से दायर की गई थी। मामले की सुनवाई Chief Justice of India Surya Kant की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने की। पीठ में CJI सूर्यकांत के अलावा जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने स्पष्ट किया कि उनका संगठन वैक्सीनेशन का विरोध नहीं कर रहा है। उनका कहना था कि चिंता HPV वैक्सीनेशन कार्यक्रम के लागू होने के तरीके को लेकर है। खासतौर पर वैक्सीन लेने के बाद होने वाले adverse events की निगरानी और ऐसे मामलों में compensation mechanism उपलब्ध कराने की मांग उठाई गई थी।

फर्टिलिटी पर असर का दावा

याचिकाकर्ता की ओर से यह भी दावा किया गया कि HPV वैक्सीन का लड़कियों की fertility पर असर पड़ सकता है। हालांकि, कोर्ट ने ऐसे दावों को लेकर पर्याप्त वैज्ञानिक आधार की जरूरत पर जोर दिया। सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने WHO की ओर से HPV वैक्सीन की सिफारिश का संदर्भ देते हुए सवाल उठाया कि जब विश्व स्वास्थ्य संगठन इसकी सिफारिश करता है, तो डॉक्टरों का संगठन इस तरह की याचिका क्यों लेकर आया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि किसी विशेष मामले में गलत तरीके से वैक्सीनेशन हुआ है या किसी व्यक्ति को नुकसान हुआ है, तो सामान्य compensation के कानूनी नियम लागू होंगे। किसी खास वैक्सीन के adverse impact के लिए अलग से विशेष व्यवस्था जरूरी होने की बात कोर्ट ने स्वीकार नहीं की।

CJI सूर्यकांत की कड़ी टिप्पणी

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने मामले की गंभीरता पर जोर देते हुए कहा कि यह लाखों बेटियों के स्वास्थ्य से जुड़ा विषय है। उन्होंने याचिकाकर्ता के वकील को चेतावनी दी कि यदि वह मामले पर जोर देकर बहस करेंगे तो कोर्ट याचिका और याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कड़ी टिप्पणियां कर सकता है। CJI ने इस बात पर भी चिंता जताई कि अगर याचिकाकर्ता डॉक्टर हैं, तो वैक्सीन के खिलाफ या उसके कार्यक्रम को प्रभावित करने वाले दावे करने से पहले वैज्ञानिक आधार और शोध का होना बेहद महत्वपूर्ण है।

याचिका वापस लेने की अनुमति

पीठ ने शुरुआत में ही संकेत दिया कि वह इस PIL को entertain करने के इच्छुक नहीं है और याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या वह याचिका वापस लेना चाहेंगे। इसके बाद याचिकाकर्ता की ओर से याचिका वापस लेने की सहमति दी गई और कोर्ट ने इसे वापस लेने की अनुमति दे दी। इस तरह सुप्रीम कोर्ट ने HPV वैक्सीनेशन कार्यक्रम की वैधता या सुरक्षा पर कोई अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं दिया। अदालत ने केवल इस PIL को entertain करने से इनकार किया और याचिका वापस ले ली।

HPV वैक्सीन क्यों महत्वपूर्ण है?

HPV यानी Human Papillomavirus एक ऐसा वायरस है जो कई प्रकार के कैंसर, विशेष रूप से cervical cancer, से जुड़ा है। HPV vaccines का उद्देश्य HPV के उन प्रकारों से सुरक्षा देना है जो कैंसर के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। WHO भी लड़कियों और महिलाओं में cervical cancer की रोकथाम के लिए HPV vaccination की सिफारिश करता है। भारत में HPV vaccination programme को लेकर हाल में informed consent, safety monitoring और accountability जैसे मुद्दों पर भी कानूनी सवाल उठाए गए हैं। 7 सितंबर 2026 की रिपोर्टों में भी सुप्रीम कोर्ट के समक्ष इसी कार्यक्रम के implementation को चुनौती देने वाली PIL का उल्लेख किया गया था।