law-order

“झूठों का झुंड”! थाने में CCTV बंद होने पर इलाहाबाद HC सख्त, अवैध हिरासत के लिए ₹65 हजार मुआवजे का आदेश

देवरिया के गौरी बाजार थाने में कथित अवैध हिरासत और CCTV फुटेज गायब होने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई है। CCTV खराब होने की पुलिस की दलीलों पर कोर्ट ने SHO और SP से तीखे सवाल किए और सुनवाई के दौरान पुलिस अधिकारियों को “झूठों का झुंड” तक कह दिया। अदालत ने चार याचिकाकर्ताओं की अवैध हिरासत के लिए कुल ₹65,000 मुआवजा देने का आदेश दिया, जिसकी वसूली SHO के वेतन से की जाएगी।

Sonali10 सित. 2026, 06:53 PM IST
खबर शेयर करें:
“झूठों का झुंड”! थाने में CCTV बंद होने पर इलाहाबाद HC सख्त, अवैध हिरासत के लिए ₹65 हजार मुआवजे का आदेश

देवरिया के गौरी बाजार थाने में चार लोगों को कथित तौर पर कई दिनों तक अवैध हिरासत में रखने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। CCTV फुटेज उपलब्ध नहीं होने और कैमरे खराब होने की पुलिस की दलील पर कोर्ट ने SHO और SP से तीखे सवाल किए। सुनवाई के दौरान जस्टिस अतुल श्रीधरन ने पुलिस अधिकारियों को मौखिक रूप से “Bunch of Liars” यानी “झूठों का झुंड” तक कहा।

10 दिन की अवैध हिरासत का आरोप

मामला देवरिया जिले के गौरी बाजार पुलिस स्टेशन से जुड़ा है। चार याचिकाकर्ताओं ने Habeas Corpus याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि उन्हें पुलिस ने 13 अप्रैल से 24 अप्रैल 2026 के बीच अलग-अलग अवधि तक अवैध रूप से हिरासत में रखा। इनमें कुछ लोगों को करीब 10 दिनों तक हिरासत में रखे जाने का आरोप लगाया गया था। इस मामले की सुनवाई जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस दिवेश चंद्र सामंत की पीठ कर रही थी। अदालत ने पहले पुलिस स्टेशन के अंदर लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग पेश करने का निर्देश दिया था, ताकि याचिकाकर्ताओं द्वारा लगाए गए अवैध हिरासत के आरोपों की सच्चाई का पता लगाया जा सके।

CCTV खराब होने की पुलिस की दलील पर सवाल

2 सितंबर को राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि घटना के आसपास CCTV रिकॉर्डिंग सिस्टम में खराबी आ गई थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने देवरिया के SP और संबंधित SHO को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया। सुनवाई के दौरान SHO ने बताया कि CCTV सिस्टम 12 अप्रैल 2026 को खराब हो गया था। कोर्ट ने सवाल किया कि यदि कैमरा बाद में काम कर रहा था तो उसकी रिकॉर्डिंग कहां है। अदालत ने यह भी पूछा कि CCTV की मरम्मत या खराबी को लेकर General Diary यानी GD में कोई एंट्री की गई थी या नहीं। SHO ने माना कि ऐसी कोई GD एंट्री नहीं की गई थी। वहीं, SP ने अदालत को बताया कि उन्हें CCTV सिस्टम के काम नहीं करने की जानकारी नहीं दी गई थी। इन जवाबों से अदालत बेहद नाराज हुई।

“कोर्ट से माफी नहीं, जनता से मांगिए”

सुनवाई के दौरान SP ने अदालत से माफी मांगी। इस पर जस्टिस अतुल श्रीधरन ने कथित तौर पर कहा कि “कोर्ट से माफी मत मांगिए, जनता से मांगिए।” अदालत ने यह भी सवाल किया कि यदि SHO की लापरवाही सामने आई थी तो उसके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई। कोर्ट ने पूछा कि क्या SHO को निलंबित किया गया या सेवा से हटाया गया। पीठ ने मौखिक टिप्पणी की कि ऐसा SHO, जो थाने में GD एंट्री तक नहीं करा सकता, पुलिस सेवा में रहने के योग्य नहीं है। SP ने बताया कि SHO को Crime Branch भेज दिया गया है, लेकिन अदालत इस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं दिखी।

CCTV के लिए जारी ₹46.46 लाख पर भी सवाल

हाईकोर्ट ने CCTV व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार की ओर से जारी धनराशि पर भी सवाल उठाए। अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार देवरिया जिले के पुलिस थानों के लिए CCTV व्यवस्था के संबंध में ₹46.46 लाख जारी किए गए थे। कोर्ट ने यह जानना चाहा कि जब CCTV का काम पूरा नहीं हुआ था तो संबंधित एजेंसी को पूरी रकम क्यों जारी कर दी गई। अदालत ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने के बजाय भुगतान कर दिया गया।

अवैध हिरासत पर ₹65 हजार मुआवजा

हाईकोर्ट ने चारों याचिकाकर्ताओं की कथित unlawful detention के लिए कुल ₹65,000 मुआवजा देने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ता नंबर 2, 3 और 4 को ₹20,000-₹20,000 तथा याचिकाकर्ता नंबर 1 को ₹5,000 देने का आदेश दिया गया। खास बात यह है कि अदालत ने निर्देश दिया कि यह कुल ₹65,000 की राशि संबंधित SHO के वेतन से वसूल की जाए।

कोर्ट की सख्ती का संदेश

इस मामले में हाईकोर्ट की टिप्पणियां पुलिस थानों में CCTV व्यवस्था, GD रिकॉर्ड और हिरासत की पारदर्शी निगरानी के महत्व को रेखांकित करती हैं। अदालत ने पुलिस अधिकारियों से यह भी स्पष्ट जवाब मांगा कि याचिका दाखिल होने और अदालत के आदेश से पहले उन्होंने CCTV व्यवस्था में गड़बड़ी को लेकर स्वतंत्र रूप से क्या कार्रवाई की थी।