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₹1.84 लाख की चोरी में CCTV साबित नहीं हुआ, फिर भी आरोपी दोषी; कल्याण कोर्ट ने बरामदगी को माना अहम सबूत

डोंबिवली ईस्ट की एक कंपनी से करीब ₹1.84 लाख का सामान चोरी करने के मामले में कल्याण कोर्ट ने आरोपी मनीष सुंदरलाल राय को दोषी ठहराया है। खास बात यह रही कि अभियोजन CCTV फुटेज को अदालत में प्रभावी तरीके से साबित नहीं कर सका, लेकिन चोरी के सामान की बरामदगी और गवाहों की गवाही को कोर्ट ने अहम मानते हुए आरोपी के खिलाफ आरोप साबित माना।

Sonali10 सित. 2026, 06:59 PM IST
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₹1.84 लाख की चोरी में CCTV साबित नहीं हुआ, फिर भी आरोपी दोषी; कल्याण कोर्ट ने बरामदगी को माना अहम सबूत

कल्याण की Judicial Magistrate First Class Court ने डोंबिवली ईस्ट की एक कंपनी से करीब ₹1.84 लाख का सामान चोरी करने के मामले में आरोपी मनीष सुंदरलाल राय को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 305 के तहत दोषी ठहराया है। खास बात यह रही कि अभियोजन पक्ष CCTV फुटेज को अदालत में साबित नहीं कर सका और कोर्ट ने उसे कमजोर साक्ष्य माना। इसके बावजूद आरोपी से हुई बरामदगी और गवाहों की गवाही को आधार बनाकर अदालत ने चोरी का आरोप साबित माना। यह फैसला 9 सितंबर 2026 को कल्याण के Judicial Magistrate First Class, 3rd Court के न्यायिक दंडाधिकारी निलेश प्रभाकर वसाडे ने सुनाया।

कंपनी से चोरी हुआ था ₹1.84 लाख का सामान

अभियोजन के अनुसार, शिकायतकर्ता राहुलकुमार रामनलाल कसलीवाल की कंपनी डोंबिवली ईस्ट के MIDC Phase-2, सोनारपाड़ा इलाके में स्थित है। 18 मई 2025 की रात करीब 8:20 बजे कंपनी बंद की गई थी। अगले दिन सुबह जब कर्मचारी ने कंपनी खोली तो पूरे परिसर में पानी जमा था। जांच करने पर पता चला कि बाथरूम का नल गायब था।

इसके बाद कंपनी परिसर की तलाशी ली गई तो मशीनरी के कई हिस्से और लोहे से जुड़े सामान भी गायब मिले। शिकायतकर्ता ने CCTV फुटेज चेक की, जिसमें एक अज्ञात व्यक्ति कंपनी में प्रवेश करता और सामान ले जाता हुआ दिखाई देने की बात सामने आई।  चोरी हुए सामान में पीतल के कास्टिंग हीटर, एलॉय स्टील डाई फेस कटर सेट, पुराने पीतल के हीटर, भारी-भरकम पीतल के हीटर, I-Beam, चैनल, प्लेट, लोहे का सामान, 10 पानी के नल और टूल बॉक्स शामिल थे। इन सभी सामान की कुल कीमत करीब ₹1.84 लाख बताई गई।

आरोपी से हुई सामान की बरामदगी

मामले की जांच के दौरान पुलिस ने मनीष राय को गिरफ्तार किया। जांच अधिकारी के मुताबिक, पूछताछ के दौरान आरोपी ने चोरी में शामिल होने की बात स्वीकार की। इसके बाद पुलिस आरोपी और पंच गवाहों के साथ गोलावली गांव स्थित विक्की पाटिल की जगह पर पहुंची। अदालत के अनुसार, वहां से लोहे के चैनल, एंगल और प्लेट सहित करीब ₹10,000 का सामान बरामद किया गया। आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि बाकी सामान उसके फरार साथी के पास है। कोर्ट ने कहा कि आरोपी के कब्जे से सामान की बरामदगी अभियोजन के मामले को समर्थन देती है। अदालत ने यह भी महत्वपूर्ण माना कि आरोपी यह नहीं बता सका कि चोरी का सामान उसके कब्जे में कैसे आया।

CCTV फुटेज को कोर्ट ने माना कमजोर साक्ष्य

फैसले में अदालत ने CCTV फुटेज से जुड़े साक्ष्य पर भी टिप्पणी की। कोर्ट ने पाया कि CCTV फुटेज को पेन ड्राइव में लिया गया था और लैपटॉप पर दिखाया गया था, लेकिन अभियोजन ने इसे कोर्ट के डेस्कटॉप पर चलाकर साबित नहीं किया। इसके अलावा जांच अधिकारी ने भी CCTV फुटेज की जब्ती और उसके संबंध में पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं किए। इसलिए अदालत ने CCTV को कमजोर साक्ष्य माना और उसे आरोपी की पहचान साबित करने के लिए भरोसेमंद आधार नहीं माना। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि CCTV साबित नहीं होने से अभियोजन का पूरा मामला खत्म नहीं होता। अदालत ने कहा कि आरोपी से हुई बरामदगी और उससे जुड़े गवाहों की गवाही आपस में corroborate होती है।

पंच गवाह पर बचाव पक्ष की आपत्ति भी खारिज

बचाव पक्ष ने एक पंच गवाह की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह पुलिस के मामलों में अक्सर पंच बनता है। कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि केवल इसलिए कि कोई व्यक्ति कई मामलों में पंच गवाह रहा है, उसकी गवाही को स्वतः खारिज नहीं किया जा सकता। आरोपी को यह दिखाना होगा कि इससे उसके खिलाफ पूर्वाग्रह पैदा हुआ है, लेकिन ऐसा कोई ठोस आधार रिकॉर्ड पर नहीं आया। अदालत ने माना कि बरामदगी से जुड़े गवाहों की गवाही एक-दूसरे से मेल खाती है और अभियोजन ने चोरी में आरोपी की भूमिका साबित कर दी है। इसके आधार पर कोर्ट ने मनीष सुंदरलाल राय को धारा 305 BNS के तहत दोषी ठहराया।