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24 साल पुराने बिजली तार चोरी केस में बड़ा फैसला! गवाह नहीं मिले, मुख्य पंच भी मुकरा; कल्याण कोर्ट ने 2 आरोपियों को किया बरी
करीब 24 साल पुराने बिजली के तार चोरी के मामले में कल्याण कोर्ट ने दो आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष महत्वपूर्ण गवाहों को पेश नहीं कर सका, जबकि मुख्य पंच गवाह ने भी मामले की जानकारी होने से इनकार कर दिया। ठोस सबूत के अभाव में कोर्ट ने आरोपियों को चोरी के आरोप से निर्दोष मुक्त कर दिया।

कल्याण के प्रथमवर्ग न्यायदंडाधिकारी छठे न्यायालय की पीठासीन अधिकारी श्रीमती के.एस. कातकाडे ने 9 सितंबर 2026 को नियमित फौजदारी खटला क्रमांक 390/2002 में यह फैसला सुनाया। मामला कल्याण तालुका पुलिस स्टेशन के अपराध क्रमांक 78/2002 से जुड़ा था। आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 379 के साथ धारा 34 के तहत मामला दर्ज किया गया था। अभियोजन के अनुसार, शिकायतकर्ता शांताराम राघो कोर एमएसईबी के गोवेली सबस्टेशन में लाइन हेल्पर के पद पर कार्यरत थे।
एमएसईबी के विद्युत पंप का बिजली आपूर्ति बंद होने की शिकायत मिलने के बाद जब संबंधित लाइन की जांच की गई तो पता चला कि 22 मई 2002 से 18 जून 2002 के बीच किसी व्यक्ति ने चालू विद्युत लाइन से वायर काटकर चोरी कर लिए थे। इसके बाद 21 जून 2002 को कल्याण तालुका पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई गई और आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ। पुलिस ने जांच के दौरान आरोपियों को गिरफ्तार किया, पंचनामा तैयार किया, दस्तावेज और कथित मुद्देमाल जब्त किया तथा जांच पूरी होने के बाद आरोपपत्र दाखिल किया। इस मामले में आरोपी नंबर 3 दिनेश दगडु शेलार और आरोपी नंबर 4 रविंद्र विठ्ठल पडवळ के खिलाफ सुनवाई आगे बढ़ी। वहीं आरोपी नंबर 1 चंद्रकांत काळुराम वाघ फरार था और उसके खिलाफ सीआरपीसी की धारा 299 के तहत कार्यवाही आगे बढ़ाई गई। आरोपी नंबर 2 की मृत्यु हो चुकी थी, इसलिए उसके खिलाफ मामला समाप्त कर दिया गया था। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मुख्य रूप से पंच गवाह मालाराम लडकुगायकर और बजावणी अधिकारी एम.एन. शाह की गवाही पेश की। पंच गवाह ने अदालत में कहा कि उसे मामले के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उसने यह भी कहा कि पंचनामे पर उसकी हस्ताक्षर कैसे दर्ज हुई, इसकी भी उसे जानकारी नहीं है और उसे घटना याद नहीं है।
अभियोजन पक्ष की ओर से शिकायतकर्ता और अन्य गवाहों को बार-बार समन जारी किए गए, लेकिन वे अदालत में उपस्थित नहीं हुए। एक गवाह की मृत्यु हो चुकी थी, जबकि अन्य गवाह अपने दिए गए पते पर नहीं मिले। पुलिस की ओर से इस संबंध में रिपोर्ट भी रिकॉर्ड पर पेश की गई। अदालत ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों से आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस और विश्वसनीय सबूत सामने नहीं आया। अभियोजन पक्ष चोरी के अपराध के आवश्यक तत्वों को उचित संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। अदालत ने माना कि रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य आरोपियों को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसके आधार पर कोर्ट ने दिनेश दगडु शेलार और रविंद्र विठ्ठल पडवळ को भारतीय दंड संहिता की धारा 379 के आरोप से सीआरपीसी की धारा 248(1) के तहत निर्दोष मुक्त कर दिया। वहीं फरार आरोपी चंद्रकांत काळुराम वाघ को भी धारा 379 के आरोप से दोषमुक्त किया गया। अदालत ने आरोपियों के जमानत और जमानतदार के बंधपत्र रद्द करने का आदेश दिया तथा अपील की स्थिति में सीआरपीसी की धारा 437-A के तहत आवश्यक जमानत प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
