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सोते यात्री की जेब से मोबाइल चोरी, आरोपी ने कोर्ट में कबूला अपराध; कल्याण कोर्ट ने सुनाई 3 महीने की सजा

7 जुलाई 2026 को अंबरनाथ रेलवे स्टेशन पर सो रहे यात्री की जेब से मोबाइल चोरी करने के मामले में कल्याण लोहमार्ग कोर्ट ने आरोपी शुभम शरद घोलप को दोषी ठहराया है। आरोपी ने अदालत में खुद अपना अपराध कबूल किया, जिसके बाद कोर्ट ने उसे तीन महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई। जेल में बिताए गए समय को सजा में समायोजित करने का भी आदेश दिया गया।

Sonali10 सित. 2026, 06:59 PM IST
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सोते यात्री की जेब से मोबाइल चोरी, आरोपी ने कोर्ट में कबूला अपराध; कल्याण कोर्ट ने सुनाई 3 महीने की सजा

अंबरनाथ रेलवे स्टेशन पर सो रहे यात्री की जेब से मोबाइल फोन चोरी करने के मामले में कल्याण रेलवे कोर्ट ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए तीन महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। खास बात यह रही कि आरोपी ने अदालत में खुद अपना अपराध स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने उसके जेल में बिताए समय को सजा में समायोजित करने का भी आदेश दिया। मामला 7 जुलाई 2026 की रात का है। शिकायतकर्ता महेंद्रकुमार बजरंगप्रसाद मौर्य को भिवंडी जाना था। वह कल्याण रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर मध्य ब्रिज के नीचे बैठकर ट्रेन का इंतजार कर रहे थे। यात्रा के कारण थके होने की वजह से उन्हें वहीं नींद आ गई। इसी दौरान आरोपी शुभम शरद घोलप ने शिकायतकर्ता की बिना पहनी हुई पैंट की दाहिनी जेब से मोबाइल फोन निकाल लिया। शिकायतकर्ता को जब मोबाइल चोरी होने का पता चला तो मामले की सूचना पुलिस को दी गई। इसके बाद कल्याण लोहमार्ग पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 303(2) के तहत मामला दर्ज किया गया।


मामले की सुनवाई के दौरान 4 सितंबर 2026 को आरोपी को आधारवाड़ी कारागृह से अदालत के समक्ष पेश किया गया। अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक आरोपी ने स्वयं अपना अपराध स्वीकार करते हुए दोष कबूल किया। उसने अदालत से कम से कम सजा देने की अपील भी की। अदालत ने आरोपी की उम्र और मामले की परिस्थितियों के साथ-साथ उसके द्वारा अपराध स्वीकार किए जाने पर विचार किया। रिकॉर्ड के अनुसार आरोपी की उम्र 27 वर्ष है और वह 7 जुलाई 2026 से जेल में था। फैसले के दिन तक वह करीब एक महीने 28 दिन जेल में रह चुका था। कल्याण न्याय दंडाधिकारी प्रथम वर्ग लोहमार्ग, वी.पी. शिंदे ने आरोपी शुभम शरद घोलप को BNS की धारा 303(2) के तहत दोषी ठहराते हुए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 264 के तहत तीन महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई।


हालांकि आरोपी पहले ही करीब एक महीने 28 दिन जेल में बिता चुका था, इसलिए अदालत ने BNSS की धारा 468 के तहत हिरासत में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित करने का आदेश दिया। यानी जेल में पहले से बिताया गया समय उसकी कुल सजा में गिना जाएगा। अदालत ने आरोपी को फैसले की प्रति निशुल्क और तत्काल उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया। मामले में जब्त किया गया इंफिनिक्स कंपनी का पांढरे रंग का मोबाइल फोन शिकायतकर्ता को स्थायी रूप से वापस करने का आदेश दिया गया। इस फैसले के बाद मामले का निपटारा कर दिया गया।