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बिना परमिट रेलवे टिकट बेचते पकड़ा गया शख्स, कल्याण कोर्ट ने सुनाई सजा; 10 हजार रुपये जुर्माना, न भरने पर 1 महीने की कैद
बिना वैध परमिट रेलवे के आरक्षित टिकट निकालकर यात्रियों को अतिरिक्त रकम लेकर बेचने के मामले में कल्याण रेलवे कोर्ट ने आरोपी मनीष गंगासिंह ठाकुर को दोषी ठहराया है। करीब 9 साल पुराने इस मामले में अदालत ने उस पर ₹10 हजार का जुर्माना लगाया है। जुर्माना नहीं भरने पर आरोपी को एक महीने की साधारण कैद भुगतनी होगी।

यह फैसला 8 सितंबर 2026 को कल्याण के प्रथमवर्ग न्यायदंडाधिकारी, लोहमार्ग न्यायालय के पीठासीन अधिकारी वी.पी. शिंदे ने नियमित फौजदारी खटला क्रमांक 496/2016 में सुनाया। मामला रेलवे सुरक्षा बल, कल्याण से जुड़े अपराध क्रमांक 3081/2016 का था। अभियोजन के अनुसार 27 जून 2016 को सहायक सुरक्षा आयुक्त, कल्याण की ओर से एक टीम गठित की गई थी। इस टीम में रेलवे सुरक्षा बल के अधिकारी और कर्मचारी शामिल थे। टीम ने कोलसेवाड़ी इलाके में रेलवे बुकिंग ऑफिस के पास यात्रियों द्वारा निकाले जा रहे आरक्षित टिकटों की जांच शुरू की। जांच के दौरान आरोपी मनीष गंगासिंह ठाकुर को रोककर पूछताछ की गई। उसके पास दो आरक्षित रेलवे टिकट और दो आरक्षण फॉर्म मिले। आरोप था कि आरोपी के पास रेलवे के आरक्षित टिकट निकालकर देने का कोई वैध अधिकार या परमिट नहीं था।
अभियोजन का दावा था कि आरोपी यात्रियों से रेलवे टिकट के वास्तविक किराए के अलावा 200 से 300 रुपये अतिरिक्त वसूलकर टिकट उपलब्ध कराता था और इस तरह रेलवे टिकटों की अवैध बिक्री कर रहा था। इसके बाद उसके खिलाफ रेलवे सुरक्षा बल थाने में मामला दर्ज किया गया। जांच के दौरान आरोपी के पास से मिले दो रेलवे आरक्षित टिकट और दो भरे हुए आरक्षण फॉर्म पंचों की मौजूदगी में जब्त किए गए। पुलिस ने आरोपी का बयान दर्ज किया और संबंधित टिकटों के रिकॉर्ड की भी जांच की। जांच पूरी होने के बाद मामला अदालत में पहुंचा। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने शिकायतकर्ता और जांच अधिकारी दयानंद रामशब्द यादव की गवाही के आधार पर अपना पक्ष रखा। अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार बचाव पक्ष की ओर से कोई गवाह पेश नहीं किया गया। अदालत ने साक्ष्यों का मूल्यांकन करते हुए पाया कि आरोपी के पास रेलवे के आरक्षित टिकट जारी करने या बेचने का कोई वैध परमिट नहीं था। शिकायतकर्ता की गवाही, जब्त किए गए टिकट और आरक्षण फॉर्म तथा आरोपी की ओर से प्रस्तुत स्वीकारोक्ति/निवेदन को अदालत ने महत्वपूर्ण माना।
अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि अभियोजन पक्ष ने यह साबित कर दिया कि आरोपी बिना वैध अधिकार के रेलवे के आरक्षित टिकट निकालने और उन्हें अतिरिक्त रकम लेकर यात्रियों को उपलब्ध कराने का काम कर रहा था। इसके आधार पर कोर्ट ने आरोपी को भारतीय रेल कानून की धारा 143 के तहत दोषी ठहराया। सजा के तौर पर आरोपी मनीष गंगासिंह ठाकुर पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। अदालत ने आदेश दिया कि जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में आरोपी को एक महीने की साधारण कैद भुगतनी होगी। जमा की गई जुर्माने की राशि लोहमार्ग प्रशासन को नुकसान की भरपाई के तौर पर देने का निर्देश भी दिया गया। कोर्ट ने जब्त किए गए रेलवे टिकट और आरक्षण फॉर्म को मूल्यहीन एवं अनुपयोगी मानते हुए अपील की अवधि समाप्त होने के बाद नष्ट करने का आदेश दिया। साथ ही आरोपी को फैसले के खिलाफ अपील होने की स्थिति में छह महीने तक उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए सीआरपीसी की धारा 437-A के तहत 15 हजार रुपये का व्यक्तिगत जमानत मुचलका देने का निर्देश दिया।
