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AI-Cloud को लेकर RBI अलर्ट, बैंकों की बढ़ती निर्भरता पर चिंता
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों के बढ़ते AI, Cloud Computing और Technology Providers पर निर्भरता को लेकर चेतावनी दी है। RBI के डिप्टी गवर्नर ने कहा कि कुछ चुनिंदा टेक कंपनियों पर अत्यधिक निर्भरता से किसी तकनीकी गड़बड़ी, साइबर समस्या या सिस्टम फेलियर का असर एक साथ कई वित्तीय संस्थानों पर पड़ सकता है। RBI ने Speed, Concentration और Opacity को प्रमुख जोखिम बताते हुए Technology Governance, Human Oversight और Accountability मजबूत करने पर जोर दिया है।

मुंबई: भारतीय वित्तीय क्षेत्र में तेजी से बढ़ते डिजिटलाइजेशन, Artificial Intelligence (AI), Cloud Computing और दूसरी नई तकनीकों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक अहम चेतावनी दी है। RBI के डिप्टी गवर्नर रोहित जैन ने कहा कि बैंकों और वित्तीय संस्थानों का कुछ चुनिंदा Cloud, Technology और AI Model Providers पर बढ़ता निर्भरता वित्तीय सिस्टम के लिए नया जोखिम पैदा कर सकती है। रोहित जैन ने Global Fintech Fest 2026 में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल से जुड़े जोखिमों पर बात की। उन्होंने कहा कि तकनीक वित्तीय सेवाओं को तेज, सस्ता और ज्यादा सुविधाजनक बना सकती है, लेकिन इसके साथ कुछ ऐसे जोखिम भी हैं जो किसी एक संस्था तक सीमित नहीं रहेंगे।
तीन बड़े जोखिम—Speed, Concentration और Opacity
RBI डिप्टी गवर्नर ने तकनीक के वित्तीय क्षेत्र में गहराई से शामिल होने के साथ तीन प्रमुख चिंताओं की ओर इशारा किया Speed, Concentration और Opacity।
Speed यानी तेजी: AI और automated systems इंसानों की तुलना में बहुत तेजी से फैसले ले सकते हैं। ऐसे में किसी सिस्टम में छोटी गलती भी बहुत कम समय में बड़े स्तर पर असर डाल सकती है। इसलिए संस्थानों को सिर्फ गलतियों को रोकने पर नहीं, बल्कि गलती होने के बाद उसे जल्दी पहचानने, उसके प्रभाव को सीमित करने और समय पर हस्तक्षेप करने की क्षमता पर भी ध्यान देना होगा।
Concentration यानी कुछ कंपनियों पर ज्यादा निर्भरता: RBI की सबसे बड़ी चिंता यही है। अगर बड़ी संख्या में बैंक और वित्तीय संस्थान कुछ ही Cloud Providers, Technology Vendors या AI Model Providers की सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं, तो किसी एक Provider में तकनीकी खराबी, साइबर समस्या या दूसरी बड़ी दिक्कत का असर एक साथ कई वित्तीय संस्थानों पर पड़ सकता है। इससे किसी एक कंपनी की समस्या पूरे वित्तीय सिस्टम में फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
Opacity यानी सिस्टम के फैसलों को समझना मुश्किल होना: AI आधारित मॉडल कई बार ऐसे फैसले देते हैं जिनके पीछे की प्रक्रिया को सामान्य उपयोगकर्ता के लिए समझना मुश्किल होता है। RBI का कहना है कि किसी महत्वपूर्ण वित्तीय फैसले के मामले में सिर्फ यह कहना पर्याप्त नहीं है कि “मॉडल ने ऐसा कहा।” वित्तीय संस्थानों को अपने फैसलों की जिम्मेदारी बनाए रखनी होगी।
Technology Provider को जिम्मेदारी आउटसोर्स नहीं की जा सकती
रोहित जैन ने स्पष्ट किया कि बैंक अपनी Computing, Cloud Infrastructure या AI Models का कुछ हिस्सा बाहरी कंपनियों से ले सकते हैं, लेकिन इससे ग्राहक और वित्तीय जोखिम की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती। उनका जोर इस बात पर था कि अगर किसी तकनीकी सिस्टम के कारण ग्राहक प्रभावित होता है, तो जिम्मेदारी संबंधित वित्तीय संस्था की ही
रहेगी। यानी तकनीक का इस्तेमाल आउटसोर्स किया जा सकता है, लेकिन उसके परिणामों की जवाबदेही आउटसोर्स नहीं की जा सकती।
हर AI सिस्टम के लिए एक जैसा नियम नहीं
RBI की ओर से यह संकेत भी दिया गया कि तकनीक के इस्तेमाल के जोखिम के हिसाब से निगरानी और नियम तय होने चाहिए। उदाहरण के लिए किसी आंतरिक दस्तावेज का सारांश तैयार करने वाले AI Tool और किसी ग्राहक का Loan Approval करने वाले AI System को समान स्तर के जोखिम वाला नहीं माना जा सकता। अगर कोई तकनीक सीधे Credit, Payments या दूसरे महत्वपूर्ण वित्तीय फैसलों को प्रभावित करती है, तो उसके लिए ज्यादा मजबूत Governance, Validation, Human Oversight और Intervention Mechanism की जरूरत होगी।
Quantum Computing को लेकर भी चिंता
RBI ने भविष्य में Quantum Computing से जुड़े संभावित जोखिमों की ओर भी ध्यान दिलाया। खास चिंता मौजूदा Cryptographic Systems की सुरक्षा को लेकर है। RBI के अनुसार भविष्य की संभावित तकनीकी कमजोरी को उस समय तक टालना उचित नहीं होगा जब तक वह वास्तविक संकट में बदल जाए।
RBI खुद भी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बढ़ा रहा
दिलचस्प बात यह है कि RBI तकनीक के जोखिमों के साथ-साथ उसके इस्तेमाल को भी बढ़ावा दे रहा है। रोहित जैन ने DAKSH और PRAVAAH जैसे डिजिटल सिस्टम का उदाहरण दिया, जिनका इस्तेमाल नियामकीय और निगरानी प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने Digital Payments Intelligence Platform (DPIP) का भी उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य पेमेंट फ्रॉड से जुड़े जोखिमों को संस्थानों के बीच नेटवर्क स्तर पर समझना और जानकारी साझा करना है।
RBI का संदेश क्या है?
RBI का संदेश तकनीक के खिलाफ नहीं है। केंद्रीय बैंक चाहता है कि AI, Cloud, Tokenisation और दूसरी नई तकनीकों का इस्तेमाल वित्तीय सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए हो, लेकिन Innovation के साथ Accountability और Resilience भी मजबूत हो। वित्तीय क्षेत्र में तकनीक जितनी ज्यादा महत्वपूर्ण होती जाएगी, उतना ही जरूरी होगा कि बैंक अपने Technology Providers पर अत्यधिक निर्भर न हों, जोखिमों की निगरानी करें और महत्वपूर्ण फैसलों में जवाबदेही बनाए रखें। RBI की चिंता खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि एक ही Technology Provider पर कई संस्थानों की निर्भरता किसी तकनीकी समस्या को व्यापक वित्तीय जोखिम में बदल सकती है।
