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IRCTC होटल मनी लॉन्ड्रिंग केस में लालू परिवार पर PMLA के तहत आरोप तय l
दिल्ली की अदालत ने IRCTC होटल आवंटन से जुड़े लारा प्रोजेक्ट्स मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत 9 आरोपियों के खिलाफ PMLA के तहत आरोप तय करने का निर्देश दिया है। अदालत ने प्रथम दृष्टया अपराध से हुई कमाई यानी ‘Proceeds of Crime’ जनरेट किए जाने और पूर्व रेल मंत्री लालू यादव द्वारा पद के दुरुपयोग का पक्का संदेह जताया है। मामले में 7 आरोपियों को डिस्चार्ज किया गया है। आरोपियों को औपचारिक रूप से आरोप तय करने के लिए 3 अक्टूबर को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया गया है।

IRCTC होटल आवंटन घोटाले से जुड़े लारा प्रोजेक्ट्स मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली की अदालत ने लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव समेत कुल 9 आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप तय करने का निर्देश दिया है। अदालत के मुताबिक मामले में इस स्तर पर यह मानने का पक्का आधार है कि परिवार के सदस्यों से जुड़े नामों पर ‘Proceeds of Crime’ यानी अपराध से हुई कमाई जनरेट की गई। यह मामला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र में रेल मंत्री थे। आरोप है कि इस दौरान रेलवे के रांची और पुरी स्थित BNR होटलों के संचालन और रखरखाव का ठेका देने की प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की गई। CBI के आरोपों के मुताबिक, यह ठेका कथित तौर पर सुजाता होटल्स को दिया गया था।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि होटल का ठेका मिलने के बदले पटना में करोड़ों रुपये की जमीन बेहद कम कीमत पर लालू परिवार से जुड़ी कंपनी लारा प्रोजेक्ट्स के नाम ट्रांसफर की गई। इसी कथित लेन-देन को आधार बनाकर बाद में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने PMLA के तहत मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया। मुकदमे का सामना करने वाले 9 आरोपियों में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, प्रेम चंद गुप्ता, सरला गुप्ता, सुजाता होटल्स के निदेशक विनय कोचर और विजय कोचर के अलावा लारा प्रोजेक्ट्स और सुजाता होटल्स शामिल हैं।
वहीं, अदालत ने लालू के दामाद राहुल यादव समेत 7 आरोपियों को मामले से डिस्चार्ज कर दिया है। इनमें गौरव गुप्ता, नथ मल कानकारनिया, विजय त्रिपाठी, देवकी नंदन तुलस्यान, राजीव रेलन और अभिषेक फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। अदालत ने आरोप तय करने की प्रक्रिया के लिए आरोपियों को 3 अक्टूबर को पेश होने का निर्देश दिया है। अब मामले में आगे की न्यायिक कार्यवाही इसी आधार पर आगे बढ़ेगी। ध्यान रहे कि आरोप तय होना अदालत द्वारा दोष सिद्ध किया जाना नहीं है; मामले में आरोपियों को अपना पक्ष रखने और मुकदमे का सामना करने का पूरा अवसर मिलेगा।
