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POCSO में उम्र साबित नहीं हुई तो भी रेप की सजा संभव, Section 376 IPC का चार्ज न होने पर भी दोषसिद्धि कर सकता है कोर्ट: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पीड़िता की उम्र साबित न होने पर भी, रेप का अपराध अन्य साक्ष्यों से साबित हो तो आरोपी को IPC की धारा 376 के तहत दोषी ठहराया जा सकता है। इसके लिए धारा 376 का अलग चार्ज होना भी हर मामले में जरूरी नहीं है।

Sonali11 सित. 2026, 07:47 PM IST
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POCSO में उम्र साबित नहीं हुई तो भी रेप की सजा संभव, Section 376 IPC का चार्ज न होने पर भी दोषसिद्धि कर सकता है कोर्ट: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि POCSO Act के तहत नाबालिग होने की शर्त के कारण अभियोजन पीड़िता की उम्र साबित करने में विफल रहता है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि आरोपी रेप के आरोप से स्वतः बरी हो जाएगा। कोर्ट ने कहा कि यदि रेप का तथ्य अन्य साक्ष्यों से साबित है, तो आरोपी को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 के तहत दोषी ठहराया जा सकता है, भले ही ट्रायल कोर्ट ने इस धारा के तहत औपचारिक आरोप तय न किया हो। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने कहा कि POCSO Act की धारा 3 और IPC की धारा 376 में अपराध के मूल कृत्य यानी actus reus के स्तर पर समानता है। इसलिए यदि आरोपी को POCSO की धारा 3 के आरोप का बचाव करने का पूरा अवसर मिला है, तो केवल पीड़िता की नाबालिग उम्र साबित न होने के कारण रेप के लिए उसकी जिम्मेदारी समाप्त नहीं हो जाती।

पीड़िता की उम्र साबित करने में अभियोजन विफल

मामला मेघालय के ईस्ट जैंतिया हिल्स से जुड़ा है। वर्ष 2019 में पीड़िता की मां लाइनेह्सखेम सुतंगा ने शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया था कि आरोपी ने उनकी 13 वर्षीय बेटी के साथ बलात्कार किया। शिकायत के आधार पर POCSO Act की धारा 3 और 4 के तहत FIR दर्ज की गई। जांच के बाद आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई और मामला POCSO विशेष अदालत में पहुंचा। ट्रायल कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ IPC की धारा 506 और POCSO Act की धाराओं 3 और 4 के तहत आरोप तय किए। अभियोजन ने 14 गवाहों से पूछताछ की और 11 महत्वपूर्ण दस्तावेज/साक्ष्य पेश किए। इनमें पीड़िता की उम्र साबित करने के लिए Baptismal Certificate भी शामिल था। पीड़िता का बयान CrPC की धारा 164 के तहत भी दर्ज किया गया। ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को POCSO Act की धारा 4 के तहत दोषी ठहराते हुए 20 साल के कठोर कारावास और ₹5,000 जुर्माने की सजा सुनाई। IPC की धारा 506 के तहत भी दो साल के कठोर कारावास की सजा दी गई। मेघालय हाईकोर्ट ने भी दोषसिद्धि और सजा को बरकरार रखा।

सुप्रीम कोर्ट में उम्र को लेकर उठाया सवाल

आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट में मुख्य रूप से पीड़िता की उम्र साबित करने की प्रक्रिया को चुनौती दी। उसने P. Yuvaprakash v. State के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि POCSO में दोषसिद्धि के लिए किशोर न्याय अधिनियम की धारा 94 के अनुसार उम्र का निर्धारण जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील में दम माना और कहा कि अभियोजन पीड़िता की उम्र उस कानूनी तरीके से साबित करने में विफल रहा, जिसकी धारा 94 के तहत आवश्यकता थी। लेकिन कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उम्र साबित न होने का लाभ आरोपी को तब नहीं मिलेगा, जब रेप का तथ्य स्वतंत्र साक्ष्यों से स्पष्ट रूप से साबित हो चुका हो।

‘दोषी को बच निकलने देना पीड़िता के साथ न्याय नहीं’

पीठ ने कहा कि मेडिकल साक्ष्यों से रेप का तथ्य स्पष्ट रूप से स्थापित है और केवल पीड़िता की उम्र से संबंधित मेडिकल साक्ष्य के अभाव के आधार पर इस निष्कर्ष को खारिज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि “दोषी को बच निकलने देना रेप पीड़िता के साथ न्याय करना नहीं है।”

Section 376 IPC का चार्ज नहीं होने पर भी दोषसिद्धि

इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने IPC की धारा 376 के तहत कोई अलग आरोप तय नहीं किया था। इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल किसी विशेष अपराध का चार्ज फ्रेम न किया जाना हर स्थिति में दोषसिद्धि के रास्ते में बाधा नहीं बनता। कोर्ट ने CrPC की धारा 464 का उल्लेख करते हुए कहा कि अपीलीय या पुनरीक्षण अदालत किसी ऐसे अपराध के लिए भी आरोपी को दोषी ठहरा सकती है, जिसका औपचारिक आरोप तय नहीं किया गया हो, बशर्ते इससे वास्तविक रूप से न्याय का विफल होना न हुआ हो।

पीठ ने माना कि आरोपी को POCSO की धारा 3 के आरोप के खिलाफ अपना बचाव करने का पर्याप्त अवसर मिला था। इसलिए जब POCSO में नाबालिगता साबित नहीं हो सकी, लेकिन रेप का कृत्य साबित रहा, तो धारा 376 IPC के तहत दोषसिद्धि करने में कोई कानूनी बाधा नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने इस आधार पर मामले में लागू कानूनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि चार्ज में तकनीकी कमी या पीड़िता की उम्र साबित करने में विफलता को ऐसे मामले में आरोपी के लिए स्वतः बरी होने का आधार नहीं बनाया जा सकता, जहां रेप का अपराध विश्वसनीय साक्ष्यों से स्थापित हो चुका हो।