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Forest Land Rights पर सरकार सख्त, 5 राज्यों से मांगा गया Action Plan
बेंगलुरु: केंद्र सरकार ने Forest Rights Act, 2006 के क्रियान्वयन को लेकर आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना की समीक्षा की। देशभर में 54 लाख से ज्यादा Individual Forest Rights दावे प्राप्त हुए हैं, जिनमें करीब 25.42 लाख अधिकार-पत्र जारी किए जा चुके हैं। केंद्र ने लंबित दावों के समयबद्ध निपटारे, Community Forest Rights और PVTG Habitat Rights को बढ़ावा देने के साथ मान्यता प्राप्त वन अधिकारों को Land Records में दर्ज करने और रिकॉर्ड के Digitisation पर जोर दिया।

बेंगलुरु: जनजातीय मामलों के मंत्रालय ने 10 सितंबर को Forest Rights Act, 2006 के क्रियान्वयन को लेकर पांच दक्षिणी राज्यों की क्षेत्रीय समीक्षा बैठक की। बैठक में आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान वन अधिकारों से जुड़े लंबित दावों, Community Forest Rights और विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के Habitat Rights की स्थिति की समीक्षा की गई।
मंत्रालय के अनुसार, 30 जून 2026 तक देशभर में 54 लाख से अधिक Individual Forest Rights (IFR) दावे प्राप्त हुए हैं। इनमें करीब 25.42 लाख अधिकार-पत्र जारी किए जा चुके हैं, जो लगभग 238 लाख एकड़ भूमि से संबंधित हैं। वहीं 10 लाख से अधिक दावे अभी लंबित हैं। देश में अब तक 19,845 Community Forest Rights (CFR) को भी मान्यता दी जा चुकी है।
बैठक में केंद्र सरकार ने राज्यों से लंबित और खारिज किए गए दावों की दोबारा समीक्षा कर उन्हें तय समयसीमा में निपटाने को कहा। इसके साथ ही Community Forest Resource Rights (CFRR) और Particularly Vulnerable Tribal Groups (PVTGs) के Habitat Rights की पहचान और मान्यता की प्रक्रिया तेज करने पर भी जोर दिया गया। सरकार ने मान्यता प्राप्त वन अधिकारों को Land Records और Forest Records में दर्ज करने को भी प्राथमिकता देने की बात कही। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिन लोगों और समुदायों को वन अधिकार मिल चुके हैं, उनके अधिकार सरकारी रिकॉर्ड में भी स्पष्ट रूप से दर्ज रहें। इससे भूमि से जुड़े रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने और अधिकारों की सुरक्षा मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
वन अधिकारों से जुड़े रिकॉर्ड के Digitisation पर भी बैठक में चर्चा हुई। मंत्रालय राष्ट्रीय स्तर पर FRA Portal विकसित कर रहा है। राज्यों से अपने मौजूदा वन अधिकार रिकॉर्ड को डिजिटल सिस्टम से जोड़ने को कहा गया है, ताकि रिकॉर्ड की निगरानी और उपलब्धता को बेहतर बनाया जा सके। राज्यों की स्थिति की बात करें तो कर्नाटक में 2,95,176 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 16,700 Forest Rights Titles जारी किए जा चुके हैं। वहीं 15,553 दावे verification के स्तर पर हैं। तमिलनाडु में Phase-I के तहत जारी 15,838 Titles को digitise किया जा चुका है, जबकि Phase-II के 41,692 नए दावे verification में हैं।
आंध्र प्रदेश में 31 अगस्त 2026 तक 2,90,874 दावों के मुकाबले 2,27,300 Individual और 1,225 Community Titles जारी किए गए हैं। वहीं तेलंगाना में 6,55,249 दावों के मुकाबले 2,30,735 Individual और 102 Community Titles जारी किए गए हैं। केरल में 29,545 Individual और 286 Community Titles को मान्यता दी गई है। राज्य में 1,616 Individual और 108 Community claims अभी लंबित हैं। मंत्रालय के मुताबिक, इन मामलों में Survey और Verification जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं।
केंद्र ने पांचों राज्यों से State-specific roadmap और timelines तैयार करने को कहा है, ताकि लंबित दावों का तेजी से निपटारा किया जा सके। साथ ही Community Forest Resource Rights और PVTG Habitat Rights को मान्यता देने तथा मान्यता प्राप्त अधिकारों को सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज करने की प्रक्रिया को मजबूत करने पर जोर दिया गया। Forest Rights Act के तहत अनुसूचित जनजातियों और अन्य पारंपरिक वन निवासियों के वन भूमि से जुड़े अधिकारों को कानूनी मान्यता दी जाती है। ऐसे में लंबित दावों का निपटारा, सरकारी रिकॉर्ड में अधिकारों की एंट्री और रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण Forest Land और Revenue Records के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
