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अब एक Digital System में दिखेगा जमीन का पूरा रिकॉर्ड, केंद्र का बड़ा Land Reform
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने देश के Land Records को आधुनिक और डिजिटल बनाने के लिए Digital India Land Records Modernisation Programme (DILRMP) 3.0 की योजना शुरू की है। 2026 से 2031 तक चलने वाले इस कार्यक्रम के लिए ₹565.50 करोड़ का प्रावधान है। इसके तहत जमीन के नक्शे, स्वामित्व रिकॉर्ड, Property Registration और Court Cases को GIS आधारित ‘Land Stack’ से जोड़ा जाएगा। साथ ही Bhu-Aadhaar (ULPIN), डिजिटल मैपिंग, Revenue Courts और Urban Land Records को भी मजबूत करने पर फोकस रहेगा।

नई दिल्ली: देश में जमीन से जुड़े रिकॉर्ड को और ज्यादा पारदर्शी, सुरक्षित और डिजिटल बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने Digital India Land Records Modernisation Programme (DILRMP) 3.0 की शुरुआत की है। 2026 से 2031 तक चलने वाले इस पांच वर्षीय कार्यक्रम के लिए ₹565.50 करोड़ का अनुमानित वित्तीय प्रावधान रखा गया है। इसका उद्देश्य सिर्फ जमीन के पुराने रिकॉर्ड को ऑनलाइन करना नहीं, बल्कि Land Records, Property Maps, Registration और Court Cases को एक ही डिजिटल सिस्टम से जोड़ना है। DILRMP 3.0 को केंद्रीय क्षेत्र योजना के तौर पर लागू किया जाएगा और इसका विस्तार सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक होगा। सरकार का फोकस अब केवल रिकॉर्ड के कंप्यूटरीकरण से आगे बढ़कर एक व्यापक GIS-enabled ‘Land Stack’ तैयार करने पर है। इसमें जमीन के नक्शे, स्वामित्व की जानकारी, संपत्ति पंजीकरण और जमीन से जुड़े न्यायिक मामलों को एक-दूसरे से जोड़ा जाएगा।
एक डिजिटल सिस्टम में जुड़ेंगे Land Records
प्रस्तावित Land Stack को Digital Public Infrastructure के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसमें land ownership details, cadastral maps, property registration data, court cases और अन्य संबंधित जानकारी को एक इंटरऑपरेबल डिजिटल सिस्टम में जोड़ा जाएगा। इससे जमीन के किसी टुकड़े से जुड़ी अलग-अलग जानकारियों को एक ही जगह पर देखने और सत्यापित करने की व्यवस्था मजबूत हो सकती है। इस व्यवस्था में Bhu-Aadhaar यानी Unique Land Parcel Identification Number (ULPIN) की भी अहम भूमिका होगी। यह 14 अंकों का विशिष्ट नंबर जमीन के प्रत्येक पार्सल की पहचान के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। अगस्त 2026 तक देश में 40.58 करोड़ से ज्यादा land parcels को Bhu-Aadhaar/ULPIN दिया जा चुका था।
जमीन के नक्शों और रिकॉर्ड का होगा बेहतर मिलान
DILRMP 3.0 में जमीन के लिखित रिकॉर्ड और नक्शों को आपस में जोड़ने पर भी जोर है। अगस्त 2026 तक देश में 99.90 प्रतिशत Record of Rights (RoR) कंप्यूटरीकृत, 97.43 प्रतिशत cadastral maps digitise और 76.16 प्रतिशत land parcels georeference किए जा चुके थे। वहीं cadastral maps और Records of Rights के बीच 85.24 प्रतिशत spatial-textual integration हासिल किया जा चुका था। इसका मतलब है कि जमीन के कागजी विवरण और उसके डिजिटल नक्शे को आपस में जोड़कर रिकॉर्ड की सटीकता बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। इससे जमीन की पहचान, रिकॉर्ड की जांच और भूमि प्रशासन से जुड़ी सेवाओं को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिल सकती है।
Property Registration और Sub-Registrar Offices भी होंगे डिजिटल
DILRMP 3.0 के तहत जमीन की खरीद-बिक्री और पंजीकरण प्रक्रिया को भी डिजिटल इकोसिस्टम से जोड़ने की योजना है। देश में 98.96 प्रतिशत Sub-Registrar Offices (SROs) कंप्यूटरीकृत हो चुके हैं। 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में केंद्रीकृत NGDRS प्लेटफॉर्म अपनाया गया है, जबकि अन्य राज्यों में अपने डिजिटल Registration Software का इस्तेमाल किया जा रहा है। नई व्यवस्था का उद्देश्य Registration और Land Records के बीच बेहतर तालमेल बनाना है, ताकि किसी संपत्ति के स्वामित्व और पंजीकरण से जुड़ी जानकारी को ज्यादा आसानी से मिलान किया जा सके।
Land Disputes की जानकारी भी रिकॉर्ड से जुड़ेगी
जमीन से जुड़े विवादों को कम करने के लिए Revenue Courts को भी डिजिटल भूमि रिकॉर्ड प्रणाली से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। अगस्त 2026 तक 94.11 प्रतिशत Revenue Courts कंप्यूटरीकृत हो चुके थे। Revenue Court Case Management System (RCCMS) के जरिए जमीन से जुड़े मुकदमों की जानकारी को Property Records के साथ जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है। सरकार की योजना ऐसी डिजिटल व्यवस्था तैयार करने की है जिसमें किसी भूमि पार्सल से संबंधित स्वामित्व, नक्शा, पंजीकरण और मुकदमे जैसी महत्वपूर्ण जानकारी एक-दूसरे से जुड़ी हो। इससे भूमि प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ाने और लंबे समय से चल रहे भूमि विवादों के समाधान में मदद मिलने की उम्मीद है।
Tehsil और Revenue Offices में भी बदलाव
DILRMP 3.0 के तहत Tehsil-level record rooms के modernization, जमीन के रिकॉर्ड में Aadhaar seeding, मोबाइल नंबर और पते की जानकारी जोड़ने, Revenue Courts के computerisation और Core GIS तथा Land Stack Software के विकास जैसे काम शामिल हैं। इसके अलावा Sub-Registrar Offices को आधुनिक और नागरिक-केंद्रित बनाने की भी योजना है। सरकार का उद्देश्य है कि जमीन से जुड़ी सेवाओं के लिए नागरिकों को कम से कम दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ें और रिकॉर्ड की उपलब्धता तथा सत्यापन की प्रक्रिया अधिक आसान हो।
Urban Land Records पर भी फोकस
DILRMP 3.0 में शहरी क्षेत्रों के भूमि रिकॉर्ड को आधुनिक बनाने के लिए Urban Land Records Mapping के पायलट प्रोजेक्ट भी शामिल हैं। इसके तहत शहरों में जमीन की मैपिंग, स्वामित्व और अन्य संबंधित जानकारी को डिजिटल सिस्टम से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। कुल मिलाकर, ₹565.50 करोड़ का DILRMP 3.0 भारत के Land Records को केवल digitise करने की योजना नहीं है, बल्कि जमीन के नक्शे, स्वामित्व, Registration और Court Records को एक integrated digital framework में लाने की कोशिश है। अगर यह व्यवस्था राज्यों में प्रभावी तरीके से लागू होती है, तो जमीन से जुड़े रिकॉर्ड की पारदर्शिता, सत्यापन और नागरिक सेवाओं में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
