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CM विजय की नवजात शिशुओं को सोने की अंगूठी योजना पर मद्रास HC का बड़ा फैसला, जॉयअलुक्कास को टेंडर देने के खिलाफ PIL खारिज

तमिलनाडु की नवजात शिशुओं को सोने की अंगूठी देने वाली ‘थाईमामन थंगा मोथिरम थित्तम’ योजना को लेकर मद्रास हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। जॉयअलुक्कास को टेंडर दिए जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया। याचिका में कंपनी की बोली स्वीकार करने और उसे ठेका देने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए थे।

Sonali11 सित. 2026, 07:47 PM IST
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CM विजय की नवजात शिशुओं को सोने की अंगूठी योजना पर मद्रास HC का बड़ा फैसला, जॉयअलुक्कास को टेंडर देने के खिलाफ PIL खारिज

तमिलनाडु सरकार की ‘थाईमामन थंगा मोथिरम थित्तम’ योजना के तहत जॉयअलुक्कास को टेंडर दिए जाने को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को मद्रास हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। याचिका में जॉयअलुक्कास की बोली स्वीकार किए जाने और कंपनी को योजना के लिए ठेका दिए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए थे। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद टेंडर को चुनौती देने वाली PIL पर कार्यवाही समाप्त हो गई है। मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार की ओर से शुरू की गई ‘थाईमामन थंगा मोथिरम थित्तम’ योजना को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। यह योजना राज्य में नवजात शिशुओं को 22 कैरेट शुद्धता वाली 1 ग्राम सोने की अंगूठी उपलब्ध कराने से जुड़ी है। योजना के लिए सरकार ने टेंडर प्रक्रिया अपनाई थी और इस प्रक्रिया में जॉयअलुक्कास की बोली को स्वीकार करते हुए कंपनी को ठेका दिया गया था।

 याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का रुख करते हुए जॉयअलुक्कास की बोली को स्वीकार किए जाने और कंपनी को टेंडर दिए जाने पर आपत्ति जताई थी। याचिका में टेंडर प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठाते हुए अदालत से हस्तक्षेप की मांग की गई थी। हालांकि, सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने इस चुनौती को स्वीकार नहीं किया और जनहित याचिका को खारिज कर दिया। ‘थाईमामन थंगा मोथिरम थित्तम’ तमिलनाडु सरकार की एक ऐसी योजना है, जिसके तहत नवजात बच्चों को 22 कैरेट सोने की 1 ग्राम अंगूठी देने का प्रावधान किया गया है। योजना का उद्देश्य नवजात शिशुओं के लिए इस तरह का लाभ उपलब्ध कराना है। इसी योजना के लिए आवश्यक सोने की अंगूठियों की आपूर्ति को लेकर सरकार ने टेंडर प्रक्रिया शुरू की थी।


मामले में विवाद मुख्य रूप से इस बात से जुड़ा था कि जॉयअलुक्कास की बोली को किस तरह स्वीकार किया गया और कंपनी को योजना के लिए टेंडर किस प्रक्रिया के तहत दिया गया। याचिकाकर्ता ने इस प्रक्रिया को अदालत के समक्ष चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने मामले पर विचार करने के बाद PIL को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट के फैसले का सीधा मतलब यह है कि जॉयअलुक्कास को टेंडर दिए जाने के खिलाफ दाखिल इस जनहित याचिका में अदालत ने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। हालांकि, इसे योजना के हर पहलू पर अदालत की ओर से व्यापक टिप्पणी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अदालत ने विशेष रूप से टेंडर दिए जाने को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज किया है। यह मामला राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह तमिलनाडु सरकार की नवजात शिशुओं से जुड़ी एक प्रमुख योजना से संबंधित है। योजना के तहत 22 कैरेट सोने की 1 ग्राम अंगूठी दिए जाने के प्रावधान के कारण इसकी टेंडर प्रक्रिया पर सार्वजनिक और राजनीतिक स्तर पर भी नजर रही है।

मद्रास हाईकोर्ट का यह फैसला 11 सितंबर 2026 को आया।  अदालत के फैसले के बाद जॉयअलुक्कास को टेंडर दिए जाने के खिलाफ दायर PIL फिलहाल खारिज हो गई है और टेंडर प्रक्रिया को लेकर याचिकाकर्ता की चुनौती अदालत से राहत हासिल नहीं कर सकी।