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दिल्ली में दुनिया के दिग्गज नेताओं का जमावड़ा, BRICS Summit पर सबकी नजर

नई दिल्ली: 12 और 13 सितंबर को होने वाले 18वें BRICS Leaders’ Summit से पहले राजधानी दिल्ली में दुनिया के कई बड़े नेताओं और प्रतिनिधिमंडलों का जमावड़ा शुरू हो गया है। भारत मंडपम में होने वाले सम्मेलन में सदस्य देशों के नेता वैश्विक सुरक्षा, व्यापार, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा, Technology और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कई द्विपक्षीय बैठकों पर भी नजर रहेगी। रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के तनाव के बीच इस BRICS Summit को वैश्विक कूटनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

Neha Sharma11 सित. 2026, 07:47 PM IST
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दिल्ली में दुनिया के दिग्गज नेताओं का जमावड़ा, BRICS Summit पर सबकी नजर

नई दिल्ली: 18वें BRICS Leaders’ Summit से पहले राजधानी दिल्ली में दुनिया के कई बड़े नेताओं और प्रतिनिधियों का जमावड़ा शुरू हो गया है। भारत 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। इस बार सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब दुनिया में पश्चिम एशिया का तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध, व्यापारिक दबाव और वैश्विक सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दिल्ली पहुंच चुके हैं। उनके अलावा चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो समेत कई देशों के शीर्ष नेताओं के सम्मेलन में शामिल होने की उम्मीद है।


मोदी-पुतिन और मोदी-शी मुलाकात पर नजर

BRICS Summit के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कई द्विपक्षीय बैठकें भी अहम रहेंगी। खास तौर पर मोदी और पुतिन के बीच बातचीत पर नजर रहेगी। वहीं, मोदी और शी जिनपिंग की प्रस्तावित मुलाकात को भारत-चीन संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच सीमा, व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग से जुड़े मुद्दे बातचीत का हिस्सा बन सकते हैं।


ईरान के राष्ट्रपति का भारत दौरा भी अहम

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की भारत यात्रा भी इस सम्मेलन को अलग महत्व दे रही है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत और ईरान के बीच क्षेत्रीय स्थिति, ऊर्जा सुरक्षा और द्विपक्षीय सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा की संभावना है। पेजेशकियन की प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक भी प्रस्तावित है।


11 सदस्य देशों का बड़ा मंच

BRICS अब शुरुआती पांच देशों—ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका—तक सीमित नहीं है। मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया के जुड़ने के बाद समूह में 11 सदस्य देश हैं। इसके अलावा कई Partner Countries भी BRICS के साथ जुड़ी हैं। भारतीय सरकारी जानकारी के अनुसार सदस्य देश मिलकर दुनिया की करीब 49.5 प्रतिशत आबादी, लगभग 40 प्रतिशत वैश्विक GDP और करीब 26 प्रतिशत वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करते हैं।


खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा से लेकर Technology तक चर्चा

नई दिल्ली में होने वाले सम्मेलन में खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सहयोग, स्वास्थ्य, आपदा जोखिम कम करने, व्यापार, निवेश, Technology और महत्वपूर्ण Supply Chains जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। भारत ने इस साल BRICS की अध्यक्षता के लिए “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” थीम रखी है, जिसका जोर लोगों को केंद्र में रखकर वैश्विक सहयोग बढ़ाने पर है। भारत की अध्यक्षता के दौरान देश के 25 से ज्यादा शहरों में 350 से अधिक बैठकें और उच्चस्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। इनका फोकस राजनीतिक एवं सुरक्षा सहयोग, आर्थिक एवं वित्तीय सहयोग तथा सांस्कृतिक और People-to-People संपर्क पर रहा है।


दिल्ली में सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था कड़ी

इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई है। VVIP मूवमेंट, विदेशी प्रतिनिधिमंडलों और विभिन्न कार्यक्रमों के कारण राजधानी के कई हिस्सों में ट्रैफिक और आवाजाही पर असर पड़ सकता है। केंद्र सरकार ने 11 सितंबर को दिल्ली और नई दिल्ली स्थित केंद्रीय सरकारी कार्यालयों को बंद रखने का फैसला भी किया है, ताकि आयोजन के दौरान व्यवस्थाओं को सुचारु रखा जा सके।


दुनिया की नजर नई दिल्ली पर

इस बार BRICS Summit सिर्फ आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं रहने वाला है। पश्चिम एशिया में तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध, वैश्विक व्यापार और बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच सदस्य देशों के बीच सहमति बनाना बड़ी चुनौती होगी। खासतौर पर ईरान, रूस, चीन और भारत के अलग-अलग रणनीतिक हितों के बीच साझा रुख तैयार करना सम्मेलन की अहम परीक्षा माना जा रहा है। भारत के लिए यह सम्मेलन अपनी BRICS अध्यक्षता के दौरान वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने और व्यापार, Technology, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा तथा टिकाऊ विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने का बड़ा अवसर है। 12-13 सितंबर को होने वाली बैठकों के बाद जारी होने वाला New Delhi Declaration यह संकेत देगा कि विस्तारित BRICS समूह वैश्विक मुद्दों पर कितनी साझा सहमति बना पाता है।