law-order
कुणाल कामरा की Sahyog Portal और IT Rules के खिलाफ याचिका पर बॉम्बे HC का बड़ा कदम, Sine Die किया मामला
कॉमेडियन कुणाल कामरा और वरिष्ठ अधिवक्ता हरेश जगतियानी को ‘Sahyog Portal’ और IT Rules में 2025 के संशोधन को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फिलहाल राहत नहीं मिली है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने दोनों याचिकाओं को Sine Die यानी अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया। अदालत ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने इसी मुद्दे पर बॉम्बे और कर्नाटक हाईकोर्ट में चल रही कार्यवाही पर हाल ही में रोक लगा दी

मुंबई।
कॉमेडियन कुणाल कामरा और वरिष्ठ अधिवक्ता हरेश जगतियानी की ओर से Information Technology (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules, 2021 के Rule 3(1)(d) में 2025 में किए गए संशोधन और ‘Sahyog Portal’ की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने फिलहाल सुनवाई रोक दी है। हाईकोर्ट ने दोनों याचिकाओं को Sine Die यानी अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया। चीफ जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत सेठना की डिवीजन बेंच ने शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 को मामले की सुनवाई की। पीठ ने ध्यान दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में इसी मुद्दे से संबंधित बॉम्बे और कर्नाटक हाईकोर्ट में लंबित कार्यवाही पर रोक लगा दी है। इसी वजह से बॉम्बे हाईकोर्ट ने मामले को Sine Die स्थगित करने का फैसला किया।
कुणाल कामरा ने क्या चुनौती दी?
कुणाल कामरा ने अपनी याचिका में सोशल मीडिया इंटरमीडियरी पर पोस्ट किए गए कंटेंट को ब्लॉक करने में सक्षम बनाने वाले कुछ प्रावधानों को चुनौती दी है। उनका मुख्य तर्क है कि संबंधित व्यवस्था Information Technology Act, 2000 की धारा 69A के तहत निर्धारित प्रक्रिया और सुरक्षा उपायों को दरकिनार करते हुए ऑनलाइन कंटेंट को ब्लॉक करने के लिए एक समानांतर व्यवस्था तैयार करती है। कामरा की ओर से दलील दी गई कि Sahyog Portal के जरिए किसी यूजर को पहले नोटिस दिए बिना ऑनलाइन कंटेंट को हटाने या ब्लॉक करने की कार्रवाई की जा सकती है। उनके अनुसार, ऐसी व्यवस्था प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और संविधान के तहत मिले अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार पर गंभीर प्रभाव डालती है। याचिका में Rule 3(1)(d) और Sahyog Portal को IT Act के विपरीत बताया गया है। कामरा ने सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसले Shreya Singhal v. Union of India का भी हवाला दिया है। इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और इंटरनेट कंटेंट को नियंत्रित करने से संबंधित महत्वपूर्ण सिद्धांत तय किए थे।
‘समानांतर कंटेंट ब्लॉकिंग व्यवस्था’ का आरोप
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि Sahyog Portal को IT Act की धारा 79(3)(b) से कानूनी आधार नहीं मिल सकता। उनका कहना है कि कंटेंट ब्लॉकिंग के लिए कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन जरूरी है और किसी वैकल्पिक प्रशासनिक व्यवस्था के जरिए उस प्रक्रिया को कमजोर नहीं किया जा सकता। वहीं, इस विवाद में कर्नाटक हाईकोर्ट ने X Corp की चुनौती पर Sahyog Portal के संबंध में अलग दृष्टिकोण अपनाया था। कर्नाटक हाईकोर्ट ने माना था कि Sahyog Portal सेंसरशिप का साधन नहीं है, बल्कि सोशल मीडिया इंटरमीडियरी और सरकारी एजेंसियों के बीच सहयोग सुनिश्चित करने की व्यवस्था है।
अब सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही अहम
बॉम्बे हाईकोर्ट के समक्ष मामला ऐसे समय आया जब सुप्रीम कोर्ट ने इसी विवाद से जुड़े बॉम्बे और कर्नाटक हाईकोर्ट के मामलों की कार्यवाही पर रोक लगा दी है। इसलिए अब संबंधित कानूनी सवालों पर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल बॉम्बे हाईकोर्ट ने कुणाल कामरा और हरेश जगतियानी की याचिकाओं को Sine Die स्थगित कर दिया है। इसका अर्थ यह है कि मामले को किसी निश्चित अगली तारीख पर स्थगित करने के बजाय फिलहाल अनिश्चित अवधि के लिए आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही और उसके निर्देशों के बाद ही इस मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
