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सहारनपुर मस्जिद विध्वंस मामले में HC सख्त, ₹6.41 करोड़ की वसूली पर रोक; यूपी सरकार से 3 हफ्ते में मांगा जवाब

सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने ₹6.41 करोड़ के हर्जाने की वसूली पर रोक लगाते हुए अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को तय की है।

Sonali12 सित. 2026, 06:00 PM IST
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सहारनपुर मस्जिद विध्वंस मामले में HC सख्त, ₹6.41 करोड़ की वसूली पर रोक; यूपी सरकार से 3 हफ्ते में मांगा जवाब


सहारनपुर में मस्जिद की बेदखली और ध्वस्तीकरण से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है। जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की पीठ ने सिटी मजिस्ट्रेट, सहारनपुर की ओर से लगाए गए ₹6,41,65,500 के हर्जाने की वसूली पर फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत ने राज्य सरकार को तीन सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर 2026 को होगी। यह याचिका मोहम्मद तनवीर अहमद ने दाखिल की है। याचिकाकर्ता ने मस्जिद से संबंधित जमीन को लेकर सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम, 1971 की धारा 5 के तहत शुरू की गई कार्यवाही को चुनौती दी है। याचिकाकर्ता का कहना है कि उसने सिटी मजिस्ट्रेट के समक्ष लिखित बयान दाखिल कर जमीन पर किए गए दावे का विरोध किया था। उसका दावा है कि विवादित जमीन पर मस्जिद 100 साल से भी अधिक समय से मौजूद है। सिटी मजिस्ट्रेट, सहारनपुर ने 16 जुलाई 2026 को बेदखली का आदेश पारित किया था। इसी आदेश में ₹6,41,65,500 की क्षतिपूर्ति राशि भी निर्धारित की गई थी। इस आदेश के खिलाफ याचिकाकर्ता ने जिला जज, सहारनपुर के समक्ष अपील दायर की, लेकिन 2 सितंबर 2026 को अपील खारिज कर दी गई। इसके बाद याचिकाकर्ता ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया।


हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आशीष कुमार सिंह ने दलील दी कि राज्य प्रशासन ने मस्जिद को हटाने और ध्वस्त करने में जल्दबाजी की। उन्होंने अदालत को बताया कि बेदखली का आदेश पारित होने के महज तीन दिन के भीतर मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया। याचिकाकर्ता की ओर से यह भी दावा किया गया कि जमीन के मूल मालिक याकूब खान और वाहिद खान थे और विवादित भूमि का इस्तेमाल मस्जिद के उपयोगकर्ताओं द्वारा वक्फ के तौर पर किया जा रहा था। उनका कहना था कि निचली अदालतों ने इन तथ्यों और उनके द्वारा पेश किए गए पक्ष पर उचित तरीके से विचार नहीं किया। दूसरी ओर, राज्य सरकार ने याचिका में किए गए दावों का विरोध किया। अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने अदालत को बताया कि संबंधित संपत्ति राजस्व रिकॉर्ड में ‘कचहरी/कलेक्ट्रेट’ के रूप में दर्ज है। राज्य की ओर से याचिकाकर्ता के जमीन पर अधिकार और उसके वक्फ होने के दावे पर भी आपत्ति जताई गई। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने फिलहाल मामले के अंतिम गुण-दोष पर कोई निष्कर्ष नहीं दिया। हालांकि, अदालत ने ₹6.41 करोड़ से अधिक की क्षतिपूर्ति राशि की वसूली पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने राज्य को तीन सप्ताह का समय दिया है, जबकि याचिकाकर्ता को राज्य के जवाब के बाद अपना प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए एक सप्ताह मिलेगा। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है। उस सुनवाई में राज्य सरकार का जवाब और विवादित जमीन से जुड़े रिकॉर्ड मामले की आगे की दिशा तय करने में अहम हो सकते हैं।