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“12 दिन की शराबबंदी तर्कहीन!” बॉम्बे HC ने महाराष्ट्र सरकार को लगाई फटकार, कहा- शराब पीने वाला हर शख्स कानून-व्यवस्था नहीं बिगाड़ेगा

गणेश चतुर्थी के दौरान पुणे में 12 दिनों तक शराब की बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार के फैसले पर कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि केवल शराब पीने से यह नहीं माना जा सकता कि कोई व्यक्ति कानून-व्यवस्था बिगाड़ेगा। अदालत ने इतने लंबे ‘ब्लैंकेट बैन’ को तर्कहीन बताते हुए सरकार से जवाब मांगा।

Sonali12 सित. 2026, 06:00 PM IST
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“12 दिन की शराबबंदी तर्कहीन!” बॉम्बे HC ने महाराष्ट्र सरकार को लगाई फटकार, कहा- शराब पीने वाला हर शख्स कानून-व्यवस्था नहीं बिगाड़ेगा


बॉम्बे हाईकोर्ट ने गणेश चतुर्थी के दौरान महाराष्ट्र, खासकर पुणे जिले में शराब की बिक्री पर 12 दिनों के व्यापक प्रतिबंध को लेकर राज्य सरकार के फैसले को “तर्कहीन” बताया। अदालत ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन हर शराब पीने वाले व्यक्ति को संभावित कानून-व्यवस्था की समस्या मानकर इतने लंबे समय का ब्लैंकेट बैन नहीं लगाया जा सकता। यह मामला चीफ जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत सेठना की खंडपीठ के सामने आया। नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ओर से दायर याचिका में पुणे में गणेश उत्सव के दौरान शराब की बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंध को चुनौती दी गई थी। मामले का शीर्षक National Restaurant Association of India vs Collector of Pune है। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि अदालत ऐसे व्यापक प्रतिबंध लगाने की व्यवस्था को स्वीकार नहीं करती। कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि सरकार का उद्देश्य भले ही त्योहार के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना हो, लेकिन यह मान लेना सही नहीं है कि शराब पीने वाला हर व्यक्ति कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा करेगा।


अदालत ने शराब पर 12 दिन की रोक के संभावित स्वास्थ्य प्रभावों पर भी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि नियमित या शराब के आदी लोगों को अचानक शराब उपलब्ध न होने से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं और इससे अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ सकती है। चीफ जस्टिस ने कहा कि बिना किसी तर्कसंगत आधार के इस तरह के व्यापक प्रतिबंध की अनुमति नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि 12 दिनों का प्रतिबंध पूरे महाराष्ट्र में नहीं, बल्कि विशेष रूप से पुणे जिले में क्यों लगाया गया। पीठ ने कहा कि वह इस तरह के आदेश को गंभीरता से स्वीकार नहीं करती और राज्य सरकार से उचित निर्देश लेकर आने को कहा। अदालत ने संकेत दिया कि ऐसा नहीं होने पर वह उचित आदेश पारित कर सकती है। हालांकि, हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि शराब पीकर कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वालों को छूट मिलेगी। अदालत ने कहा कि कोई व्यक्ति शराब के नशे में हो या बिना शराब के, यदि वह कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा करता है तो उसे कानून के मुताबिक कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। बाद में इसी दिन बॉम्बे हाईकोर्ट की फटकार के बाद पुणे कलेक्टर ने 12 दिन का शराब बिक्री और सेवन प्रतिबंध वापस ले लिया। नए आदेश के तहत 14 सितंबर यानी गणेश उत्सव के पहले दिन और 25 सितंबर यानी गणेश विसर्जन के दिन ड्राई डे रखने का फैसला किया गया।