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Ultra-Processed Foods पर सुप्रीम कोर्ट सख्त! पैकेज्ड फूड के साथ एक ही चेतावनी लेबल क्यों? FSSAI से पूछे 13 सवाल

Ultra-Processed Foods को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI से 13 अहम सवाल पूछे हैं। कोर्ट ने पूछा कि अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों को कम प्रोसेस्ड पैकेज्ड फूड के साथ एक ही चेतावनी लेबल व्यवस्था में क्यों रखा जा रहा है और क्या दोनों के पोषण संबंधी अंतर को ध्यान में रखा गया है।

Sonali12 सित. 2026, 06:01 PM IST
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Ultra-Processed Foods पर सुप्रीम कोर्ट सख्त! पैकेज्ड फूड के साथ एक ही चेतावनी लेबल क्यों? FSSAI से पूछे 13 सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने Ultra-Processed Foods (UPFs) को लेकर Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) की प्रस्तावित Front-of-Pack Labelling (FoPL) व्यवस्था पर कई अहम सवाल उठाए हैं। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने FSSAI से 13 विशिष्ट सवालों पर जवाब मांगा है। कोर्ट ने खास तौर पर पूछा कि अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों को कम प्रोसेस्ड पैकेज्ड फूड के साथ एक ही चेतावनी लेबल व्यवस्था में रखना कितना उचित है।

Food Group B और C में अंतर क्यों नहीं?

सुप्रीम कोर्ट ने 2024 की ICMR-NIN Dietary Guidelines for Indians में खाद्य पदार्थों के वर्गीकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें खाद्य पदार्थों को प्रोसेसिंग के स्तर के आधार पर अलग-अलग समूहों में बांटा गया है। Group A में न्यूनतम प्रोसेसिंग वाले और बिना एडिटिव वाले खाद्य पदार्थ, Group B में मध्यम रूप से प्रोसेस्ड लेकिन बिना एडिटिव वाले खाद्य पदार्थ और Group C में अत्यधिक प्रोसेस्ड तथा एडिटिव वाले खाद्य पदार्थ शामिल हैं। कोर्ट ने सवाल उठाया कि यदि सभी पैकेज्ड फूड पर पोषक तत्वों के लिए समान सीमा लागू की जाती है, तो इन अलग-अलग श्रेणियों के बीच मौजूद पोषण संबंधी अंतर नजरअंदाज हो सकता है। पीठ ने सुझाव दिया कि संभव है कि पहले Category 3 यानी अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों को चेतावनी व्यवस्था में शामिल किया जाए और बाद में Category 2 को शामिल किया जाए।

चीनी और फैट की गणना पर भी सवाल

कोर्ट ने FSSAI से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि प्रस्तावित चेतावनी लेबल में चीनी और फैट की सीमा तय करने के लिए Total Sugar और Saturated Fat का इस्तेमाल किया जाएगा या कोई अलग तरीका अपनाया गया है। पीठ ने 29 अक्टूबर 2021 की stakeholder consultation का भी उल्लेख किया, जिसमें FoPL के लिए Added Sugar के बजाय Total Sugar को आधार बनाने पर सहमति बनी थी। कोर्ट ने पूछा कि यदि FSSAI ने अब अपना रुख बदला है तो ऐसा क्यों किया गया और पहले उठाई गई स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं का समाधान किस तरह किया जाएगा।

FSSAI की प्रस्तावित व्यवस्था क्या है?

FSSAI ने पैकेज्ड खाद्य पदार्थों के सामने लाल रंग के षट्भुज यानी hexagonal warning label का प्रस्ताव रखा है। इसमें “High Fat”, “High Sugar”, “High Salt” और “Highly Sweetened Beverage” जैसे चेतावनी संदेश शामिल होंगे। प्रस्तावित व्यवस्था को दो चरणों में लागू करने की बात कही गई है। पहले चरण में दो या उससे अधिक संबंधित पोषक तत्वों की निर्धारित सीमा से अधिक मात्रा वाले उत्पादों और कुछ मीठे पेय पदार्थों को चेतावनी दी जाएगी। दूसरे चरण में किसी एक पोषक तत्व की सीमा पार करने पर भी चेतावनी लागू करने का प्रस्ताव है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह सवाल भी उठाया कि पहले चरण में चेतावनी के लिए दो या उससे अधिक पोषक तत्वों की शर्त का वैज्ञानिक आधार क्या है। कोर्ट ने यह भी कहा कि Phase I और Phase II के बीच स्पष्ट और वैज्ञानिक रूप से उचित समयसीमा होनी चाहिए।

लाल रंग और चेतावनी चिन्ह के डिजाइन पर भी सवाल

पीठ ने प्रस्तावित लाल hexagonal warning label के आकार, स्थान और फॉन्ट को लेकर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने पूछा कि क्या चेतावनी चिन्ह का आकार सभी पैकेज के लिए समान होगा या पैकेज के सामने वाले हिस्से के आकार के अनुपात में तय किया जाएगा। कोर्ट ने यह भी पूछा कि अलग-अलग पोषक तत्वों के लिए अलग-अलग चेतावनी चिन्ह क्यों नहीं लगाए जा सकते। उदाहरण के लिए, यदि किसी उत्पाद में चीनी और फैट दोनों की मात्रा अधिक है, तो दोनों चेतावनियों को एक ही hexagon में रखने के बजाय अलग-अलग संकेतों के जरिए दिखाने पर उपभोक्ताओं को जोखिम समझने में अधिक आसानी हो सकती है। लाल रंग को लेकर भी कोर्ट ने संभावित भ्रम की ओर इशारा किया। पीठ ने पूछा कि भारत में लाल रंग को गैर-शाकाहारी खाद्य पदार्थों से जोड़कर देखे जाने के कारण क्या warning label के लिए किसी अन्य रंग पर विचार किया जाना चाहिए।

एडिटिव बढ़ने की आशंका पर भी कोर्ट की नजर

सुप्रीम कोर्ट ने एक संभावित समस्या की ओर भी ध्यान दिलाया। यदि निर्माता चीनी, नमक या फैट की मात्रा कम करने की कोशिश करते हैं, तो वे स्वाद, बनावट या शेल्फ लाइफ बनाए रखने के लिए कृत्रिम preservatives, emulsifiers और अन्य additives का इस्तेमाल बढ़ा सकते हैं। कोर्ट ने FSSAI से पूछा कि FoPL व्यवस्था तैयार करते समय इस संभावित प्रभाव को ध्यान में रखा गया है या नहीं और ऐसे additives के नियमन के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।

स्कूलों में पोषण संबंधी जागरूकता पर भी सवाल

पीठ ने केंद्र से यह भी पूछा कि बच्चों को पोषण संबंधी जानकारी और पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर दिए जाने वाले warning labels समझाने के लिए स्कूल स्तर पर क्या कदम उठाए जाएंगे। कोर्ट ने पाठ्यक्रम, जागरूकता कार्यक्रम और कार्यशालाओं के जरिए nutritional literacy बढ़ाने की आवश्यकता पर सवाल किया।

सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI को इन सवालों के जवाब वाला हलफनामा 10 दिनों के भीतर दाखिल करने का निर्देश दिया है। याचिकाकर्ताओं को जवाब पर प्रतिक्रिया देने का अवसर मिलेगा। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है। मामला 3S and Our Health Society बनाम Union of India से संबंधित है।