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बिजली बिल के 2 साल से पुराने बकाये की वसूली पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, लगातार ‘Arrear’ दिखाया हो तभी होगी रिकवरी

बिजली के पुराने बकाये की वसूली पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि दो साल से पुराने बिजली बकाये की वसूली तभी की जा सकती है, जब उसे लगातार ‘Arrear’ के रूप में रिकॉर्ड में दर्शाया गया हो। कोर्ट ने करीब 57.74 लाख रुपये के पुराने बकाये की वसूली की मांग को खारिज कर दिया।

Sonali12 सित. 2026, 06:01 PM IST
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बिजली बिल के 2 साल से पुराने बकाये की वसूली पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, लगातार ‘Arrear’ दिखाया हो तभी होगी रिकवरी

सुप्रीम कोर्ट ने बिजली बिल के पुराने बकाये की वसूली को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि सामान्य स्थिति में बिजली की खपत के दो साल के भीतर बिल जारी किया जाना चाहिए। यदि दो साल से अधिक पुरानी राशि की वसूली की जानी है, तो उस राशि को लगातार ‘Arrear’ यानी बकाये के रूप में दर्ज और दर्शाया जाना जरूरी है। जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने उत्तर प्रदेश की बिजली वितरण कंपनी दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (DVVNL) की अपील खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। कंपनी करीब 57.74 लाख रुपये के Minimum Consumption Guarantee Charges (MCGC) की वसूली करना चाहती थी।

1998 के बकाये की वसूली का था मामला

मामला फरवरी 1998 से सितंबर 1998 के बीच की अवधि से जुड़ा था। बिजली वितरण कंपनी ने उपभोक्ता को अतिरिक्त 2000 KVA लोड की सुविधा देने का प्रस्ताव रखा था और इसी आधार पर Minimum Consumption Guarantee Charges के रूप में 57,74,164 रुपये की मांग की गई थी। हालांकि, विवादित अतिरिक्त 2000 KVA लोड की सुविधा का उपभोक्ता ने वास्तव में इस्तेमाल ही नहीं किया था। इसके बावजूद बिजली कंपनी ने वर्षों बाद उक्त राशि की वसूली का दावा किया। मामला पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा था। हाईकोर्ट ने बिजली कंपनी की रिट याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने पाया था कि अतिरिक्त 2000 KVA लोड सुविधा का वास्तविक उपयोग उपभोक्ता ने नहीं किया और जिस राशि की मांग की जा रही थी, उसे लगातार बकाये के रूप में भी नहीं दिखाया गया था।

दो साल से पुराने बकाये पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए कहा कि बिजली कानून के तहत किसी उपभोक्ता से दो साल से अधिक पुरानी राशि की वसूली के लिए यह देखना जरूरी है कि वह राशि लगातार recoverable arrear के तौर पर दर्ज रही या नहीं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि महज पुरानी राशि होने के आधार पर वर्षों बाद अचानक उसकी मांग नहीं की जा सकती। यदि कोई बकाया दो साल की अवधि के बाद भी वसूल किया जाना है, तो उसे संबंधित बिलों और रिकॉर्ड में लगातार बकाये के रूप में दिखाया जाना चाहिए। पीठ ने इसी आधार पर बिजली वितरण कंपनी द्वारा 1998 की राशि की वसूली के प्रयास को स्वीकार नहीं किया।

बिजली कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण फैसला

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला बिजली वितरण कंपनियों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। फैसले से यह सिद्धांत स्पष्ट होता है कि पुराने बिजली बकाये की वसूली के लिए केवल यह दावा पर्याप्त नहीं है कि राशि पहले की अवधि से संबंधित है। बिजली कंपनी को यह भी दिखाना होगा कि संबंधित बकाया लगातार रिकॉर्ड में recoverable arrear के रूप में दर्ज था। सुप्रीम कोर्ट ने अंततः दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड की अपील खारिज कर दी और इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें कंपनी की मांग को स्वीकार नहीं किया गया था। यह फैसला उन मामलों में विशेष महत्व रखता है जहां बिजली वितरण कंपनियां कई वर्षों पुराने बकाये की अचानक वसूली की मांग करती हैं।