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लखनऊ जिला कोर्ट के आसपास अवैध कब्जों पर हाईकोर्ट सख्त, बाकी अवैध ढांचे भी हटाने का आदेश; अब तक 57 कब्जे ध्वस्त

लखनऊ जिला एवं सत्र न्यायालय के आसपास अवैध अतिक्रमण को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने बचे हुए अवैध ढांचों को हटाने का आदेश दिया है। सुनवाई में बताया गया कि पहले के आदेश के बाद अब तक 57 और अवैध अतिक्रमण हटाए जा चुके हैं।

Sonali12 सित. 2026, 06:01 PM IST
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लखनऊ जिला कोर्ट के आसपास अवैध कब्जों पर हाईकोर्ट सख्त, बाकी अवैध ढांचे भी हटाने का आदेश; अब तक 57 कब्जे ध्वस्त

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लखनऊ जिला एवं सत्र न्यायालय के आसपास किए गए अवैध अतिक्रमण को लेकर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को क्षेत्र में बचे हुए सभी अवैध अतिक्रमण और अवैध ढांचों को हटाने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि उसके पहले के निर्देशों के अनुपालन में 57 और अवैध अतिक्रमण हटाए जा चुके हैं।

दो याचिकाओं पर हुई सुनवाई

यह आदेश जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस राजीव भारती की पीठ ने दो संबंधित रिट याचिकाओं की सुनवाई के दौरान दिया। दोनों याचिकाओं में लखनऊ जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर के आसपास तथा शहर के अन्य सार्वजनिक स्थानों पर कथित अवैध अतिक्रमण का मुद्दा उठाया गया था। याचिकाओं के माध्यम से अदालत का ध्यान इस बात की ओर दिलाया गया था कि सार्वजनिक भूमि और न्यायालय परिसर के आसपास कई स्थानों पर अवैध निर्माण एवं कब्जे किए गए हैं। मामले की सुनवाई के दौरान प्रशासन की ओर से पहले दिए गए अदालती निर्देशों पर की गई कार्रवाई की जानकारी भी कोर्ट के सामने रखी गई।

57 और अवैध अतिक्रमण हटाए गए

हाईकोर्ट को बताया गया कि उसके पूर्व के आदेश के बाद कार्रवाई करते हुए 57 अतिरिक्त अवैध अतिक्रमण हटाए जा चुके हैं। अदालत ने इस कार्रवाई को रिकॉर्ड पर लिया, लेकिन यह स्पष्ट किया कि क्षेत्र में यदि अभी भी अवैध ढांचे या अतिक्रमण मौजूद हैं तो उन्हें भी हटाया जाना चाहिए। कोर्ट ने अधिकारियों को शेष अवैध अतिक्रमणों को हटाने की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया। इसका उद्देश्य जिला न्यायालय के आसपास सार्वजनिक स्थानों को अतिक्रमण से मुक्त कराना और प्रशासनिक एवं न्यायिक परिसरों के आसपास व्यवस्थित व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

बचे हुए अवैध ढांचे भी हटाने का निर्देश

पीठ ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि पहले की कार्रवाई के बाद भी यदि कोई अवैध संरचना या अतिक्रमण बचा हुआ है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। कोर्ट ने इस मामले में अधिकारियों द्वारा की जा रही कार्रवाई पर निगरानी जारी रखी है। अदालत का यह रुख सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जों को लेकर उसकी गंभीरता को दर्शाता है। हाईकोर्ट ने पहले भी ऐसे मामलों में संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को अतिक्रमण हटाने और सार्वजनिक स्थानों को अतिक्रमण मुक्त रखने के निर्देश दिए हैं।

सार्वजनिक जगहों पर अतिक्रमण को लेकर सख्ती

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट का मुख्य जोर इस बात पर रहा कि सार्वजनिक उपयोग की जमीन और महत्वपूर्ण संस्थानों के आसपास अवैध कब्जों को बने रहने नहीं दिया जा सकता। जिला एवं सत्र न्यायालय जैसे महत्वपूर्ण न्यायिक परिसर के आसपास यातायात, सुरक्षा और आम लोगों की आवाजाही को देखते हुए अतिक्रमण हटाना महत्वपूर्ण माना गया है। हाईकोर्ट ने अधिकारियों से अपेक्षा की है कि वे शेष अवैध अतिक्रमणों के खिलाफ भी आवश्यक कार्रवाई करें और अदालत के निर्देशों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित करें। इस मामले में अदालत ने अब तक हटाए गए 57 अतिरिक्त अतिक्रमणों की कार्रवाई को संज्ञान में लेते हुए शेष अवैध संरचनाओं को हटाने का निर्देश दिया है। मामले की आगे की सुनवाई में प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई की स्थिति पर नजर रखी जाएगी।