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2012 की सड़क दुर्घटना में 21 वर्षीय युवक की मौत, 14 साल बाद कल्याण MACT का फैसला; ₹9.20 लाख मुआवजा देने का आदेश
2012 के सड़क हादसे में 21 वर्षीय युवक की मौत के मामले में कल्याण MACT ने 14 साल बाद फैसला सुनाते हुए उसके माता-पिता को ₹9.20 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने डंपर चालक की लापरवाही को हादसे का कारण माना। वहीं, चालक के पास वैध कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस नहीं होने के बावजूद बीमा कंपनी को पहले मुआवजा देने और बाद में वाहन मालिक KDMC से रकम वसूलने की अनुमति दी गई।

डंपर चालक के पास कमर्शियल वाहन चलाने का वैध लाइसेंस नहीं था, फिर भी बीमा कंपनी को पहले भुगतान कर मालिक से रकम वसूलने की मिली छूट कल्याण में 2012 की सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले 21 वर्षीय युवक के माता-पिता को करीब 14 साल बाद मुआवजा मिला है। कल्याण के मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT) ने मृतक के माता-पिता को कुल ₹9.20 लाख मुआवजा 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ देने का आदेश दिया है। ट्रिब्यूनल ने दुर्घटना के लिए डंपर चालक की लापरवाही को जिम्मेदार माना। यह फैसला 11 सितंबर 2026 को कल्याण के Member, MACT एवं District Judge-2 आर.वी. ताम्हणकर ने M.A.C.P. No. 163/2012 में सुनाया।
पुणे लिंक रोड पर हुआ था हादसा
मामला 14 अप्रैल 2012 का है। याचिका के अनुसार, 21 वर्षीय संदीप उदयकुमार नायर अपने दोस्त के साथ मोटरसाइकिल से जा रहे थे। दोपहर करीब 2 बजे वे चक्की नाका से श्रीराम थिएटर की ओर पुणे लिंक रोड पर देवेंद्र ऑटो पार्ट्स गैराज के सामने पहुंचे। इसी दौरान MH-05-N-0208 नंबर का मोटर डंपर तेज और लापरवाही से चलाते हुए वहां पहुंचा। आरोप था कि डंपर चालक ने बिना उचित सावधानी के वाहन चलाया, जिसके कारण दुर्घटना हुई और संदीप गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें पहले श्रीदेवी अस्पताल और बाद में रुख्मिणीबाई अस्पताल, कल्याण ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। हादसे के संबंध में कोलसेवाड़ी पुलिस स्टेशन में चालक के खिलाफ IPC की धारा 279, 337 और 304-A तथा मोटर वाहन अधिनियम की धारा 184 के तहत मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने मामले में चार्जशीट भी दाखिल की थी।
बीमा कंपनी ने उठाया चालक के लाइसेंस का मुद्दा
मामले की सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने दावा किया कि हादसे के समय डंपर चालक के पास भारी वाणिज्यिक वाहन चलाने का वैध लाइसेंस नहीं था। बीमा कंपनी की ओर से पेश साक्ष्य और ड्राइविंग लाइसेंस के दस्तावेजों की जांच के बाद ट्रिब्यूनल ने माना कि चालक के पास भारी वाहन चलाने का लाइसेंस तो था, लेकिन भारी मालवाहक वाणिज्यिक वाहन यानी डंपर चलाने के लिए आवश्यक वैध लाइसेंस नहीं था। ट्रिब्यूनल ने इसे बीमा पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन माना।
फिर भी बीमा कंपनी को पहले देना होगा मुआवजा
हालांकि, ट्रिब्यूनल ने बीमा कंपनी को सीधे मुआवजा देने से पूरी तरह मुक्त नहीं किया। बीमा पॉलिसी में मौजूद ‘avoidance clause’ और सुप्रीम कोर्ट के संबंधित फैसलों को देखते हुए अदालत ने बीमा कंपनी को पहले मुआवजे की राशि पीड़ित परिवार को देने का निर्देश दिया। इसके बाद बीमा कंपनी को यह राशि डंपर के मालिक, यानी कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका से कानून के अनुसार वसूल करने की अनुमति दी गई है।
KDMC को भी ठहराया जिम्मेदार
डंपर कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका के नाम पर पंजीकृत था। महानगरपालिका की ओर से यह तर्क दिया गया था कि वाहन का संचालन ठेकेदार M/s Antony Wastehandling Cell Pvt. Ltd. के जरिए किया जा रहा था और इसलिए मुआवजे की जिम्मेदारी ठेकेदार की होनी चाहिए। लेकिन ट्रिब्यूनल ने क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय से प्राप्त रिकॉर्ड और वाहन के Registration Certificate को देखते हुए पाया कि डंपर का मालिक KDMC ही था। इसलिए वाहन चालक की लापरवाही के लिए KDMC को भी जिम्मेदार माना गया।
9.20 लाख रुपये का मुआवजा कैसे तय हुआ?
ट्रिब्यूनल ने मृतक की उम्र 21 वर्ष और दुर्घटना के समय उसकी मासिक आय ₹5,000 मानी। अदालत ने भविष्य की संभावनाओं के लिए 50 प्रतिशत की वृद्धि जोड़ते हुए वार्षिक आय ₹90,000 मानी। अविवाहित मृतक के व्यक्तिगत खर्च के लिए 50 प्रतिशत कटौती के बाद वार्षिक योगदान ₹45,000 माना गया। 21 वर्ष की उम्र के आधार पर 18 का multiplier लागू करते हुए loss of dependency ₹8.10 लाख तय किया गया। इसके अलावा माता-पिता को consortium के लिए ₹80,000, loss of estate के लिए ₹15,000 और funeral expenses के लिए ₹15,000 दिए गए। इस तरह कुल मुआवजा ₹9.20 लाख तय हुआ।
7.5 प्रतिशत ब्याज के साथ एक महीने में भुगतान
कल्याण MACT ने KDMC और New India Assurance Co. Ltd. को संयुक्त रूप से ₹9.20 लाख मुआवजा 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ देने का आदेश दिया है। ब्याज याचिका दाखिल करने की तारीख से राशि जमा होने तक लागू होगा। राशि का 50-50 प्रतिशत दोनों आवेदकों यानी मृतक के पिता उदयकुमार अच्युचंदन नायर और मां लता उदयकुमार नायर के बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाएगा। अदालत ने बीमा कंपनी को पहले मुआवजे का भुगतान करने और उसके बाद KDMC से राशि की वसूली करने की स्वतंत्रता दी है। पूरी राशि पुरस्कार की तारीख से एक महीने के भीतर MACT खाते में जमा करने का निर्देश दिया गया है।
