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13 महीने बाद नांदणी मठ लौटी माधुरी, स्वागत में उमड़ा जनसैलाब

करीब 13 महीने बाद गुजरात के जामनगर स्थित वंतारा से हथिनी माधुरी (महादेवी) की कोल्हापुर के नांदणी मठ में वापसी हुई। करीब 1,160 किलोमीटर का सफर तय कर पहुंची माधुरी के स्वागत में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और ग्रामीण जुटे। रास्ते में रंगोली, फूलों की बारिश, ढोल-ताशे और आतिशबाजी के साथ उसका स्वागत किया गया। मठ और ग्रामीणों ने उसकी वापसी को आस्था और लंबे संघर्ष की जीत बताया।

Neha Sharma12 सित. 2026, 06:01 PM IST
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13 महीने बाद नांदणी मठ लौटी माधुरी, स्वागत में उमड़ा जनसैलाब

कोल्हापुर: करीब 13 महीने तक गुजरात के जामनगर स्थित वंतारा में रहने के बाद प्रसिद्ध हथिनी माधुरी, जिसे कोल्हापुर में महादेवी के नाम से भी जाना जाता है, आखिरकार अपने पुराने ठिकाने नांदणी मठ लौट आई। शुक्रवार देर रात शिरोळ तहसील के नांदणी गांव में उसकी वापसी पर हजारों श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने जोरदार स्वागत किया। माधुरी को वंतारा से विशेष एनिमल एंबुलेंस के जरिए महाराष्ट्र लाया गया। गुजरात से नांदणी तक उसने करीब 1,160 किलोमीटर का सफर लगभग 32 घंटे में पूरा किया। रास्ते में कई जगह लोगों ने फूल बरसाकर उसका स्वागत किया। महाराष्ट्र-गुजरात सीमा से लेकर नांदणी तक उसके आने को लेकर लोगों में खास उत्साह देखने को मिला।


गांधी चौक तक उमड़ा जनसैलाब

माधुरी के नांदणी पहुंचने से पहले ही गांव में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और ग्रामीण जमा हो गए थे। गांधी चौक और मठ परिसर को रंगोली और सजावट से तैयार किया गया। लोग हाथों में फूल लेकर उसकी प्रतीक्षा करते रहे। उसके पहुंचते ही ढोल-ताशे बजाए गए और फूलों की बारिश की गई। कई जगह गुलाल उड़ाया गया और आतिशबाजी भी हुई। मठ प्रशासन और स्थानीय लोगों ने माधुरी की वापसी को भावनाओं, आस्था और लंबे समय से चल रहे प्रयासों की जीत बताया। नांदणी मठ के प्रमुख ने कहा कि माधुरी का धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व है और उसकी वापसी पूरे क्षेत्र के लिए भावुक क्षण है।


2025 में वंतारा भेजी गई थी माधुरी

माधुरी को 30 जुलाई 2025 को हाई-पावर्ड कमेटी के निर्देशों के तहत नांदणी से वंतारा भेजा गया था। उस समय उसके स्वास्थ्य और पशु कल्याण से जुड़ी चिंताओं को देखते हुए उसे उपचार और देखभाल के लिए जामनगर भेजा गया था। इस फैसले को बाद में बॉम्बे हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के समक्ष भी चुनौती दी गई और न्यायिक प्रक्रिया के बाद मामला हाई-पावर्ड कमेटी के सामने पहुंचा। माधुरी के स्वास्थ्य को लेकर वंतारा ने बताया कि वहां उसके स्वास्थ्य की लगातार निगरानी और उपचार किया गया। वंतारा ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने हथिनी की कस्टडी की मांग नहीं की थी, बल्कि संबंधित निर्देशों के तहत उसकी देखभाल की थी।


हाई-पावर्ड कमेटी की मंजूरी के बाद हुई घर वापसी

माधुरी को नांदणी वापस लाने का रास्ता 9 सितंबर 2026 को हाई-पावर्ड कमेटी की मंजूरी के बाद साफ हुआ। समिति ने नांदणी मठ में उपलब्ध सुविधाओं और संबंधित पक्षों की रिपोर्ट पर विचार करने के बाद उसे वापस भेजने की अनुमति दी। इसके बाद गुजरात से महाराष्ट्र तक उसके सुरक्षित परिवहन की प्रक्रिया शुरू हुई। वापसी के दौरान उसके साथ महावत और वंतारा की टीम भी रही। यात्रा के दौरान उसकी स्थिति पर लगातार नजर रखी गई और जरूरत के अनुसार ठहराव किया गया।


स्वागत के दौरान लोगों से संयम की अपील

माधुरी की वापसी को लेकर लोगों में जबरदस्त उत्साह था, लेकिन मठ और स्थानीय नेताओं ने श्रद्धालुओं से अपील की कि लंबी यात्रा के बाद हथिनी को पर्याप्त आराम दिया जाए। पूर्व सांसद राजू शेट्टी ने लोगों से कम से कम दो-तीन दिन माधुरी को आराम देने की अपील की, ताकि वह यात्रा की थकान से उबर सके।


वापसी के बाद भी जारी रहेगी स्वास्थ्य निगरानी

माधुरी की वापसी कुछ शर्तों के साथ हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, उसे जुलूस या अन्य सार्वजनिक उपयोग में नहीं लाया जा सकेगा। उसकी नियमित स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था भी की गई है। वंतारा के पशु चिकित्सक हर दो सप्ताह में कोल्हापुर आकर उसकी जांच करेंगे और स्वास्थ्य रिपोर्ट अधिकारियों को देंगे। माधुरी की घर वापसी को लेकर जहां नांदणी और आसपास के इलाकों में खुशी का माहौल है, वहीं पशु कल्याण को लेकर भी निगरानी जारी रहेगी। उसकी सेहत, रहने की व्यवस्था और देखभाल के मानकों पर संबंधित अधिकारियों की नजर रहेगी। इस तरह 13 महीने के लंबे इंतजार के बाद माधुरी एक बार फिर नांदणी मठ पहुंच गई है। उसके स्वागत में उमड़ी भीड़ ने दिखाया कि स्थानीय लोगों के लिए यह हथिनी केवल धार्मिक परंपरा का हिस्सा नहीं, बल्कि लंबे समय से जुड़ी भावनाओं और सामाजिक आस्था का भी प्रतीक है।