health

तेज DJ और त्योहारों का शोर दिल के लिए भी खतरा! डॉक्टरों ने दी चेतावनी

पुणे में गणेशोत्सव के दौरान बढ़ते ध्वनि प्रदूषण को लेकर नागरिक समूहों की चिंता के बीच डॉक्टरों ने अत्यधिक तेज आवाज के स्वास्थ्य पर असर को लेकर चेताया है। विशेषज्ञों के अनुसार तेज और लगातार शोर शरीर में तनाव प्रतिक्रिया बढ़ा सकता है, जिससे रक्तचाप और हृदय गति प्रभावित हो सकती है। इसका खतरा खासकर बुजुर्गों और पहले से हृदय संबंधी समस्याओं वाले लोगों में अधिक हो सकता है।

Kalpana Gautam12 सित. 2026, 06:01 PM IST
खबर शेयर करें:
तेज DJ और त्योहारों का शोर दिल के लिए भी खतरा! डॉक्टरों ने दी चेतावनी
पुणे में गणेशोत्सव के दौरान बढ़ते ध्वनि प्रदूषण को लेकर नागरिक समूहों की चिंता के बीच डॉक्टरों ने अत्यधिक तेज आवाज के स्वास्थ्य पर असर को लेकर चेताया है। विशेषज्ञों के अनुसार तेज और लगातार शोर शरीर में तनाव प्रतिक्रिया बढ़ा सकता है, जिससे रक्तचाप और हृदय गति प्रभावित हो सकती है। इसका खतरा खासकर बुजुर्गों और पहले से हृदय संबंधी समस्याओं वाले लोगों में अधिक हो सकता है।

पुणे में गणेशोत्सव की तैयारियों के बीच DJ, लाउडस्पीकर, ढोल-ताशे और अन्य तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम को लेकर बहस तेज हो गई है। नागरिक समूह अत्यधिक ध्वनि पर नियंत्रण की मांग कर रहे हैं, वहीं डॉक्टरों ने भी इसे केवल शोर या असुविधा का मुद्दा न मानकर स्वास्थ्य से जुड़ा विषय बताया है। पुणे के कार्डियक सर्जन डॉ. विजय नटराजन के अनुसार, बहुत तेज आवाज शरीर के लिए एक physiological stressor की तरह काम कर सकती है। अचानक और अत्यधिक शोर sympathetic nervous system को सक्रिय कर सकता है, जिससे stress hormones बढ़ सकते हैं और इसके परिणामस्वरूप ब्लड प्रेशर, हृदय गति और दिल पर काम का बोझ बढ़ सकता है। 


डॉक्टरों के मुताबिक बुजुर्ग, हाई ब्लड प्रेशर, coronary artery disease, heart failure या cardiac rhythm disorder से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। रात के समय तेज आवाज से नींद में खलल पड़ना भी तनाव और हृदय संबंधी जोखिमों को बढ़ा सकता है। लंबे समय तक environmental noise exposure को hypertension और cardiovascular disease जैसे जोखिमों से जोड़ने वाले वैज्ञानिक प्रमाण भी मौजूद हैं। पुणे में इस मुद्दे को लेकर नागरिक कार्यकर्ता विद्यानंद बापट भी अभियान चला रहे हैं। उनका कहना है कि मांग त्योहारों पर रोक लगाने की नहीं, बल्कि अत्यधिक ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण की है। इसी बीच महाराष्ट्र के कुछ अन्य शहरों में भी प्रशासन ने DJ और हाई-वॉल्यूम साउंड सिस्टम पर कार्रवाई शुरू की है। 


तेज festival noise से तनाव, रक्तचाप और हृदय संबंधी जोखिम प्रभावित होने की बात वैज्ञानिक रूप से समर्थित है। लेकिन यह कहना अतिशयोक्ति होगा कि तेज आवाज हर व्यक्ति में सीधे heart attack कर देती है। खतरा व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति, आवाज की तीव्रता, exposure की अवधि और बारंबारता पर निर्भर करता है।