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CBSE Board Exam 2027: करीब 30 लाख छात्रों की परीक्षा, रिकॉर्ड डिजिटल करने की तैयारी
CBSE ने 2027-28 की कक्षा 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं के लिए परीक्षा-पूर्व तैयारियां शुरू कर दी हैं। बोर्ड करीब 29.89 लाख छात्रों की जानकारी को डिजिटल करने और सत्यापित करने की प्रक्रिया शुरू कर रहा है। इसके लिए फ्लाइंग स्लिप को स्कैन कर डेटा को मौजूदा रिकॉर्ड से मिलाया जाएगा। यह प्रक्रिया CBSE के 24 क्षेत्रीय कार्यालयों में होगी।

नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 2027 की कक्षा 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं के लिए परीक्षा-पूर्व तैयारियां शुरू कर दी हैं। बोर्ड अब परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों की जानकारी को डिजिटल तरीके से तैयार और सत्यापित करने की प्रक्रिया में जुट गया है। इसके लिए CBSE ने फ्लाइंग स्लिप की स्कैनिंग और उससे प्राप्त डेटा को अंतिम रूप देने के लिए एजेंसी नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू की है।
29.89 लाख छात्र देंगे परीक्षा
CBSE के दस्तावेजों के अनुसार, 2027-28 में कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा में करीब 29.89 लाख छात्र शामिल होने की उम्मीद है। यह डेटा देशभर के 24 क्षेत्रीय कार्यालयों से जुड़ा है। इनमें दिल्ली ईस्ट, नोएडा, प्रयागराज, लुधियाना और दिल्ली वेस्ट जैसे क्षेत्र शामिल हैं। CBSE के एक अधिकारी के मुताबिक, कक्षा 12वीं में करीब 18 लाख और कक्षा 10वीं में करीब 25 से 26 लाख छात्रों की परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी संभाली जाती है। बड़ी संख्या में छात्रों के कारण इस काम को मैनुअल तरीके से करना मुश्किल है, इसलिए पिछले कुछ वर्षों से परीक्षा-पूर्व प्रक्रिया को डिजिटल किया जा रहा है।
फ्लाइंग स्लिप से तैयार होगा डेटा
CBSE परीक्षा केंद्रों पर इस्तेमाल होने वाली फ्लाइंग स्लिप में छात्र का नाम, रोल नंबर, परीक्षा केंद्र संख्या, विषय कोड और पहचान संख्या जैसी जानकारी होती है। बोर्ड इन स्लिप को स्कैन कर डिजिटल डेटा तैयार करेगा। इसके लिए इंटेलिजेंट कैरेक्टर रिकॉग्निशन (ICR), ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकॉग्निशन (OCR) और ऑप्टिकल मार्क रिकॉग्निशन (OMR) तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। स्कैन किए गए डेटा को CBSE के रिकॉर्ड से मिलाकर देखा जाएगा, ताकि नाम, रोल नंबर, विषय या परीक्षा केंद्र से जुड़ी किसी गलती को समय रहते ठीक किया जा सके।
स्कूलों को भी करना होगा डेटा वेरिफिकेशन
डिजिटल डेटा तैयार होने के बाद स्कूलों को छात्रों की जानकारी की कॉपी उपलब्ध कराई जाएगी। इसके बाद स्कूलों के माध्यम से छात्रों और अभिभावकों को नाम, पहचान संबंधी जानकारी तथा अन्य विवरण की जांच करने का मौका दिया जाएगा। सत्यापन के बाद जानकारी दोबारा ऑनलाइन जमा की जाएगी। CBSE के मुताबिक, डेटा में किसी तरह की गड़बड़ी होने पर उसे सुधारने की प्रक्रिया भी इस सिस्टम का हिस्सा होगी। इसमें गलत या डुप्लीकेट रोल नंबर, नाम, पहचान संख्या, केंद्र संख्या और विषय कोड की पहचान कर उन्हें ठीक किया जाएगा।
24 क्षेत्रीय कार्यालयों में होगा काम
यह पूरी प्रक्रिया CBSE के 24 क्षेत्रीय कार्यालयों में की जाएगी। इनमें अजमेर, प्रयागराज, अहमदाबाद, बेंगलुरु, भोपाल, भुवनेश्वर, चेन्नई, लुधियाना, देहरादून, दिल्ली ईस्ट, दिल्ली वेस्ट, गुरुग्राम, गुवाहाटी, हैदराबाद, कोलकाता, लखनऊ, नोएडा, पंचकूला, पटना, पुणे, रायपुर, रांची, तिरुवनंतपुरम और विजयवाड़ा शामिल हैं। इस काम के लिए चुनी जाने वाली एजेंसी का अनुबंध दो साल का होगा। एजेंसी स्कैनिंग, डेटा तैयार करने, रिकॉर्ड का मिलान करने, गलतियों की पहचान और अंतिम डेटा को सही करने का काम करेगी।
परीक्षा से पहले डेटा तैयार करने पर जोर
CBSE के परीक्षा संबंधी काम को मुख्य रूप से परीक्षा-पूर्व, परीक्षा अवधि और परीक्षा के बाद के चरणों में बांटा जाता है। फ्लाइंग स्लिप की स्कैनिंग परीक्षा-पूर्व प्रक्रिया का हिस्सा है। बोर्ड का कहना है कि छात्रों की संख्या लगातार बड़ी होने के कारण इन प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाना जरूरी है, ताकि मैनुअल काम में होने वाली गलतियों को कम किया जा सके।
