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बैंकों में बढ़ी बंपर नकदी पर RBI का ब्रेक, ₹1 लाख करोड़ बाजार से निकालेगा
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त नकदी को कम करने के लिए ₹1 लाख करोड़ के सरकारी बॉन्ड बेचेगा। यह बिक्री तीन चरणों में होगी। RBI के इस कदम का उद्देश्य बाजार में अतिरिक्त लिक्विडिटी को नियंत्रित करना और शॉर्ट-टर्म ब्याज दरों को संतुलित रखना है।

मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त नकदी को कम करने के लिए ₹1 लाख करोड़ के सरकारी बॉन्ड बेचने का फैसला किया है। केंद्रीय बैंक यह बिक्री ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO) के जरिए तीन चरणों में करेगा। RBI का यह कदम सिस्टम में बढ़ी अतिरिक्त लिक्विडिटी को नियंत्रित करने और मनी मार्केट की दरों को संतुलित रखने के उद्देश्य से उठाया गया है। RBI के अनुसार, कुल ₹1 लाख करोड़ की बॉन्ड बिक्री में ₹50,000 करोड़ की पहली नीलामी 17 सितंबर, जबकि ₹25,000 करोड़ की दूसरी और तीसरी नीलामी 21 सितंबर और 28 सितंबर को होगी। इन नीलामियों के जरिए सरकारी प्रतिभूतियां बाजार में बेची जाएंगी और बदले में बैंकिंग सिस्टम से रुपये की अतिरिक्त नकदी बाहर आएगी।
बैंकिंग सिस्टम में क्यों बढ़ी इतनी नकदी?
बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त लिक्विडिटी बढ़ने की प्रमुख वजह बड़े पैमाने पर विदेशी मुद्रा का प्रवाह है। हाल के महीनों में विदेशी मुद्रा जमा और बाहरी फंडिंग के जरिए बड़ी मात्रा में डॉलर भारत में आए। इन प्रवाहों के बाद RBI के विदेशी मुद्रा भंडार में भी तेज बढ़ोतरी हुई और घरेलू वित्तीय व्यवस्था में रुपये की नकदी बढ़ी। 4 सितंबर को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार $44.9 अरब बढ़कर रिकॉर्ड $785.7 अरब पहुंच गया। इस बड़े विदेशी मुद्रा प्रवाह का असर बैंकिंग सिस्टम की लिक्विडिटी पर भी पड़ा।
VRRR से पूरी तरह नहीं निकली अतिरिक्त नकदी
RBI पहले भी Variable Rate Reverse Repo (VRRR) जैसी व्यवस्था के जरिए अतिरिक्त नकदी को अस्थायी रूप से सोखने की कोशिश कर चुका है। हालांकि, इन ऑपरेशनों में बैंकों की भागीदारी उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। इसके बाद केंद्रीय बैंक ने अब OMO के जरिए अपेक्षाकृत स्थायी तरीके से लिक्विडिटी कम करने का फैसला किया है। सितंबर की शुरुआत में बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त लिक्विडिटी करीब ₹10.3 लाख करोड़ तक पहुंच गई थी और बाद में यह और बढ़ी। इतनी बड़ी अतिरिक्त नकदी के कारण शॉर्ट-टर्म मनी मार्केट दरों पर भी दबाव देखने को मिला।
OMO के जरिए कैसे निकलेगी नकदी?
ओपन मार्केट ऑपरेशन यानी OMO में RBI सरकारी प्रतिभूतियों को बाजार में बेचता है। बैंक और अन्य वित्तीय संस्थान इन बॉन्ड को खरीदने के लिए RBI को रुपये देते हैं। इस तरह बैंकिंग सिस्टम से नकदी निकलकर RBI के पास चली जाती है। इससे बाजार में उपलब्ध अतिरिक्त रुपये कम होते हैं और RBI को शॉर्ट-टर्म ब्याज दरों को अपने मौद्रिक नीति रुख के अनुरूप बनाए रखने में मदद मिलती है। यह कदम रेपो रेट बढ़ाने के बराबर नहीं है। OMO एक लिक्विडिटी मैनेजमेंट टूल है, जबकि रेपो रेट मौद्रिक नीति का प्रमुख ब्याज दर उपकरण है।
बॉन्ड यील्ड पर पड़ सकता है असर
RBI की बॉन्ड बिक्री से सरकारी प्रतिभूतियों की बाजार में उपलब्धता बढ़ेगी। ऐसे में बॉन्ड यील्ड पर ऊपर की ओर दबाव पड़ सकता है। घोषणा के बाद 10 साल की बेंचमार्क सरकारी बॉन्ड यील्ड 7.02% तक पहुंच गई थी। हालांकि, वास्तविक असर नीलामी में निवेशकों की मांग और बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा।
सरकार और बाजार पर क्या असर?
RBI का यह कदम बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त नकदी को नियंत्रित करने में मदद करेगा। हालांकि, बॉन्ड यील्ड बढ़ने पर सरकार के लिए बाजार से उधार लेने की लागत पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं, बैंकों और वित्तीय बाजारों के लिए पर्याप्त लेकिन नियंत्रित लिक्विडिटी बनाए रखना जरूरी है, ताकि शॉर्ट-टर्म ब्याज दरों में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव न हो। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी कहा है कि केंद्रीय बैंक के पास लिक्विडिटी को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त विकल्प मौजूद हैं और जरूरत के अनुसार अलग-अलग उपाय किए जा सकते हैं। कुल मिलाकर, ₹1 लाख करोड़ की OMO बॉन्ड बिक्री RBI की अतिरिक्त लिक्विडिटी को नियंत्रित करने की बड़ी कार्रवाई है। इसका मुख्य उद्देश्य बैंकिंग सिस्टम में जरूरत से ज्यादा नकदी को कम करना और वित्तीय बाजार में संतुलन बनाए रखना है।
