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विदेशी मुद्रा भंडार में रिकॉर्ड उछाल, भारत का रिजर्व बढ़कर $785.71 अरब हुआ

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 4 सितंबर 2026 को समाप्त सप्ताह में रिकॉर्ड $785.71 अरब पर पहुंच गया। RBI के आंकड़ों के अनुसार, एक सप्ताह में भंडार में $44.90 अरब की रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई। इस उछाल में विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों की बड़ी भूमिका रही, जबकि देश का स्वर्ण भंडार थोड़ा घटा।

Neha Sharma13 सित. 2026, 11:00 PM IST
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विदेशी मुद्रा भंडार में रिकॉर्ड उछाल, भारत का रिजर्व बढ़कर $785.71 अरब हुआ

मुंबई: भारत का विदेशी मुद्रा भंडार एक बार फिर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 4 सितंबर 2026 को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 44.90 अरब डॉलर बढ़कर 785.71 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। यह किसी एक सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार में हुई अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी है। इससे पहले 28 अगस्त को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 740.80 अरब डॉलर था। यानी केवल एक सप्ताह में इसमें करीब 45 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार 10वें सप्ताह बढ़ा है और इस दौरान कुल बढ़ोतरी करीब 120 अरब डॉलर रही है।


विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में सबसे बड़ा उछाल

ताजा आंकड़ों में भंडार बढ़ने की सबसे बड़ी वजह विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (Foreign Currency Assets) में तेज वृद्धि रही। 4 सितंबर तक विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां करीब 47.4 अरब डॉलर बढ़कर 648 अरब डॉलर से ज्यादा हो गईं। वहीं, इस दौरान भारत के सोने के भंडार के मूल्य में करीब 2.6 अरब डॉलर की कमी आई और यह लगभग 113.8 अरब डॉलर रहा। विदेशी मुद्रा भंडार में विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों के अलावा सोना, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में रिजर्व पोजिशन और विशेष आहरण अधिकार (SDR) भी शामिल होते हैं।


आखिर इतनी तेजी से क्यों बढ़ा भंडार?

विदेशी मुद्रा भंडार में इस रिकॉर्ड उछाल के पीछे RBI की ओर से जून में शुरू किए गए विशेष उपायों के तहत आया बड़ा विदेशी मुद्रा प्रवाह प्रमुख कारण रहा। इन योजनाओं के जरिए विदेशों से डॉलर जुटाने के लिए बैंकों और अन्य संस्थाओं को प्रोत्साहन दिया गया था। RBI के मुताबिक, 5 जून से 31 अगस्त के बीच इन उपायों के तहत करीब 136.3 अरब डॉलर की राशि जुटाई गई। इसमें गैर-निवासी भारतीयों (NRI) की जमा राशि का योगदान करीब 127 अरब डॉलर रहा। भारी प्रतिक्रिया के चलते RBI को संबंधित सुविधा की अवधि भी तय समय से पहले समाप्त करनी पड़ी।


भारत बना दुनिया का चौथा सबसे बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार धारक

इस रिकॉर्ड बढ़ोतरी के बाद भारत ने विदेशी मुद्रा भंडार के मामले में रूस को पीछे छोड़ दिया है। भारत अब चीन, जापान और स्विट्जरलैंड के बाद दुनिया का चौथा सबसे बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार रखने वाला देश बन गया है।


अर्थव्यवस्था के लिए क्यों महत्वपूर्ण है रिकॉर्ड भंडार?

विदेशी मुद्रा भंडार का मजबूत होना भारत के बाहरी क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। पर्याप्त डॉलर रिजर्व होने से देश को कच्चे तेल, मशीनरी और अन्य जरूरी आयातों का भुगतान करने में मदद मिलती है। वैश्विक बाजारों में अचानक अस्थिरता आने या रुपये पर दबाव बढ़ने की स्थिति में RBI इस भंडार का इस्तेमाल विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप के लिए भी कर सकता है। हालांकि, रिकॉर्ड भंडार का मतलब यह नहीं है कि रुपये में तुरंत मजबूती आ जाएगी। हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण रुपये पर दबाव बना हुआ है। RBI विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप के साथ-साथ FX स्वैप जैसे उपायों का इस्तेमाल भी कर रहा है।


बढ़ा भंडार, तो लिक्विडिटी की चुनौती भी

विदेशी मुद्रा की बड़ी आवक का एक दूसरा असर घरेलू बैंकिंग सिस्टम पर भी पड़ा है। डॉलर की आवक के बदले बाजार में रुपये की तरलता बढ़ी है। सितंबर की शुरुआत में बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त लिक्विडिटी करीब 10.3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी। इसी अतिरिक्त नकदी को नियंत्रित करने के लिए RBI ने 11 सितंबर को 1 लाख करोड़ रुपये के सरकारी बॉन्ड बेचकर लिक्विडिटी सोखने की घोषणा की है। यानी विदेशी मुद्रा भंडार में रिकॉर्ड बढ़ोतरी जहां भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति को मजबूत करती है, वहीं इतनी बड़ी पूंजी आवक को घरेलू अर्थव्यवस्था में संतुलित रखना RBI के लिए नई चुनौती भी बन गई है।


कुल मिलाकर, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 785.71 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचना देश की बाहरी वित्तीय क्षमता के लिए बड़ी उपलब्धि है। मजबूत रिजर्व से वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के दौर में भारत को बाहरी झटकों से निपटने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा मिलती है।