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नियुक्ति के समय TET नहीं था, 31 मार्च 2015 से पहले पास किया तो नहीं जाएगी नौकरी; इलाहाबाद HC ने Assistant Teacher को किया बहाल

नियुक्ति के समय TET पास नहीं था, लेकिन अगर शिक्षक ने 31 मार्च 2015 की तय समय-सीमा से पहले TET की योग्यता हासिल कर ली है, तो उसकी नौकरी सिर्फ इस आधार पर नहीं छीनी जा सकती। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने RTE Act की धारा 23 का हवाला देते हुए Assistant Teacher की नियुक्ति को सुरक्षित माना और लंबे समय से सेवा से बाहर शिक्षक को बहाल करने के साथ बकाया वेतन देने का आदेश दिया।

Sonali14 सित. 2026, 05:07 PM IST
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नियुक्ति के समय TET नहीं था, 31 मार्च 2015 से पहले पास किया तो नहीं जाएगी नौकरी; इलाहाबाद HC ने Assistant Teacher को किया बहाल

नियुक्ति के समय Teacher Eligibility Test (TET) की योग्यता नहीं होने के बावजूद यदि शिक्षक ने RTE Act के तहत निर्धारित समय-सीमा के भीतर TET पास कर लिया है, तो केवल इस आधार पर उसकी नियुक्ति समाप्त नहीं की जा सकती। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि 31 मार्च 2015 से पहले TET पास करने वाले Assistant Teacher की नियुक्ति को कानूनी संरक्षण प्राप्त है। कोर्ट ने शिक्षक को दोबारा सेवा में लेने के साथ बकाया वेतन और उस पर 6 प्रतिशत साधारण ब्याज देने का भी आदेश दिया। जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की पीठ ने यह फैसला Mohd. Mustafa Siddiqui v. District Basic Education Officer and 4 others मामले में सुनाया। कोर्ट ने कहा कि Right of Children to Free and Compulsory Education Act, 2009 की धारा 23 के पहले प्रावधान में उन शिक्षकों को निर्धारित अवधि के भीतर आवश्यक योग्यता हासिल करने की सुरक्षा दी गई थी, जिनके पास कानून लागू होने के समय न्यूनतम योग्यता नहीं थी। चूंकि RTE Act 1 अप्रैल 2010 से लागू हुआ था, इसलिए संबंधित समय-सीमा 31 मार्च 2015 तक थी।


क्या था पूरा मामला?

मामला कुशीनगर के Bal Bari Junior High School से जुड़ा था। याचिकाकर्ता की Assistant Teacher के पद पर नियुक्ति उत्तर प्रदेश Recruitment of Dependents of Government Servants Dying in Harness Rules, 1974 के तहत हुई थी। District Basic Education Officer, Kushinagar ने 30 जुलाई 2011 को नियुक्ति को मंजूरी दी थी और शिक्षक ने 10 अगस्त 2011 को कार्यभार संभाला था। बाद में 2 अगस्त 2014 को स्कूल प्रबंधन ने उनकी सेवाएं समाप्त कर दीं। termination order में उन पर दस्तावेज छिपाने और जालसाजी का आरोप लगाया गया, लेकिन किसी कथित फर्जी दस्तावेज का स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया। District Basic Education Officer ने 28 नवंबर 2014 को इस termination को मंजूरी देने से इनकार कर दिया। नियमों के तहत Assistant Teacher की सेवा समाप्त करने के लिए District Basic Education Officer की पूर्व लिखित अनुमति आवश्यक थी। इसके बावजूद शिक्षक को दोबारा काम करने की अनुमति नहीं दी गई और उन्हें वेतन भी नहीं मिला।

TET को लेकर क्या विवाद हुआ? प्रबंधन ने बाद में कोर्ट के समक्ष यह दलील दी कि नियुक्ति के समय शिक्षक के पास TET प्रमाणपत्र नहीं था, इसलिए उनकी नियुक्ति शुरू से ही योग्य नहीं थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। रिकॉर्ड के मुताबिक शिक्षक ने वर्ष 2014 में ही TET पास कर लिया था, यानी 31 मार्च 2015 की निर्धारित समय-सीमा से काफी पहले। कोर्ट ने माना कि RTE Act की धारा 23 के पहले प्रावधान और राज्य सरकार के 5 दिसंबर 2012 के Government Order को देखते हुए शिक्षक की नियुक्ति को संरक्षण प्राप्त था।


कोर्ट ने कहा- बाद में नया आधार जोड़कर पुराना आदेश नहीं बचाया जा सकता

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि termination order जिस आधार पर जारी किया गया था, बाद में affidavit के जरिए उसमें नया आधार नहीं जोड़ा जा सकता। कोर्ट ने Mohinder Singh Gill मामले में स्थापित सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा कि किसी प्रशासनिक आदेश की वैधता उसी में दिए गए कारणों के आधार पर तय की जानी चाहिए। कोर्ट के अनुसार, शिक्षक की सेवा समाप्त करते समय TET की कमी को termination का आधार नहीं बनाया गया था। इसलिए बाद में केवल इस आधार पर termination को सही ठहराने की कोशिश स्वीकार नहीं की जा सकती।


RTE Act की सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं कर सकते

हाईकोर्ट ने कहा कि यदि केंद्र सरकार द्वारा जारी NCTE की अधिसूचना को शिक्षक की सेवा समाप्त करने का आधार माना जा रहा है, तो उसी केंद्रीय कानून यानी RTE Act में दी गई वैधानिक सुरक्षा को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने माना कि संबंधित समय में लागू नियमों के तहत नियुक्ति के समय TET अनिवार्य योग्यता के रूप में निर्धारित नहीं था। साथ ही राज्य सरकार ने 5 दिसंबर 2012 के आदेश के जरिए पहले से कार्यरत बिना-TET शिक्षकों को 31 मार्च 2015 तक यह योग्यता हासिल करने का अवसर दिया था।


12 साल तक नौकरी से बाहर रखा गया, फिर भी वेतन मिलेगा

हाईकोर्ट ने शिक्षक को लंबे समय तक काम से बाहर रखने की कार्रवाई को गंभीरता से लिया। कोर्ट ने कहा कि District Basic Education Officer द्वारा termination को अस्वीकार किए जाने के बावजूद प्रबंधन ने शिक्षक को काम करने से रोक दिया। अदालत ने इसे केवल सामान्य wrongful termination का मामला नहीं माना, बल्कि कहा कि सक्षम अधिकारी के आदेश और निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया की अनदेखी करते हुए शिक्षक को जानबूझकर सेवा से बाहर रखा गया। इसी आधार पर कोर्ट ने शिक्षक को तत्काल बहाल करने और सेवा से बाहर रहने की पूरी अवधि का बकाया वेतन देने का आदेश दिया। बकाया वेतन पर 6 प्रतिशत साधारण ब्याज भी देना होगा।


Single Judge का फैसला पलटा

इलाहाबाद हाईकोर्ट की Division Bench ने Single Judge के 23 अप्रैल 2015 के फैसले को रद्द कर दिया। Single Judge ने माना था कि 23 अगस्त 2010 की NCTE notification के बाद TET आवश्यक योग्यता थी और नियुक्ति के बाद TET पास करने से शुरुआती नियुक्ति वैध नहीं हो सकती। Division Bench ने इस दृष्टिकोण को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने Special Appeal मंजूर करते हुए शिक्षक की writ petition भी स्वीकार कर ली और उनकी नियुक्ति को RTE Act की धारा 23 में उपलब्ध वैधानिक सुरक्षा के तहत सुरक्षित माना। फैसले का सीधा संदेश यह है कि जहां कानून और सरकार ने किसी शिक्षक को निर्धारित अवधि में आवश्यक योग्यता हासिल करने का अवसर दिया हो, वहां उस अवधि के भीतर योग्यता हासिल करने वाले शिक्षक की नियुक्ति को केवल नियुक्ति के समय TET नहीं होने के आधार पर खत्म नहीं किया जा सकता। हालांकि यह फैसला अपने विशेष तथ्यों और लागू वैधानिक प्रावधानों के संदर्भ में है।