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निजी जमीन पर भी पशु बाजार को लाइसेंस दे सकती है नगर पंचायत, इलाहाबाद HC ने खारिज की चुनौती
निजी जमीन पर पशु बाजार लगाने के लिए क्या नगर पंचायत लाइसेंस जारी कर सकती है? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस सवाल पर अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि नगर पंचायत को अपनी स्थानीय सीमा में पशु बाजारों को लाइसेंस देने और नियंत्रित करने का अधिकार है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जमीन निजी होने से नगर पंचायत की नियामक शक्ति खत्म नहीं होती और इसी आधार पर लाइसेंस को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1916 के तहत नगर पंचायत की शक्तियों को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि नगर पंचायत अपनी स्थानीय सीमा के भीतर पशु बाजार को लाइसेंस देने और उसे नियंत्रित करने का अधिकार रखती है, भले ही पशु बाजार निजी जमीन पर लगाया जा रहा हो। जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की पीठ ने मथुरा जिले के महावन कस्बे में बुधवार और शनिवार को लगने वाले पशु बाजार के लिए जारी लाइसेंस को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी।
क्या था मामला?
याचिकाकर्ता इमरान ने दिसंबर 2025 और मार्च 2026 में जारी उन आदेशों को चुनौती दी थी, जिनके जरिए प्रतिवादी नंबर 7 को महावन में बुधवार और शनिवार को पशु बाजार लगाने की अनुमति दी गई थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि नगर पंचायत के पास किसी पशु बाजार को लाइसेंस देने की वैधानिक शक्ति नहीं है। याचिका में उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1916 की धारा 298 और इसके साथ संलग्न List-I का हवाला दिया गया था। मुख्य सवाल यह था कि क्या नगर पंचायत के पास अपने स्थानीय क्षेत्र में पशु बाजार स्थापित करने और उसे लाइसेंस देने का अधिकार है।
नगर पंचायत को बाजार नियंत्रित करने का अधिकार
हाईकोर्ट ने अधिनियम की List-I के Article F पर गौर किया, जिसका शीर्षक "Markets, Slaughter-Houses, Sale of Food, etc." है। कोर्ट ने कहा कि इस प्रावधान में नगर पालिका को कुछ बाजारों और अन्य संबंधित गतिविधियों को लाइसेंस के अधीन रखने और नियंत्रित करने की शक्ति दी गई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस प्रावधान में 'Municipality' में नगर पंचायत भी शामिल है। इसलिए नगर पंचायत के पास अपने स्थानीय क्षेत्र में पशु बाजार को नियंत्रित करने और उसके लिए लाइसेंस जारी करने का अधिकार है।
निजी जमीन पर बाजार होने से अधिकार खत्म नहीं होगा
इस मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह था कि प्रतिवादी नंबर 7 ने पशु बाजार अपनी निजी जमीन पर स्थापित किया था। याचिकाकर्ता की ओर से इसी आधार पर भी आपत्ति उठाई गई थी।mहाईकोर्ट ने कहा कि बाजार निजी जमीन पर होने मात्र से नगर पंचायत की नियामक शक्ति समाप्त नहीं हो जाती। यदि नगर पंचायत के पास बाजार को नियंत्रित करने की शक्ति नहीं होती, तो निजी जमीन का मालिक बिना लाइसेंस के भी बाजार चला सकता था। लेकिन वैधानिक ढांचा नगर पंचायत को अपनी स्थानीय सीमा में ऐसे बाजारों को नियंत्रित करने का अधिकार देता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि बाजार के लाइसेंस के लिए कानून में शब्दशः ऐसा कोई अलग प्रावधान होना जरूरी नहीं है, जिसमें केवल 'cattle market licence' जारी करने की बात लिखी हो। अधिनियम की समग्र योजना और संबंधित प्रावधानों को पढ़ने पर नगर पंचायत की नियामक शक्ति स्पष्ट होती है।
याचिकाकर्ता के अधिकार पर भी उठाया सवाल हाईकोर्ट ने मामले में याचिकाकर्ता के locus standi यानी याचिका दाखिल करने के अधिकार पर भी सवाल उठाया। कोर्ट ने कहा कि उसे प्रतिवादी नंबर 7 के पक्ष में जारी लाइसेंस को चुनौती देने के लिए याचिकाकर्ता के पास पर्याप्त locus standi नजर नहीं आता। इन सभी पहलुओं को देखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी और महावन में निजी जमीन पर पशु बाजार लगाने के लिए नगर पंचायत द्वारा जारी लाइसेंस को चुनौती देने से इनकार कर दिया।
फैसले का महत्व
इस फैसले से स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश में नगर पंचायत की नियामक शक्तियां केवल उसकी अपनी जमीन तक सीमित नहीं हैं। यदि किसी निजी भूमि पर ऐसा बाजार संचालित किया जा रहा है, जिसे स्थानीय कानून के तहत विनियमित किया जा सकता है, तो नगर पंचायत लाइसेंस और नियमन की अपनी वैधानिक शक्ति का इस्तेमाल कर सकती है।
