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‘स्कूल में इस्लामिक प्रार्थना’ के आरोप में निलंबित शिक्षक को इलाहाबाद HC से राहत, 15 दिन में जांच पूरी करने का आदेश

स्कूल में छात्रों से कथित तौर पर इस्लामिक प्रार्थना कराने और विशेष समुदाय से जुड़ी वर्दी पहनाने के आरोप में निलंबित शिक्षक को इलाहाबाद हाईकोर्ट से फिलहाल बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने निलंबन आदेश को विभागीय जांच पूरी होने तक स्थगित रखने का निर्देश दिया है। साथ ही जांच को जल्द से जल्द, preferably 15 दिनों के भीतर पूरा करने को कहा है।

Sonali14 सित. 2026, 05:09 PM IST
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‘स्कूल में इस्लामिक प्रार्थना’ के आरोप में निलंबित शिक्षक को इलाहाबाद HC से राहत, 15 दिन में जांच पूरी करने का आदेश

प्रयागराज।

 उत्तर प्रदेश के संभल जिले में स्कूल के छात्रों द्वारा कथित तौर पर इस्लामिक प्रार्थना किए जाने और विशेष समुदाय से जुड़े होने का संकेत देने वाली वर्दी पहनने के आरोपों को लेकर निलंबित किए गए शिक्षक को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत मिली है। हाईकोर्ट ने शिक्षक के निलंबन आदेश को फिलहाल स्थगित रखते हुए विभागीय जांच को जल्द से जल्द पूरा करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की पीठ ने निर्देश दिया कि शिक्षक के खिलाफ चल रही विभागीय जांच को कानून के अनुसार जल्द पूरा किया जाए और संभव हो तो 15 दिनों के भीतर जांच समाप्त कर दी जाए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने तक शिक्षक का निलंबन आदेश स्थगित रहेगा और अंतिम जांच परिणाम के अधीन होगा। मामला 10 मई 2026 को संभल के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी किए गए निलंबन आदेश से जुड़ा है। शिक्षक मोहम्मद अनजार अहमद ने इस आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था।


क्या हैं शिक्षक पर आरोप?

शिक्षक पर आरोप था कि जब वह स्कूल में प्रभारी प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यरत थे, उस दौरान छात्रों द्वारा इस्लामिक प्रार्थना की जा रही थी और ऐसी वर्दी पहनी जा रही थी, जिससे उनके एक ‘विशेष समुदाय’ से संबंधित होने का संकेत मिलता था। राज्य की ओर से कोर्ट में दावा किया गया कि आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार शिक्षक कथित प्रार्थना के दौरान स्कूल में मौजूद थे। वहीं शिक्षक की ओर से इन आरोपों से इनकार किया गया। उनका कहना था कि संबंधित अवधि में वह स्वीकृत मेडिकल लीव पर थे और अस्पताल में भर्ती थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि जिस अवधि को लेकर आरोप लगाए गए हैं, उस दौरान वह कथित गतिविधियों के समय स्कूल में मौजूद नहीं थे।

शिक्षक की ओर से यह भी दलील दी गई कि यदि उन्हें संबंधित अवधि में प्रभारी प्रधानाध्यापक माना भी जाए, तब भी लगाए गए आरोपों के आधार पर उन पर बड़ी विभागीय सजा लगाया जाना उचित नहीं होगा।


कोर्ट ने आरोपों की मेरिट पर फैसला देने से किया इनकार

हाईकोर्ट ने इस चरण पर आरोपों की सत्यता या शिक्षक की बेगुनाही पर कोई अंतिम निष्कर्ष देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि शिक्षक अपने बचाव में मेडिकल रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों को विभागीय जांच के दौरान पेश कर सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि विभागीय जांच के दौरान याचिकाकर्ता को अपनी बेगुनाही साबित करने का पर्याप्त अवसर मिलेगा। इसके साथ ही कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को शिक्षक को सभी जरूरी दस्तावेज तीन दिनों के भीतर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।


15 दिन में जांच पूरी करने का निर्देश

हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए विभागीय जांच को जल्द से जल्द उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने का निर्देश दिया। कोर्ट ने प्राथमिकता के आधार पर इसे 15 दिनों के भीतर पूरा करने को कहा। साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिया कि जांच पूरी होने तक शिक्षक के खिलाफ जारी निलंबन आदेश प्रभावी नहीं रहेगा। हालांकि, यह राहत जांच के अंतिम परिणाम के अधीन रहेगी। इस तरह हाईकोर्ट का आदेश शिक्षक को आरोपों से अंतिम रूप से क्लीन चिट नहीं देता है। कोर्ट ने केवल विभागीय जांच को समयबद्ध तरीके से पूरा करने और तब तक निलंबन आदेश को स्थगित रखने का निर्देश दिया है।

मामले का नाम: Mohd. Anzar Ahmed vs. Principal Secretary Basic Education And 4 Others