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बड़े स्लॉटरहाउस के लिए सिर्फ FSSAI रजिस्ट्रेशन काफी नहीं, नियमित लाइसेंस जरूरी; इलाहाबाद HC ने याचिका खारिज की

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़े स्लॉटरहाउस को लेकर बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि केवल FSSAI रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट पर्याप्त नहीं है। निर्धारित क्षमता से अधिक संचालन के लिए नियमित FSSAI लाइसेंस जरूरी है और खाद्य सुरक्षा व जनस्वास्थ्य के नियमों से समझौता नहीं किया जा सकता।

Sonali14 सित. 2026, 05:09 PM IST
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बड़े स्लॉटरहाउस के लिए सिर्फ FSSAI रजिस्ट्रेशन काफी नहीं, नियमित लाइसेंस जरूरी; इलाहाबाद HC ने याचिका खारिज की

प्रयागराज। 

बड़े पैमाने पर स्लॉटरहाउस चलाने वालों के लिए केवल FSSAI रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट पर्याप्त नहीं होगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित क्षमता से अधिक पशुओं के वध वाले स्लॉटरहाउस के संचालन के लिए Food Safety and Standards Act, 2006 के तहत नियमित लाइसेंस अनिवार्य है। कोर्ट ने कहा कि कारोबार या व्यापार करने का मौलिक अधिकार भी खाद्य सुरक्षा और जनस्वास्थ्य के हित में लागू वैध लाइसेंसिंग व्यवस्था को खत्म नहीं करता। न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की पीठ ने यह टिप्पणी जु़नैद आलम की याचिका पर सुनवाई करते हुए की। याचिकाकर्ता ने कानपुर नगर के जिलाधिकारी द्वारा मई 2025 में उसके स्लॉटरहाउस को दोबारा खोलने की मांग खारिज किए जाने के आदेश को चुनौती दी थी। उसने स्लॉटरहाउस को आधुनिक बनाने के लिए उचित समय देने और इसके बाद संचालन फिर शुरू करने की अनुमति मांगी थी। हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।


क्या था पूरा मामला?

याचिकाकर्ता जु़नैद आलम कानपुर में दो यूनिट वाले स्लॉटरहाउस का संचालन करना चाहता था। उसने अपने पक्ष में 29 जून 2024 का Food Safety Registration Certificate पेश किया, जिसकी वैधता 29 नवंबर 2028 तक बताई गई थी। इस प्रमाणपत्र में व्यवसाय को ‘Slaughtering Units, Distributor’ बताया गया था और उत्पादों में frozen beef तथा frozen poultry meat का उल्लेख था। इसके अलावा याचिकाकर्ता ने GST और Udyam Registration, प्रयोगशाला जांच रिपोर्ट तथा कानपुर नगर निगम से जारी बताए गए NOC का भी हवाला दिया। उसका तर्क था कि इन दस्तावेजों के आधार पर उसे दोनों स्लॉटरिंग यूनिट संचालित करने की अनुमति मिलनी चाहिए और अधिकारियों को उसे सुनवाई का अवसर देने के साथ आधुनिकीकरण के लिए उचित समय देना चाहिए था।


सरकार ने क्या कहा?

राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि याचिकाकर्ता के पास जिस प्रकार का FSSAI Registration Certificate था, वह प्रस्तावित क्षमता वाले स्लॉटरहाउस को चलाने के लिए आवश्यक नियमित लाइसेंस का विकल्प नहीं है। सरकार ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता ने नए राज्य लाइसेंस के लिए आवेदन किया था, जिसमें प्रतिदिन 20 बड़े पशुओं की क्षमता प्रस्तावित की गई थी। हालांकि, आवेदन में कुछ कमियां पाई गईं और उसे उन्हें दूर करने के लिए वापस कर दिया गया था। यानी जिलाधिकारी के आदेश के समय तक याचिकाकर्ता को नियमित लाइसेंस जारी नहीं हुआ था।


क्या कहता है FSSAI कानून?

हाईकोर्ट ने Food Safety and Standards Act, 2006 की धारा 31 पर विचार किया। कोर्ट ने कहा कि धारा 31(1) के तहत सामान्य रूप से कोई भी खाद्य कारोबार वैध लाइसेंस के बिना शुरू या संचालित नहीं किया जा सकता। वहीं धारा 31(2) में छोटे स्तर के यानी ‘petty food business’ के लिए अपवाद का प्रावधान है, लेकिन ऐसे कारोबार के लिए भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत रजिस्ट्रेशन जरूरी है। कोर्ट ने Food Safety and Standards (Licensing and Registration of Food Businesses) Regulations, 2011 के Regulation 1.2.1(4) का भी उल्लेख किया। इसके अनुसार स्लॉटरिंग गतिविधि को ‘petty food business’ की श्रेणी में तभी माना जाता है जब उसकी क्षमता प्रतिदिन दो बड़े पशु, 10 छोटे पशु या 50 पोल्ट्री पक्षियों तक हो। इस सीमा से अधिक क्षमता के लिए नियमित लाइसेंस आवश्यक है।


20 बड़े पशुओं की क्षमता के कारण लाइसेंस जरूरी

हाईकोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता ने अपने आवेदन में प्रतिदिन 20 बड़े पशुओं की स्लॉटरिंग क्षमता बताई थी। यह क्षमता ‘petty food business’ के लिए निर्धारित दो बड़े पशुओं की सीमा से कहीं अधिक है। ऐसे में कोर्ट ने माना कि 29 जून 2024 का FSSAI Registration Certificate इस स्तर के स्लॉटरहाउस के संचालन के लिए पर्याप्त नहीं था। इसके लिए Food Safety and Standards Act की धारा 31(1) और संबंधित Regulations के तहत नियमित लाइसेंस जरूरी था।


लाइसेंस के लिए आवेदन करना भी संचालन की अनुमति नहीं

हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण बात और स्पष्ट की। कोर्ट ने कहा कि नियमित लाइसेंस के लिए आवेदन कर देना या आवेदन की रसीद मिल जाना अपने आप में स्लॉटरहाउस चलाने की अनुमति नहीं देता। चूंकि याचिकाकर्ता का लाइसेंस आवेदन कमियां दूर करने के लिए वापस किया गया था और नियमित लाइसेंस जारी नहीं हुआ था, इसलिए केवल आवेदन की acknowledgement के आधार पर स्लॉटरहाउस खोलने की अनुमति नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि GST और Udyam Registration, प्रयोगशाला रिपोर्ट तथा नगर निगम का NOC जैसे दस्तावेज सहायक हो सकते हैं, लेकिन वे उस नियमित लाइसेंस की जगह नहीं ले सकते जो कानून के तहत आवश्यक है।


Article 19(1)(g) का अधिकार भी लाइसेंस से ऊपर नहीं

याचिकाकर्ता ने व्यापार या व्यवसाय करने के मौलिक अधिकार का भी सहारा लिया था। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान के Article 19(1)(g) के तहत व्यापार करने का अधिकार खाद्य सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य के हित में बनाए गए वैध लाइसेंसिंग नियमों से मुक्त नहीं करता। कोर्ट ने कहा कि आवश्यक लाइसेंस के अभाव में स्लॉटरहाउस को दोबारा खोलने और संचालित करने की अनुमति देने का कोई निर्देश जारी नहीं किया जा सकता।


आगे आवेदन करने का रास्ता खुला

हालांकि हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी, लेकिन याचिकाकर्ता के लिए आगे का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि वह अपने लाइसेंस आवेदन में बताई गई कमियों को दूर कर सकता है और कानून के अनुसार आवश्यक दस्तावेज व अनुमतियों के साथ नया आवेदन भी कर सकता है। ऐसे आवेदन पर संबंधित अधिकारी कानून के अनुसार स्वतंत्र रूप से विचार करेंगे। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने पुलिस की कथित प्रताड़ना से जुड़े आरोपों पर कोई निष्कर्ष नहीं दिया, क्योंकि याचिका में उस आधार पर कोई राहत नहीं मांगी गई थी।

मामले का नाम: Junaid Alam vs. State of U.P. And 3 Others