culture
पति बप्पा के रंग में रंगी मुंबई, भव्य पंडालों से सजा शहर; जानिए कैसे शुरू हुआ सार्वजनिक गणेशोत्सव
मुंबई में गणेशोत्सव 2026 की धूम शुरू हो गई है। घरों और भव्य पंडालों में गणपति बप्पा की स्थापना के साथ पूरा शहर भक्ति और उत्सव के रंग में रंग गया है। जानिए मुंबई में सार्वजनिक गणेशोत्सव की शुरुआत से जुड़ी ऐतिहासिक कहानी।

गणेशोत्सव 2026 की शुरुआत के साथ मुंबई एक बार फिर भक्ति, रंग और भव्य सजावट से जगमगा उठी है। घरों और सार्वजनिक पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमाओं की स्थापना के साथ 10 दिवसीय उत्सव शुरू हो गया है। इस दौरान शहर के प्रमुख गणपति पंडालों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। मुंबई में लालबाग, परेल, गिरगांव, दादर, अंधेरी, चेंबूर और फोर्ट समेत कई इलाकों में आकर्षक सजावट और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। लालबागचा राजा, गणेश गली और चिंचपोकली जैसे प्रसिद्ध पंडाल श्रद्धालुओं के प्रमुख आकर्षण बने हुए हैं।
मुंबई में सार्वजनिक गणेशोत्सव की आधुनिक परंपरा की शुरुआत का श्रेय लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक को दिया जाता है। इतिहास के अनुसार, 1893 में गिरगांव स्थित केशवजी नायक चॉल में तिलक ने सार्वजनिक गणेशोत्सव की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य लोगों को एकजुट करना और स्वतंत्रता आंदोलन के लिए जनसमर्थन जुटाना था।
हालांकि, पुणे के भाऊसाहेब रंगारी गणपति ट्रस्ट का दावा है कि सार्वजनिक गणेशोत्सव की शुरुआत पुणे में 1892 में भाऊसाहेब रंगारी ने की थी। इसलिए महाराष्ट्र में सार्वजनिक गणेशोत्सव की शुरुआत को लेकर मुंबई और पुणे दोनों शहरों का ऐतिहासिक महत्व माना जाता है। गणेशोत्सव के दौरान घरों और मंडलों में प्राण प्रतिष्ठा, पूजा, आरती और मंत्रोच्चार के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। बाजारों में फूलों की मालाओं, मिठाइयों, सजावटी सामान और पूजा सामग्री की खरीदारी के लिए भी लोगों की भीड़ देखने को मिल रही है। इस साल गणेशोत्सव का समापन 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन होगा। इसी दिन श्रद्धालु पारंपरिक रूप से गणपति बप्पा की प्रतिमाओं का विसर्जन कर उन्हें विदाई देंगे।
