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सड़क पर रिक्शा खड़ा कर यातायात में डाली बाधा, कोर्ट में आरोपी ने कबूला गुनाह; ठाणे कोर्ट ने ठहराया दोषी
ठाणे के कोपरी में सार्वजनिक सड़क पर रिक्शा खड़ा कर यातायात में बाधा डालने के मामले में आरोपी ने कोर्ट के सामने अपराध कबूल कर लिया। ठाणे कोर्ट ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 285 के तहत उसे दोषी ठहराया।

ठाणे के कोपरी इलाके में सार्वजनिक सड़क पर रिक्शा खड़ा कर यातायात में बाधा उत्पन्न करने के मामले में आरोपी ने कोर्ट के सामने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। इसके बाद ठाणे की प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने आरोपी को भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 285 के तहत दोषी ठहराया। यह मामला ठाणे के कोर्ट नंबर 5 के समक्ष चला। मामले में आरोपी की पहचान सुनीलकुमार संतोषकुमार, उम्र 28 वर्ष, पेशे से रिक्शा चालक, निवासी इंदिरानगर, पाड़ा नंबर 2, वागले एस्टेट, ठाणे के रूप में दर्ज है। मामले में पुलिस की ओर से पुलिस शिपाई स्वप्निल देवराम सोबले शिकायतकर्ता थे।
रिकॉर्ड के अनुसार घटना 3 दिसंबर 2025 की सुबह करीब 11:30 बजे ठाणे के कोपरी इलाके में मैत्री बार के सामने सार्वजनिक सड़क पर हुई। आरोपी ने अपने कब्जे वाले रिक्शा क्रमांक MH-04-KA-3271 को सार्वजनिक सड़क पर इस तरह खड़ा किया था, जिससे यातायात में बाधा उत्पन्न होने की स्थिति बनी और दुर्घटना होने तथा मानव जीवन को खतरा पैदा होने की आशंका थी। पुलिस ने इसी आधार पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 285 के तहत मामला दर्ज किया था। मामले की सुनवाई के दौरान 12 सितंबर 2026 को आरोपी अदालत में अपने वकील के साथ उपस्थित हुआ। कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जानकारी उसे दी और मामले के तथ्यों को समझाया। कोर्ट रिकॉर्ड के मुताबिक, आरोपी से पूछा गया कि क्या उसे मामले में लगाए गए आरोपों की प्रति मिली है। आरोपी ने इसका जवाब हां में दिया। इसके बाद उससे पूछा गया कि क्या उसे पढ़कर और समझाकर बताए गए अपराध का विवरण समझ में आया है। इस पर भी आरोपी ने हां कहा।
इसके बाद अदालत ने आरोपी से पूछा कि क्या वह अपना अपराध स्वीकार करता है। आरोपी ने अपराध कबूल करने की बात कही। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अपराध स्वीकार करने की स्थिति में कानून के अनुसार उसे कारावास, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है। इसके बावजूद आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार किया। कोर्ट ने आरोपी के बयान और रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री पर विचार करने के बाद उसे भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 285 के तहत दोषी ठहराया। आदेश में यह भी दर्ज किया गया कि आरोपी ने किसी दबाव या धमकी के बिना अपनी इच्छा से अपराध स्वीकार किया है। इस मामले में अदालत ने आरोपी की स्वीकारोक्ति को दर्ज करते हुए उसे दोषी करार दिया। रिकॉर्ड से यह भी स्पष्ट है कि आरोपी ने सजा के संबंध में अदालत के समक्ष नरमी बरतने का अनुरोध किया था। यह मामला इस बात का उदाहरण है कि सार्वजनिक सड़क पर इस तरह वाहन खड़ा करना, जिससे यातायात में बाधा या मानव जीवन के लिए खतरा पैदा हो सकता है, कानूनी कार्रवाई का आधार बन सकता है। अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड और आरोपी की स्वैच्छिक स्वीकारोक्ति के आधार पर दोषसिद्धि दर्ज की।
